केएसयू के कार्यकर्ताओं को वीणा जॉर्ज विरोध मामले में मिली जमानत

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केएसयू के कार्यकर्ताओं को वीणा जॉर्ज विरोध मामले में मिली जमानत

सारांश

कन्नूर में वीणा जॉर्ज के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार केएसयू के पांच कार्यकर्ताओं को जमानत मिल गई है। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी निहत्थे थे और मामले में केवल धक्का-मुक्की हुई थी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • केएसयू के कार्यकर्ताओं को मिली जमानत
  • पुलिस का कहना, प्रदर्शनकारी निहत्थे थे
  • घटना में केवल धक्का-मुक्की हुई
  • राजनीतिक विवाद बना हुआ है
  • वीणा जॉर्ज की स्वास्थ्य स्थिति पर सवाल उठे

कन्नूर (केरल), १२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल के स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज के खिलाफ कन्नूर रेलवे स्टेशन पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के पांच कार्यकर्ताओं को गुरुवार को जमानत मिल गई। इस बीच, पुलिस अधिकारियों की महत्वपूर्ण गवाही में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी निहत्थे थे और इस घटना के दौरान केवल धक्का-मुक्की हुई थी।

थालास्सेरी जिला एवं सत्र न्यायालय ने केएसयू कन्नूर जिला अध्यक्ष एम.सी. अथुल सहित पांच अभियुक्तों को जमानत प्रदान की। उन पर हत्या के प्रयास समेत नौ धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब कन्नूर टाउन पुलिस स्टेशन के तीन पुलिस अधिकारियों ने जांच दल को बताया कि काला झंडा दिखाने वाले कार्यकर्ता अपने साथ कोई हथियार नहीं लाए थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रेलवे स्टेशन पर जो घटना हुई, वह किसी हिंसक हमले के बजाय "धक्का-मुक्की" तक सीमित थी।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रदर्शनकारी मंत्री के खिलाफ काला झंडा दिखाकर अपना विरोध दर्ज कराने आए थे।

यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपियों ने हथियारों के साथ मंत्री पर हमला करने की कोशिश की थी और यह एक साजिश का हिस्सा था।

घटना के बाद नाटकीय स्थिति उत्पन्न हुई। विरोध प्रदर्शन के बाद मंत्री वीणा जॉर्ज को कन्नूर के तालुक अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बाद में रात में उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, परियाराम में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी जांच के लिए १३ सदस्यीय मेडिकल टीम बनाई गई थी।

हालांकि, मामला तब और चर्चा में आ गया जब मंत्री ने अगले दिन सुबह करीब ४ बजे डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ खुद ही अस्पताल से छुट्टी ले ली और अपनी कार से लगभग ३५० किलोमीटर का सफर तय किया।

घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने आलोचना की है और इससे सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की छवि पर भी असर पड़ा है।

केएसयू के विरोध प्रदर्शन की खबर के बाद राज्य भर में सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर मार्च निकाले, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और केएसयू के नेताओं ने कहा कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और सामान्य काला झंडा प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर हत्या के प्रयास के मामले में बदल दिया गया।

गौरतलब है कि अब तक ऐसा कोई दृश्य प्रमाण सामने नहीं आया है, जिसमें प्रदर्शनकारी मंत्री के इतना करीब आते दिखें कि वे उन पर शारीरिक हमला कर सकें। यही कारण है कि यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।

Point of View

क्योंकि इसमें छात्र संगठनों और सत्ता में बैठे नेताओं के बीच की टकराहट दिखाई देती है। पुलिस की गवाही ने मामले की गंभीरता को कम किया है, लेकिन राजनीतिक चर्चाएं अब भी जारी हैं।
NationPress
12/03/2026

Frequently Asked Questions

केएसयू के कार्यकर्ताओं को जमानत क्यों मिली?
पुलिस की गवाही के अनुसार, प्रदर्शनकारी निहत्थे थे और घटना के दौरान केवल धक्का-मुक्की हुई थी।
क्या इस मामले में राजनीतिक पहलू भी है?
हाँ, विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।
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