केरल SIT ने KSU कार्यकर्ताओं को दी क्लीन चिट, पूर्व मंत्री वीणा जॉर्ज हमला मामले में बड़ा मोड़
सारांश
मुख्य बातें
केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज पर कन्नूर रेलवे स्टेशन पर कथित हमले के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने 3 नवंबर 2026 को अदालत को बताया कि केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) के पाँच कार्यकर्ताओं के विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायालय में नहीं टिक सकते। SIT प्रमुख यू. प्रेमन ने कन्नूर की ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट सौंपकर यह स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी पूर्व मंत्री तक पहुँचे ही नहीं थे।
मुख्य घटनाक्रम
SIT की रिपोर्ट में कहा गया है कि KSU कार्यकर्ताओं ने चार्जशीट में उल्लिखित कोई भी अपराध नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार दंगा करने और रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश के आरोप भी साबित नहीं होते, और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को उनके आधिकारिक कर्तव्यों से नहीं रोका।
SIT ने यह भी स्पष्ट किया है कि काले झंडे दिखाकर विरोध करना किसी भी दृष्टि से आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं आता। प्रदर्शन और विरोध के संदर्भ में यह एक महत्त्वपूर्ण विधिक टिप्पणी मानी जा रही है।
गनमैन के बयान का निर्णायक असर
पूर्व मंत्री के सुरक्षाकर्मी अभिलाष ने SIT के समक्ष अपना पहला बयान पलट दिया। उन्होंने जाँच दल को बताया कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को वीणा जॉर्ज पर हमला करने की कोशिश करते नहीं देखा था। शुरुआती FIR और चार्जशीट काफी हद तक उनके इसी पहले बयान पर आधारित थी, जिसमें कथित तौर पर हथियारों के उपयोग का जिक्र था।
रिपोर्टों के अनुसार, अभिलाष ने SIT को यह भी बताया कि उन्होंने पूर्व मंत्री वीणा जॉर्ज के कहने पर झूठा बयान दिया था। यह खुलासा इस पूरे प्रकरण को एक अलग राजनीतिक और कानूनी आयाम देता है।
जाँच में क्या मिला, क्या नहीं
SIT को कथित हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार नहीं मिले। जाँच में यह ज़रूर पाया गया कि KSU कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हाथापाई हुई थी, लेकिन यह पूर्व मंत्री पर जानलेवा हमले के आरोप से बिल्कुल अलग है। इससे पहले SIT ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को सौंपी रिपोर्ट में भी कहा था कि विरोध-प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटना इस साल की शुरुआत में कन्नूर रेलवे स्टेशन पर हुई थी, जब चुनाव नज़दीक थे। गौरतलब है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPM ने तुरंत विरोध मार्च निकाले थे, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) ने इस घटना पर बिल्कुल उलट रुख अपनाया था। पुलिस द्वारा KSU कार्यकर्ताओं पर हत्या के प्रयास जैसे गंभीर धाराएँ लगाए जाने के बाद यह मामला एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया था।
आगे क्या होगा
अब अदालत SIT की अंतिम रिपोर्ट पर विचार करेगी। यदि अदालत इस रिपोर्ट को स्वीकार करती है, तो पाँचों KSU कार्यकर्ताओं के विरुद्ध आरोप वापस हो सकते हैं। साथ ही, गनमैन अभिलाष के बदले बयान से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी आगे की कार्रवाई संभव है। यह मामला केरल की राजनीति में सत्ता-पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए अहम परिणाम रखता है।