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बांका में बिजली विभाग के SDO बिजेंद्र कुमार गिरफ्तार, ₹20,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े

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बांका में बिजली विभाग के SDO बिजेंद्र कुमार गिरफ्तार, ₹20,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े

सारांश

बिहार के बांका जिले में सतर्कता जांच ब्यूरो ने बिजली विभाग के SDO बिजेंद्र कुमार को ₹20,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव से शुरुआत में ₹2 लाख की मांग की गई थी। दस सदस्यीय टीम ने DSP सत्येंद्र राम के नेतृत्व में यह ऑपरेशन अंजाम दिया।

मुख्य बातें

सतर्कता जांच ब्यूरो (VIB) ने बांका के राजौन बिजली उप-मंडल कार्यालय में SDO बिजेंद्र कुमार को ₹20,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव से घरेलू कनेक्शन को कमर्शियल में बदलने के लिए शुरू में ₹2 लाख , फिर ₹30,000 की मांग की गई थी।
ऑपरेशन का नेतृत्व सतर्कता DSP सत्येंद्र राम के नेतृत्व में दस सदस्यीय विशेष छापेमारी दल ने किया।
घटनास्थल पर नोटों के सीरियल नंबर सत्यापन और रासायनिक परीक्षण सहित सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
गिरफ्तार अधिकारी को आगे की पूछताछ के लिए पटना लाया गया।

बिहार के बांका जिले में सतर्कता जांच ब्यूरो (VIB) ने सोमवार, 2 जून 2026 को राजौन बिजली उप-मंडल कार्यालय में छापा मारकर बिजली विभाग के उप-मंडल अधिकारी (SDO) बिजेंद्र कुमार को ₹20,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए पटना लाया गया।

शिकायत से कैसे शुरू हुआ मामला

धोरैया थाना क्षेत्र के घासिया गांव निवासी मनोज कुमार यादव ने अपने घरेलू बिजली कनेक्शन को कमर्शियल कनेक्शन में बदलवाने के लिए आवेदन किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, SDO बिजेंद्र कुमार ने इस वैध सरकारी कार्य को संसाधित करने के बदले शुरू में ₹2 लाख की मांग रखी, जिसे बाद में घटाकर ₹30,000 कर दिया गया। रिश्वत देने से इनकार करते हुए यादव ने पटना स्थित सतर्कता जांच ब्यूरो में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

सतर्कता दल का ऑपरेशन

शिकायत मिलने पर VIB ने गुप्त जांच शुरू की। प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद अधिकारियों ने जाल बिछाने की योजना तैयार की और शिकायतकर्ता को तय राशि सौंपने का निर्देश दिया। सोमवार को जब SDO ने कथित तौर पर ₹20,000 की पहली किस्त स्वीकार की, तो सतर्कता टीम ने तत्काल हस्तक्षेप कर उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी दल का नेतृत्व

इस ऑपरेशन का नेतृत्व सतर्कता DSP सत्येंद्र राम ने किया। दस सदस्यीय विशेष छापेमारी दल में पुलिस इंस्पेक्टर राधेश्याम राम और अश्मित कुमार के साथ-साथ सब-इंस्पेक्टर शशिकांत सिंह, राहुल कुमार, रणधीर सिंह और पंकज कुमार सिंह शामिल थे।

तकनीकी और प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं

घटनास्थल पर सभी अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी की गईं, जिनमें नोटों के सीरियल नंबरों का सत्यापन और चिह्नित नोटों के लेन-देन को साबित करने के लिए रासायनिक परीक्षण शामिल हैं। ये प्रक्रियाएं न्यायालय में साक्ष्य को पुख्ता करने के लिए अपनाई जाती हैं।

आगे की कार्रवाई

गिरफ्तार SDO बिजेंद्र कुमार को पटना लाकर विधिसम्मत पूछताछ जारी है। यह मामला बिहार में सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ VIB की सक्रियता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में आरोप-पत्र दाखिल होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक वैध सरकारी सेवा — कनेक्शन बदलने जैसी सामान्य प्रक्रिया — के लिए ₹2 लाख तक की मांग कैसे हो सकती है। यह इकलौती घटना नहीं है; बिहार में बिजली विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। VIB की सक्रियता सराहनीय है, पर जब तक विभागीय जवाबदेही और पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रियाएं नहीं बनतीं, ऐसे मामले थमने के बजाय दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांका में बिजली विभाग के SDO को क्यों गिरफ्तार किया गया?
SDO बिजेंद्र कुमार को सतर्कता जांच ब्यूरो ने ₹20,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने घरेलू बिजली कनेक्शन को कमर्शियल में बदलने के सरकारी कार्य के बदले यह रिश्वत मांगी थी।
शिकायत किसने और क्यों दर्ज कराई?
धोरैया थाना क्षेत्र के घासिया गांव निवासी मनोज कुमार यादव ने शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार SDO ने कनेक्शन बदलने के लिए पहले ₹2 लाख, फिर ₹30,000 की मांग की, जिसे यादव ने मानने से इनकार कर दिया।
VIB ने गिरफ्तारी कैसे अंजाम दी?
शिकायत मिलने के बाद VIB ने गुप्त जांच की और प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने पर जाल बिछाया। शिकायतकर्ता को तय राशि सौंपने का निर्देश दिया गया और जैसे ही SDO ने ₹20,000 की पहली किस्त ली, दस सदस्यीय दल ने उन्हें मौके पर गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा?
गिरफ्तार SDO बिजेंद्र कुमार को पटना लाकर पूछताछ की जा रही है। घटनास्थल पर नोटों के सीरियल नंबर सत्यापन और रासायनिक परीक्षण सहित सभी साक्ष्य-संग्रह प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं, जिससे न्यायालय में मामला मजबूत होगा।
इस ऑपरेशन का नेतृत्व किसने किया?
ऑपरेशन का नेतृत्व सतर्कता DSP सत्येंद्र राम ने किया। दल में पुलिस इंस्पेक्टर राधेश्याम राम, अश्मित कुमार और सब-इंस्पेक्टर शशिकांत सिंह, राहुल कुमार, रणधीर सिंह तथा पंकज कुमार सिंह सहित कुल दस सदस्य शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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