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केएसयू मामला: महिला एसआई दीप्ति का दावा — शुरुआती जांचकर्ताओं ने उनके नाम से गढ़ा फर्जी बयान

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केएसयू मामला: महिला एसआई दीप्ति का दावा — शुरुआती जांचकर्ताओं ने उनके नाम से गढ़ा फर्जी बयान

सारांश

केएसयू मामले में एसआईटी जांच ने नया मोड़ लिया है — महिला एसआई दीप्ति ने शुरुआती जांचकर्ताओं पर उनके नाम से फर्जी बयान गढ़ने का आरोप लगाया है। गनमैन अभिलाष का गवाही पलटना और पूर्व मंत्री वीना जॉर्ज का नाम घिरना इस मामले को केरल की राजनीति में एक बड़े विवाद में बदल रहा है।

मुख्य बातें

महिला एसआई दीप्ति ने एसआईटी को बताया कि मूल जांचकर्ताओं ने उनका बयान दर्ज किए बिना उनके नाम पर झूठा बयान तैयार किया।
फर्जी बयान में दावा था कि 25 फरवरी को कन्नूर रेलवे प्लेटफॉर्म पर पूर्व मंत्री वीना जॉर्ज का संतुलन बिगड़ा था।
इसी जांच के आधार पर केएसयू के पाँच कार्यकर्ताओं पर हत्या के प्रयास सहित संगीन आरोप लगाए गए थे; वे जमानत पर हैं।
पूर्व गनमैन अभिलाष ने बयान पलटा — दावा किया कि पहला बयान वीना जॉर्ज के कहने पर दिया था; एसआईटी डीजीपी को अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भेज सकती है।
एसआईटी ने केएसयू ज़िला अध्यक्ष एम.सी.
अतुल सहित सभी पाँच आरोपियों के बयान दर्ज किए; वीना जॉर्ज का बयान दोबारा दर्ज होने की संभावना।
वीना जॉर्ज अरनमुला विधानसभा से अपनी मौजूदा सीट हार चुकी हैं; सीपीआई (एम) का कोई नेता उनके बचाव में सामने नहीं आया।

केरल की पूर्व मंत्री वीना जॉर्ज पर केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए कथित हमले की जांच में एक नया और गंभीर मोड़ आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) को दिए बयान में उस समय की कन्नूर टाउन एसआई दीप्ति ने आरोप लगाया है कि मूल जांच दल ने कभी उनका बयान दर्ज ही नहीं किया, बल्कि उनके नाम से एक फर्जी बयान तैयार कर दिया। साथ ही, वीना के पूर्व गनमैन अभिलाष को अपनी गवाही से पलटने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

फर्जी बयान का आरोप — क्या है पूरा मामला

25 फरवरी को कन्नूर रेलवे स्टेशन पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एसआई दीप्ति, वीना जॉर्ज की सुरक्षा में तैनात थीं। उन्होंने एसआईटी को बताया कि शुरुआती जांच अधिकारियों ने उनसे कोई बयान नहीं लिया। इसके बावजूद उनके नाम पर एक लिखित बयान दर्ज किया गया, जिसमें कहा गया था कि मंत्री का कन्नूर रेलवे प्लेटफॉर्म पर संतुलन बिगड़ गया था।

यह खुलासा इसलिए अहम है क्योंकि उसी शुरुआती जांच के आधार पर केएसयू के पाँच कार्यकर्ताओं पर हत्या के प्रयास सहित कई संगीन आरोप लगाए गए थे। ये पाँचों कई दिनों तक जेल में रहे और अब जमानत पर बाहर हैं।

गनमैन का पलटा बयान — एसआईटी की कड़ी नज़र

वीना जॉर्ज के तत्कालीन गनमैन अभिलाष ने शुरुआत में दावा किया था कि प्रदर्शनकारियों ने हथियारों के साथ मंत्री पर हमले की कोशिश की। बाद में उन्होंने एसआईटी के सामने यह कहकर पूरा बयान बदल दिया कि उन्होंने किसी को भी मंत्री पर हमला करते हुए नहीं देखा था।

जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, अभिलाष ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपना पहला बयान वीना जॉर्ज के कहने पर दिया था। एसआईटी इस गवाही पलटने को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और शीघ्र ही पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को रिपोर्ट भेजने की तैयारी में है, जिसमें अभिलाष के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

शुरुआती जांच अधिकारियों पर सवाल

इन खुलासों के बाद मूल जांच दल के तौर-तरीकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। एसआईटी ने उस रेलवे पुलिस इंस्पेक्टर से भी पूछताछ करने का निर्णय लिया है, जिसने गनमैन के शुरुआती बयान के आधार पर प्रकरण दर्ज किया था। अब जांचकर्ताओं को यह परखना होगा कि क्या बयान और साक्ष्य जानबूझकर गलत तरीके से दर्ज किए गए थे।

