भारत के पहले टेस्ट जीत दिलाने वाले कप्तान, जिनके नाम पर है 'विजय हजारे ट्रॉफी'
सारांश
Key Takeaways
- विजय हजारे ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया।
- उन्होंने पहली बार 1,000 रन का आंकड़ा पार किया।
- उनकी कप्तानी में भारत ने पहली टेस्ट जीत हासिल की।
- विजय हजारे ट्रॉफी का आयोजन आज भी होता है।
- उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विजय सैमुअल हजारे को भारत के प्रमुख बल्लेबाजों में से एक माना जाता है। उन्होंने अपने अद्वितीय खेल कौशल से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपार सफलता हासिल की और भारतीय क्रिकेट के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सम्मान में भारत के घरेलू वनडे टूर्नामेंट का नाम 'विजय हजारे ट्रॉफी' रखा गया है।
विजय हजारे का जन्म 11 मार्च 1915 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। अपने प्रारंभिक दिनों में, उन्हें ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध स्पिन गेंदबाज क्लैरी ग्रिमेट से कोचिंग मिली।
उन्होंने 1934/35 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा और 1946 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। 31 वर्ष की आयु में उन्होंने भारत के लिए पहला मैच खेलते हुए 31 और 34 रन की पारियां खेलीं।
विजय हजारे पहले भारतीय खिलाड़ी थे जिन्होंने 1,000 रन का आंकड़ा पार किया। इसके अलावा, वह पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक (116 और 145 रन) बनाए। यह अद्वितीय उपलब्धि उन्होंने जनवरी 1948 में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हासिल की थी। वह पहले भारतीय भी हैं जिन्होंने फर्स्ट क्लास में तिहरा शतक बनाया, यह कारनामा उन्होंने 1940 में महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए बड़ौदा के खिलाफ किया था।
प्रथम श्रेणी में 50 शतक लगाने वाले पहले भारतीय विजय हजारे ने भारत की ओर से 30 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 52 पारियों में 47.65 की औसत से 2,192 रन बनाए, जिसमें 7 शतक और 9 अर्धशतक शामिल थे। उनकी कप्तानी में स्वतंत्र भारत ने पहली टेस्ट जीत 1952 में इंग्लैंड के खिलाफ पारी और 8 रन से हासिल की।
विजय हजारे ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में कुल 238 मैच खेले, जिसमें 58.38 की औसत से 18,740 रन बनाए। इस दौरान उनके खाते में 60 शतक और 73 अर्धशतक शामिल हैं।
विजय हजारे को 1960 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया और 1996 में उन्हें 'सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार' से नवाजा गया। आज उनके नाम पर भारतीय घरेलू क्रिकेट में वनडे ट्रॉफी का आयोजन किया जाता है, जिसकी शुरुआत 2002-03 में हुई थी, जिसमें रणजी की सभी टीमें भाग लेती हैं।