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गांधी जयंती पर तमिलनाडु CM विजय की अपील — खादी खरीदें, बुनकरों की आजीविका बचाएं; सरकारी दुकानों पर 30% छूट

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गांधी जयंती पर तमिलनाडु CM विजय की अपील — खादी खरीदें, बुनकरों की आजीविका बचाएं; सरकारी दुकानों पर 30% छूट

सारांश

गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने खादी और ग्रामोद्योग उत्पाद खरीदने की अपील की। सरकारी दुकानों पर 30% छूट का ऐलान करते हुए उन्होंने इसे हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों की आजीविका से सीधे जोड़ा।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय ने गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2026) की पूर्व संध्या पर खादी खरीदने की अपील जारी की।
राज्य की सरकारी खादी दुकानों पर सभी ड्रेस मटीरियल पर 30 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है।
अपील में स्कूल-कॉलेज छात्र, सरकारी कर्मचारी, युवा और आम जनता — सभी को लक्षित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी खरीदने से हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को पहचान, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
खादी के साथ-साथ ग्रामोद्योग और ग्रामीण उद्योग के उत्पादों को भी अपनाने का आग्रह किया गया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2026) की पूर्व संध्या पर जारी एक बयान में राज्य के नागरिकों से खादी के वस्त्र और ग्रामोद्योग उत्पाद खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस खरीदारी से हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों की आजीविका मजबूत होगी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वदेशी आदर्शों को जीवंत किया जा सकेगा।

मुख्य घोषणा और छूट का ऐलान

मुख्यमंत्री विजय ने बताया कि तमिलनाडु की सरकारी खादी दुकानों पर सभी प्रकार के ड्रेस मटीरियल पर 30 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। यह छूट खादी उत्पादन से जुड़े कारीगरों के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और उन्हें आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से दी गई है।

उन्होंने अपने बयान में कहा, 'अगर हम खादी के कपड़े और उत्पाद खरीदते हैं तो इससे हथकरघा बुनकरों को पहचान और सम्मान मिलता है।' यह अपील स्कूल-कॉलेज के छात्रों, सरकारी कर्मचारियों, युवाओं और आम जनता — सभी वर्गों को संबोधित करती है।

गांधी जयंती का संदर्भ और ऐतिहासिक महत्व

मुख्यमंत्री विजय ने गांधी जयंती को केवल एक सरकारी अवकाश नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को याद करने और महात्मा गांधी के सादगी, आत्मविश्वास व मानवता जैसे मूल्यों पर मनन करने का अवसर बताया। गौरतलब है कि गांधी ने खादी को आत्मनिर्भरता और ब्रिटिश वस्त्र उद्योग के विरोध के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया था — और आज भी खादी की बिक्री लाखों ग्रामीण बुनकरों की रोज़ी से सीधे जुड़ी हुई है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के आँकड़े बताते हैं कि हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र में रोज़गार असंगठित बना हुआ है और मौसमी माँग पर अत्यधिक निर्भर है। ऐसे में किसी राज्य सरकार द्वारा सीधे छूट देकर खरीदारी को प्रोत्साहित करना एक व्यावहारिक हस्तक्षेप माना जा सकता है।

किसे मिलेगा सीधा फायदा

मुख्यमंत्री की इस अपील का सबसे सीधा लाभ तमिलनाडु के ग्रामीण जिलों में कार्यरत हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को मिलेगा, जो अपनी आजीविका के लिए पारंपरिक उत्पादन पर निर्भर हैं। खादी की माँग बढ़ने से इन परिवारों की आय में सुधार और उत्पादन चक्र में निरंतरता आ सकती है।

साथ ही, सरकारी खादी आउटलेट्स पर 30% छूट से मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं के लिए भी खादी की खरीदारी अधिक सुलभ और किफायती होगी — जो पहले इसे महंगा विकल्प मान कर टाल देते थे।

स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति

मुख्यमंत्री विजय ने केवल खादी तक ही अपनी अपील सीमित नहीं रखी — उन्होंने ग्रामोद्योग के सामान और ग्रामीण उद्योगों में निर्मित उत्पादों को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना घरेलू स्तर पर उत्पादन को प्रोत्साहित करता है और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को ज़मीनी स्तर पर साकार करता है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अपील का राज्य की खादी बिक्री पर कितना व्यावहारिक असर पड़ता है और क्या सरकार दीर्घकालिक माँग बनाने के लिए इसे नियमित नीति का हिस्सा बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या एक दिन की छूट और सार्वजनिक आग्रह हथकरघा क्षेत्र की संरचनात्मक कमज़ोरियों — जैसे असंगठित श्रम, मौसमी माँग और ई-कॉमर्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा — को वास्तव में संबोधित कर सकते हैं। गांधी जयंती पर खादी की अपील एक वार्षिक अनुष्ठान बन चुकी है; राज्य सरकारें इसे दोहराती हैं, लेकिन बुनकरों की औसत आय और उत्पादन के आँकड़े बताते हैं कि दीर्घकालिक सुधार के लिए साल-भर चलने वाली खरीद नीति और सरकारी संस्थागत माँग की ज़रूरत है। 30% छूट एक ईमानदार कदम है, पर पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में गांधी जयंती पर खादी पर कितनी छूट मिल रही है?
तमिलनाडु सरकार की खादी दुकानों पर गांधी जयंती के अवसर पर सभी ड्रेस मटीरियल पर 30 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। यह छूट खादी खरीदारी को प्रोत्साहित करने और बुनकरों की आजीविका को सहारा देने के उद्देश्य से घोषित की गई है।
सीएम विजय ने खादी खरीदने की अपील क्यों की?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की खरीद से हथकरघा बुनकरों तथा हस्तशिल्प कारीगरों को आर्थिक लाभ और सामाजिक पहचान मिलती है। साथ ही यह महात्मा गांधी के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के मूल्यों के अनुरूप भी है।
इस अपील से किसे फायदा होगा?
इस अपील का सबसे सीधा लाभ तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को मिलेगा। इसके अलावा, 30% छूट से आम उपभोक्ताओं को भी सस्ती दर पर खादी वस्त्र उपलब्ध होंगे।
सीएम विजय ने किन-किन लोगों से यह अपील की?
मुख्यमंत्री विजय ने स्कूल और कॉलेज के छात्रों, सरकारी कर्मचारियों, युवाओं और आम जनता — सभी से खादी के कपड़े तथा ग्रामोद्योग उत्पाद खरीदने का आग्रह किया। उन्होंने इसे स्थानीय उत्पादन को व्यावहारिक समर्थन देने का माध्यम बताया।
गांधी जयंती पर खादी का क्या महत्व है?
महात्मा गांधी ने खादी को ब्रिटिश वस्त्र उद्योग के विरोध और भारतीय आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया था। गांधी जयंती पर खादी पहनना और खरीदना उनके स्वदेशी आंदोलन की विरासत को जीवित रखने का एक तरीका माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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