बिहार ने लालू यादव के जंगलराज से मुक्ति पाकर विकास दर में तमिलनाडु के बाद दूसरा स्थान प्राप्त किया: संजय सरावगी
सारांश
Key Takeaways
- बिहार विकास दर में दूसरे स्थान पर है।
- गैस की कोई किल्लत नहीं है।
- समृद्धि यात्रा का कार्य जारी है।
- भाजपा का 'परिवार भाव' कार्यशैली में महत्वपूर्ण है।
- पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
पटना, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने गैस किल्लत और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन, साथ ही मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष पर राष्ट्र प्रेस से चर्चा की।
बिहार के विकास पर सरावगी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने प्रगति यात्रा से समृद्धि यात्रा की ओर कदम बढ़ाए हैं। 23 हजार करोड़ के बजट से अब यह बढ़कर 3 लाख 47 हजार करोड़ हो गया है। लालू यादव के जंगलराज से मुक्ति के बाद, बिहार विकास दर में बड़े राज्यों में तमिलनाडु के बाद दूसरे स्थान पर आ चुका है।
उन्होंने कहा कि समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थल निरीक्षण किया, भू-सत्यापन किया और तुरंत कैबिनेट से संशोधन करके विकास योजनाओं पर कार्य आरंभ हुआ। हालांकि, विधानसभा सत्र के कारण समृद्धि यात्रा को बीच में रोकना पड़ा था, लेकिन अब यह फिर से शुरू होने जा रही है।
बेंगलुरु में गैस की कमी की खबरों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "बेंगलुरु की स्थिति के बारे में मुझे विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन बिहार में एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है। भारी मांग के बावजूद, सरकार ने न केवल आपूर्ति को सुचारू रखा है बल्कि कीमतों पर भी प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा है।"
आगामी चुनावी तैयारियों के संदर्भ में उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली पर बात की। उन्होंने कहा, "भाजपा एक राष्ट्रीय दल है और 'परिवार भाव' हमारी कार्यशैली का आधार है। जब भी किसी राज्य में चुनाव होते हैं, अन्य राज्यों के कार्यकर्ता वहां सहयोग के लिए जाते हैं।" उन्होंने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में भी दूसरे राज्यों से सैकड़ों कार्यकर्ता आए थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियां अन्य राज्यों की तुलना में काफी भिन्न और चुनौतीपूर्ण हैं।
उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जिस तरह अपमान किया गया, उसमें अहंकार और सांप्रदायिक राजनीति की झलक मिलती है। ममता बनर्जी को माफी मांगनी चाहिए, लेकिन उनका अहंकार उन्हें ऐसा करने नहीं देगा। पश्चिम बंगाल की जनता चुनाव में इस अहंकार को चकनाचूर कर देगी।