वीना जॉर्ज हमला मामला: मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी चोट के निशान नहीं, एसआईटी जांच में नए खुलासे
सारांश
मुख्य बातें
केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज पर केरल छात्र संघ (केएसयू) कार्यकर्ताओं द्वारा कथित हमले की जांच 27 अक्टूबर 2026 को एक नए मोड़ पर पहुँच गई, जब परियारम मेडिकल कॉलेज, कन्नूर के डॉक्टरों ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को बताया कि जॉर्ज के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए थे। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें गर्दन में सूजन के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया था, न कि किसी हथियार से हुई चोट के चलते।
मेडिकल साक्ष्य और एसआईटी की कार्रवाई
एसआईटी ने परियारम मेडिकल कॉलेज के उपचारकर्ता डॉक्टरों के बयान दर्ज किए हैं और अस्पताल से वीना जॉर्ज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड भी हासिल कर लिया है। चिकित्सकों के इस बयान ने मूल शिकायत में लगाए गए हथियार से हमले के आरोप को कमज़ोर करने का काम किया है। गौरतलब है कि कन्नूर रेलवे स्टेशन पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज ने भी पहले से इस आरोप पर सवाल खड़े किए थे।
पूर्व गनमैन अभिलाष का पलटा बयान
यह खुलासे वीना जॉर्ज के पूर्व गनमैन अभिलाष के हालिया बयान के कुछ दिन बाद सामने आए हैं। अभिलाष ने एसआईटी को बताया कि उन्होंने केएसयू कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपना शुरुआती बयान जॉर्ज के निर्देश पर दिया था और उन्होंने हथियार से हमले की घटना को स्वयं नहीं देखा था। इससे पहले अभिलाष ने ही आरोप लगाया था कि कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन मंत्री पर हथियारों से हमला किया, जिसके आधार पर पुलिस ने हत्या के प्रयास सहित पाँच केएसयू कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
एक महिला इंस्पेक्टर की हैरान करने वाली गवाही
एक अन्य महिला इंस्पेक्टर ने भी एसआईटी को बताया है कि उन्होंने इस मामले में कोई बयान नहीं दिया था, लेकिन उन्हें अपने नाम से जारी एक बयान देखकर हैरानी हुई। यह गवाही मूल जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाती है और यह संकेत देती है कि कथित तौर पर दस्तावेज़ी प्रक्रिया में अनियमितताएँ हो सकती हैं।
आरोपी कार्यकर्ताओं पर असर
मूल शिकायत के आधार पर पाँचों केएसयू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था और जमानत मिलने से पहले उन्होंने 16 दिन न्यायिक हिरासत में बिताए। अब अभिलाष के पलटे बयान और मेडिकल रिपोर्ट के नए तथ्यों के बाद उन पर लगाए गए गंभीर आपराधिक आरोपों की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला 25 फरवरी को कन्नूर रेलवे स्टेशन पर केएसयू के काले झंडे वाले विरोध-प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ था।
आगे क्या होगा
एसआईटी अब पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रही है, जिसमें कथित तौर पर झूठा बयान देने के लिए अभिलाष के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। यह ध्यान देने योग्य है कि वर्तमान एसआईटी का गठन कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के सत्ता में आने के बाद आगे की जांच का आदेश देने पर हुआ था। यह मामला केरल में एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है, जिसमें पूर्व सीपीआई(एम) सरकार के कार्यकाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद इस मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई की दिशा तय होने की संभावना है।