24 सितंबर 2026
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सुपौल डीटीओ कार्यालय में विजिलेंस का छापा, ₹15,000 रिश्वत लेते डेटा ऑपरेटर गिरफ्तार

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सुपौल डीटीओ कार्यालय में विजिलेंस का छापा, ₹15,000 रिश्वत लेते डेटा ऑपरेटर गिरफ्तार

सारांश

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो की मुहिम जारी है — सुपौल डीटीओ के डेटा ऑपरेटर को ₹15,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। यह महज़ ₹15,000 का मामला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है जहाँ ज़रूरी सरकारी काम भी बिना रकम चुकाए नहीं होते।

मुख्य बातें

विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (वीआईबी) की नौ सदस्यीय टीम ने 24 सितंबर 2026 को सुपौल डीटीओ कार्यालय में ट्रैप ऑपरेशन चलाया।
डेटा ऑपरेटर नंदलाल कुमार को शिकायतकर्ता से ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
शिकायत मधुबनी के निवासी अजहर अली ने दर्ज कराई थी, जिनसे कथित तौर पर अवैध रकम माँगी गई थी।
आरोपी पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज; पटना स्पेशल विजिलेंस कोर्ट में पेशी होगी।
इससे पहले 8 अगस्त 2026 को उद्योग विभाग के जीएम अनिल कुमार मंडल को ₹50,000 रिश्वत में गिरफ्तार किया गया था।

बिहार के सुपौल जिले के डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिस (डीटीओ) में कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर नंदलाल कुमार को विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (वीआईबी) ने 24 सितंबर 2026 को ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी विजिलेंस अभियान की एक और कड़ी है।

ट्रैप ऑपरेशन कैसे हुआ

मधुबनी जिले के ललितग्राम थाना क्षेत्र निवासी अजहर अली ने वीआईबी को शिकायत दर्ज कराई थी कि डीटीओ कार्यालय में उनसे अवैध रकम की माँग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने प्रारंभिक जाँच में आरोपों की पुष्टि की और पटना स्थित वीआईबी की नौ सदस्यीय टीम ने सुपौल के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित डीटीओ ऑफिस में ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।

ऑपरेशन के दौरान कुमार को कथित तौर पर शिकायतकर्ता अजहर अली से ₹15,000 स्वीकार करते हुए पकड़ा गया। गिरफ्तारी के तत्काल बाद विजिलेंस टीम ने कुमार को हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई आरंभ कर दी।

अधिकारी की प्रतिक्रिया

वीआईबी के डीएसपी विद्याचल प्रसाद ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई ब्यूरो को प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत आगे की जाँच जारी है। उन्होंने कहा कि रिश्वत की कथित माँग से जुड़ी सभी परिस्थितियों की गहन जाँच की जा रही है।

कानूनी कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपी नंदलाल कुमार को पटना स्थित स्पेशल विजिलेंस कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के अंतर्गत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इस ऑपरेशन ने कलेक्ट्रेट परिसर में काम करने वाले विभागीय कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा दिया।

पूर्व की कार्रवाइयाँ और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि इससे पहले 8 अगस्त 2026 को विजिलेंस विभाग ने उद्योग विभाग के महाप्रबंधक अनिल कुमार मंडल को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। उस मामले में मशीनरी आपूर्तिकर्ता कामरे आलम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि महाप्रबंधक एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने हेतु मशीनरी की आपूर्ति के बदले कमीशन की माँग कर रहे थे।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विजिलेंस ब्यूरो ने सरकारी दफ्तरों में ट्रैप ऑपरेशनों की आवृत्ति बढ़ाई है और कई विभागों में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। जाँच एजेंसी के अनुसार मामले की विस्तृत जाँच अभी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसी कार्रवाइयाँ व्यवस्थागत सुधार लाती हैं या केवल अलग-थलग मामलों तक सिमटी रहती हैं। ₹15,000 जैसी छोटी रकम की माँग यह संकेत देती है कि भ्रष्टाचार निचले स्तर तक फैला है, जहाँ आम नागरिक सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। जब तक विभागीय जवाबदेही और डिजिटल पारदर्शिता को ज़मीन पर लागू नहीं किया जाता, केवल छापेमारी से दीर्घकालिक बदलाव मुश्किल है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुपौल डीटीओ में क्या हुआ?
बिहार के सुपौल जिले के डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिस में तैनात डेटा ऑपरेटर नंदलाल कुमार को विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने 24 सितंबर 2026 को ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई शिकायतकर्ता अजहर अली की शिकायत के आधार पर चलाए गए ट्रैप ऑपरेशन में हुई।
गिरफ्तार डेटा ऑपरेटर के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
आरोपी नंदलाल कुमार पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन्हें पटना की स्पेशल विजिलेंस कोर्ट में पेश किया जाएगा। विजिलेंस टीम रिश्वत की माँग से जुड़ी पूरी परिस्थितियों की जाँच जारी रखे हुए है।
शिकायत किसने और क्यों दर्ज कराई?
मधुबनी जिले के ललितग्राम थाना क्षेत्र के निवासी अजहर अली ने वीआईबी से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई थी कि डीटीओ कार्यालय में उनसे अवैध रकम माँगी जा रही है। शिकायत की प्रारंभिक जाँच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद ट्रैप ऑपरेशन चलाया गया।
बिहार विजिलेंस ब्यूरो ने हाल में और कौन-सी बड़ी कार्रवाई की?
8 अगस्त 2026 को विजिलेंस विभाग ने उद्योग विभाग के महाप्रबंधक अनिल कुमार मंडल को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। उस मामले में आरोप था कि जीएम एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने हेतु मशीनरी आपूर्ति के बदले कमीशन माँग रहे थे।
वीआईबी ट्रैप ऑपरेशन कैसे काम करता है?
विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो पहले शिकायत प्राप्त करता है, फिर प्रारंभिक जाँच कर आरोपों की पुष्टि करता है। इसके बाद एक विशेष टीम ट्रैप ऑपरेशन चलाती है जिसमें शिकायतकर्ता की मदद से आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा जाता है और फिर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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