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विश्व पोलियो दिवस 2026: 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जानें टीकाकरण क्यों है अनिवार्य

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विश्व पोलियो दिवस 2026: 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जानें टीकाकरण क्यों है अनिवार्य

सारांश

24 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व पोलियो दिवस 2026 की थीम 'पोलियो का सर्वथा उन्मूलन' है। भारत 2014 से पोलियो-मुक्त है, लेकिन वैश्विक खतरा बरकरार रहने के कारण 'दो बूंद जिंदगी की' जैसे टीकाकरण अभियान आज भी उतने ही ज़रूरी हैं।

मुख्य बातें

विश्व पोलियो दिवस प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है; इस वर्ष थीम है 'एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का सर्वथा उन्मूलन' ।
इस दिवस की स्थापना रोटरी इंटरनेशनल ने पोलियो टीका विकसित करने वाले डॉ.
जोनास साल्क के सम्मान में की थी।
भारत में पोलियो का अंतिम मामला 2011 में आया; WHO ने 2014 में भारत को पोलियो-मुक्त घोषित किया।
'दो बूंद जिंदगी की' अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष के बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) पिलाई जाती है।
भारत में दो प्रकार के टीके उपयोग में हैं — IPV (इंजेक्शन) और OPV (बूंदें); पोलियो का अब तक कोई इलाज नहीं, केवल टीकाकरण से बचाव संभव।

विश्व पोलियो दिवस प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पोलियो टीकाकरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और दुनिया को इस घातक बीमारी से मुक्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति देना है। इस वर्ष 2026 की थीम 'एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का सर्वथा उन्मूलन' रखी गई है, जो पोलियो के पूर्ण खात्मे की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2014 में आधिकारिक रूप से पोलियो-मुक्त घोषित किया था, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सतर्कता और टीकाकरण अभियान अभी भी जारी रखना अनिवार्य है।

पोलियो क्या है और यह कितना खतरनाक है

पोलियो (पोलियोमाइलाइटिस) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करती है। यह वायरस मानव तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर हमला करता है और कुछ मामलों में स्थायी पक्षाघात (पैरालिसिस) का कारण बन सकता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार आज तक इस बीमारी का कोई पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, परंतु समय पर टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।

विश्व पोलियो दिवस की स्थापना कैसे हुई

इस दिवस की स्थापना रोटरी इंटरनेशनल ने प्रख्यात अमेरिकी वायरोलॉजिस्ट डॉ. जोनास साल्क के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में की थी। डॉ. साल्क वही वैज्ञानिक थे जिन्होंने दुनिया का पहला सफल पोलियो-रोधी टीका विकसित किया था। उनके इस अविष्कार ने लाखों बच्चों को स्थायी विकलांगता से बचाया और पोलियो-उन्मूलन की नींव रखी।

भारत की पोलियो-मुक्त यात्रा

भारत में पोलियो का अंतिम दर्ज मामला वर्ष 2011 में सामने आया था। इसके बाद तीन वर्षों के अथक प्रयासों के पश्चात WHO ने 2014 में भारत को आधिकारिक रूप से पोलियो-मुक्त राष्ट्र का दर्जा दिया। इस सफलता में 'दो बूंद जिंदगी की' अभियान की भूमिका ऐतिहासिक रही, जिसके तहत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) पिलाई जाती है। गौरतलब है कि यह अभियान आज भी जारी है, क्योंकि पड़ोसी देशों में पोलियो के मामले सामने आने से खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

भारत में कौन-से टीके उपलब्ध हैं

देश में बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने के लिए दो प्रकार के टीके उपयोग में लाए जाते हैं। पहला है इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (IPV), जो जन्म के बाद इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करता है। दूसरा है ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV), जो बूंदों के रूप में बच्चों को पिलाई जाती है और 'दो बूंद जिंदगी की' अभियान का मुख्य आधार है।

टीकाकरण क्यों है आज भी उतना ही ज़रूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही भारत पोलियो-मुक्त घोषित हो चुका है, वैश्विक स्तर पर यह बीमारी अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यह ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है जब कुछ देशों में पोलियो वायरस के नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं। इसलिए प्रत्येक बच्चे का समय पर टीकाकरण, स्वच्छता बनाए रखना और जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है। विश्व पोलियो दिवस 2026 यह संदेश देता है कि उन्मूलन की दिशा में हर कदम महत्वपूर्ण है और एक भी बच्चे का टीकाकरण न होना पूरी श्रृंखला को कमज़ोर कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दर्जा स्थायी नहीं है — यह निरंतर टीकाकरण कवरेज पर टिका है। चिंता की बात यह है कि कुछ राज्यों में टीकाकरण दर अभी भी असमान है, और पोलियो वायरस के नए वैरिएंट वैश्विक स्तर पर उभर रहे हैं। विश्व पोलियो दिवस को महज एक जागरूकता दिवस मानने की बजाय नीति-निर्माताओं को इसे टीकाकरण बुनियादी ढाँचे की समीक्षा के अवसर के रूप में लेना चाहिए। एक भी पीढ़ी का अधूरा टीकाकरण दशकों की मेहनत को जोखिम में डाल सकता है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व पोलियो दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व पोलियो दिवस प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसकी स्थापना रोटरी इंटरनेशनल ने पोलियो का पहला सफल टीका विकसित करने वाले अमेरिकी वायरोलॉजिस्ट डॉ. जोनास साल्क के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में की थी, ताकि पोलियो टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
विश्व पोलियो दिवस 2026 की थीम क्या है?
वर्ष 2026 में विश्व पोलियो दिवस की थीम 'एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का सर्वथा उन्मूलन' है। यह थीम वैश्विक स्तर पर पोलियो के पूर्ण खात्मे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारत को पोलियो-मुक्त कब घोषित किया गया था?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2014 में भारत को आधिकारिक रूप से पोलियो-मुक्त देश घोषित किया था। भारत में पोलियो का अंतिम दर्ज मामला 2011 में सामने आया था।
बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए कौन-से टीके दिए जाते हैं?
भारत में दो प्रकार के पोलियो टीके उपयोग में हैं — इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (IPV), जो जन्म के बाद इंजेक्शन द्वारा दी जाती है, और ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV), जो बूंदों के रूप में 0 से 5 वर्ष के बच्चों को पिलाई जाती है।
क्या भारत के पोलियो-मुक्त होने के बाद भी टीकाकरण ज़रूरी है?
हाँ, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पोलियो-मुक्त होने के बावजूद टीकाकरण अनिवार्य है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर पोलियो वायरस अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पड़ोसी देशों से पुनः संक्रमण के खतरे को देखते हुए 'दो बूंद जिंदगी की' अभियान आज भी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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