क्या विनोद बंसल ने एआर रहमान के बयान पर ऐतराज जताया?
सारांश
Key Takeaways
- विनोद बंसल ने एआर रहमान के बयान पर ऐतराज जताया।
- फिल्म इंडस्ट्री को कम्युनल ठहराना अनुचित है।
- बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं।
- योगी सरकार से उम्मीद है कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने संगीतकार एआर रहमान के उस बयान पर ऐतराज जताया है, जिसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कम्युनिज्म के प्रभाव को काम न मिलने का कारण बताया। बंसल ने कहा कि काम न मिलने पर पूरी इंडस्ट्री को बदनाम करना कलाकारों के लिए उचित नहीं है।
विनोद बंसल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि एआर रहमान, जो एक प्रतिष्ठित संगीतकार हैं, ने अपनी पूरी जिंदगी संगीत के क्षेत्र में बिताई है। यदि किसी कारणवश उन्हें लगभग आठ वर्षों से अपेक्षित काम नहीं मिल रहा है, तो इसे पूरी इंडस्ट्री के खिलाफ आरोप नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब किसी को पद और प्रतिष्ठा मिलती है, तब वह इसका लाभ उठाते हैं, लेकिन बाद में आरोप लगाना सही नहीं है। बंसल ने यह भी कहा कि रहमान ने कई अच्छे कार्य किए हैं, लेकिन काम न मिलने के कारण पूरी इंडस्ट्री को बदनाम करना सही नहीं है, इससे पूरे क्षेत्र की छवि पर सवाल उठते हैं।
इसके अलावा, विनोद बंसल ने केजीएमयू से जुड़े कथित लव जिहाद मामलों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केजीएमयू को लव जिहाद का अड्डा बनाने की कोशिश की गई थी और इस सिलसिले में एक और आरोपी पकड़ा गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच में कई गंभीर खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए यह आशा जताई कि योगी सरकार इस प्रकार के किसी भी षड्यंत्र को सफल नहीं होने देगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विनोद बंसल ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश संसद में वहां के सांसदों द्वारा इस विषय को उठाना स्वागतयोग्य है, लेकिन दुनिया के अन्य देशों की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में लगातार मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। इसके बावजूद कई तथाकथित मानवाधिकार समर्थक नेता इस मुद्दे पर मौन हैं। बंसल ने यह भी कहा कि जो नेता भारत विरोधियों को आश्रय देने की कोशिश करते हैं, वे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर चुप क्यों हैं, यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है।