एसआईटी अब तक केएसयू के ज़िला अध्यक्ष एम.सी. अतुल सहित सभी पाँच आरोपियों के बयान दर्ज कर चुकी है। संभावना है कि वीना जॉर्ज का बयान भी फिर से विस्तार से दर्ज किया जाएगा — इससे पहले एसआईटी उनके आवास पर जाकर प्रारंभिक बयान ले चुकी है।

वीना जॉर्ज की राजनीतिक स्थिति और सीपीआई (एम) की चुप्पी

घटना के बाद सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) ने कथित हमले के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन किए थे। लेकिन जब से ये नए तथ्य सामने आए हैं, पार्टी का एक भी वरिष्ठ नेता उनके बचाव में सार्वजनिक तौर पर नहीं आया है।

प्लेटफॉर्म पर मौजूद वीडियोग्राफरों की फुटेज सामने आने के बाद वीना जॉर्ज की छवि को कथित तौर पर काफी नुकसान पहुँचा है। सोशल मीडिया पर उनके उस दिन के व्यवहार पर तंज कसती कई रील्स वायरल हुईं। अरनमुला विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी जीत की उम्मीद लगाए बैठीं वीना अपनी मौजूदा सीट भी हार गईं।

आगे क्या होगा

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के नतीजे तय करेंगे कि शुरुआती जांच में कथित अनियमितताओं के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय या आपराधिक कार्रवाई होगी या नहीं। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक पूर्व मंत्री, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और छात्र संगठन — तीनों पक्षों की विश्वसनीयता दाँव पर है। जांच प्रक्रिया अब अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जांच प्रक्रिया से है — अगर एसआई दीप्ति के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ व्यक्तिगत अनियमितता नहीं होगी, बल्कि संस्थागत साक्ष्य-हेरफेर का गंभीर संकेत होगा। गनमैन अभिलाष का यह दावा कि उसने पहला बयान एक पूर्व मंत्री के दबाव में दिया, अगर जांच में पुष्ट होता है, तो यह केरल पुलिस की स्वायत्तता पर भी बड़ा सवाल उठाएगा। सीपीआई (एम) की मौजूदा चुप्पी बताती है कि पार्टी इस विवाद से दूरी बनाने की रणनीति अपना रही है — लेकिन यह दूरी ही उसकी पहले की सड़क-प्रदर्शन वाली एकजुटता को और संदिग्ध बनाती है। एसआईटी की रिपोर्ट इस मामले का अंत नहीं, बल्कि एक बड़े जवाबदेही परीक्षण की शुरुआत हो सकती है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केएसयू मामले में महिला एसआई दीप्ति ने क्या आरोप लगाया है?
एसआई दीप्ति ने एसआईटी को बताया कि शुरुआती जांचकर्ताओं ने उनसे कोई बयान लिए बिना उनके नाम पर एक झूठा बयान तैयार किया, जिसमें दावा किया गया था कि 25 फरवरी को कन्नूर रेलवे प्लेटफॉर्म पर पूर्व मंत्री वीना जॉर्ज का संतुलन बिगड़ा था। दीप्ति उस समय कन्नूर रेलवे स्टेशन पर मंत्री की सुरक्षा में तैनात थीं।
गनमैन अभिलाष ने अपना बयान क्यों पलटा?
अभिलाष ने एसआईटी को बताया कि उन्होंने पहले वाला बयान — जिसमें प्रदर्शनकारियों द्वारा हथियारों से हमले की कोशिश का दावा था — वीना जॉर्ज के कहने पर दिया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी को भी मंत्री पर हमला करते नहीं देखा था।
केएसयू के आरोपी कार्यकर्ताओं की अभी क्या स्थिति है?
केएसयू के पाँच कार्यकर्ताओं पर शुरुआती जांच के आधार पर हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे और वे कई दिनों तक जेल में रहे। अभी वे सभी जमानत पर बाहर हैं। एसआईटी ने केएसयू ज़िला अध्यक्ष एम.सी. अतुल सहित सभी पाँचों के बयान दर्ज कर लिए हैं।
एसआईटी आगे क्या कार्रवाई करने वाली है?
एसआईटी शीघ्र ही पुलिस महानिदेशक को रिपोर्ट भेजने की तैयारी में है, जिसमें गनमैन अभिलाष के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, उस रेलवे पुलिस इंस्पेक्टर से भी पूछताछ होगी जिसने अभिलाष के पहले बयान के आधार पर प्रकरण दर्ज किया था, और वीना जॉर्ज का बयान भी दोबारा विस्तार से दर्ज किया जा सकता है।
इस विवाद का वीना जॉर्ज की राजनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ा है?
नए खुलासों के बाद सीपीआई (एम) का कोई भी वरिष्ठ नेता वीना जॉर्ज के बचाव में सार्वजनिक रूप से नहीं आया है, जबकि पार्टी ने पहले कथित हमले के विरोध में प्रदर्शन किए थे। वीना जॉर्ज अरनमुला विधानसभा क्षेत्र से अपनी मौजूदा सीट भी हार चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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