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सेंगोल शिल्पकार वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन, PM मोदी ने एक्स पर जताया गहरा दुख

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सेंगोल शिल्पकार वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन, PM मोदी ने एक्स पर जताया गहरा दुख

सारांश

1947 में मात्र 20 वर्ष की आयु में ऐतिहासिक सेंगोल को आकार देने वाले तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु अब नहीं रहे। PM मोदी ने एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका शिल्प भारत की गौरवशाली परंपराओं और राष्ट्रीय यात्रा के बीच अद्वितीय सेतु था। एक पीढ़ी का अध्याय बंद हुआ।

मुख्य बातें

तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन हो गया, जिन्होंने 1947 में महज 20 वर्ष की आयु में ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर गहरा दुख जताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी राजभवन की ओर से शोक संदेश जारी किया।
सेंगोल को 2023 में नए संसद भवन में स्थापित किया गया था, जहाँ PM मोदी ने एथिराजुलु से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया था।
सेंगोल भारत की सभ्यतागत विरासत, धर्मपूर्ण शासन और सत्ता-हस्तांतरण का कालातीत प्रतीक माना जाता है।

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026 — भारत की स्वतंत्रता के ऐतिहासिक क्षण में पवित्र सेंगोल के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन हो गया है। उनके जाने से देश ने एक ऐसे शिल्पकार को खो दिया, जिन्होंने 1947 में मात्र 20 वर्ष की आयु में उस राजदंड को आकार दिया था, जो भारत की सभ्यतागत विरासत और सत्ता-हस्तांतरण का प्रतीक बना। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।

PM मोदी की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु के निधन से गहरा दुख हुआ। तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित परिवार से आने वाले एथिराजुलु को उनके द्वारा पूर्व पीएम नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल के लिए याद किया जाएगा।' मोदी ने आगे लिखा कि 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल को उचित गौरव का स्थान देते समय उन्हें स्वयं एथिराजुलु से मिलने और राष्ट्र व संस्कृति के प्रति उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर मिला था।

प्रधानमंत्री ने लिखा, 'उनका जीवन और शिल्प कौशल भारत की गौरवशाली परंपराओं और हमारी राष्ट्रीय यात्रा के बीच एक उल्लेखनीय संबंध का प्रतिनिधित्व करता है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना। ओम शांति।'

राज्यपाल आर्लेकर का शोक संदेश

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने तमिलनाडु राजभवन (लोकभवन) की ओर से जारी शोक संदेश में कहा, 'तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु, जिन्होंने 1947 में 20 साल की छोटी उम्र में पवित्र सेंगोल के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, का निधन हो गया है।' उन्होंने कहा कि सेंगोल भारत की सभ्यतागत विरासत, धर्मपूर्ण शासन और स्वतंत्रता की दहलीज पर सत्ता-हस्तांतरण का कालातीत प्रतीक है।

राज्यपाल ने आगे कहा, 'उनका जीवन और शिल्प कौशल हमारे राष्ट्र के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का हिस्सा बन गया है।' उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शाश्वत शांति की प्रार्थना की।

सेंगोल का ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि सेंगोल तमिल परंपरा में न्यायपूर्ण शासन का प्रतीक माना जाता है। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के अवसर पर यह राजदंड तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था। दशकों तक अनदेखा रहने के बाद, 2023 में केंद्र सरकार ने इसे नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के निकट स्थापित कर उसे राष्ट्रीय गरिमा का केंद्र बनाया। यह ऐसे समय में और भी अर्थपूर्ण हो गया था, जब भारत अपनी सभ्यतागत पहचान को संस्थागत प्रतीकों के माध्यम से पुनर्स्थापित करने की कोशिश में था।

शिल्प विरासत का अध्याय बंद

वुम्मिदी एथिराजुलु तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित आभूषण-शिल्पकार परिवार से संबंध रखते थे। उनका योगदान केवल एक कलाकृति के निर्माण तक सीमित नहीं था — वे उस ऐतिहासिक संधि-बिंदु के जीवित साक्षी थे, जब भारत औपनिवेशिक शासन से मुक्त होकर अपनी स्वतंत्र यात्रा पर निकला था। उनके निधन के साथ, एक ऐसी पीढ़ी का एक और अध्याय बंद हो गया जिसने भारत के पुनर्जन्म को अपनी आँखों से देखा और हाथों से रचा था।

उनके शिल्प की विरासत अब नई दिल्ली के संसद भवन में स्थापित सेंगोल के रूप में देश की स्मृति में अंकित है — एक ऐसा स्मारक जो समय से परे जाकर शिल्पकार और राष्ट्र को एकसूत्र में बाँधता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने भारत के जन्म को सजीव देखा और उसे कला में ढाला। सेंगोल को 2023 में संसद में स्थापित करना एक सांस्कृतिक-राजनीतिक पुनराविष्कार था, और एथिराजुलु उसके जीवित प्रमाण थे — जिनकी उपस्थिति ने उस पुनर्स्थापना को ऐतिहासिक वैधता दी। अब जब वे नहीं रहे, यह प्रश्न और गहरा हो जाता है कि भारत अपनी शिल्प-विरासत को अगली पीढ़ी तक किस माध्यम से हस्तांतरित कर रहा है — संस्थागत रूप से या केवल प्रतीकात्मक रूप से।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वुम्मिदी एथिराजुलु कौन थे?
वुम्मिदी एथिराजुलु तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित आभूषण-शिल्पकार परिवार से थे, जिन्होंने 1947 में मात्र 20 वर्ष की आयु में भारत की स्वतंत्रता के अवसर पर ऐतिहासिक सेंगोल बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। यह सेंगोल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था।
सेंगोल क्या है और इसका क्या महत्व है?
सेंगोल तमिल परंपरा में न्यायपूर्ण और धर्मपूर्ण शासन का प्रतीक राजदंड है। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय यह सत्ता-हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में भेंट किया गया था, और 2023 में इसे नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के निकट स्थापित किया गया।
PM मोदी ने एथिराजुलु के निधन पर क्या कहा?
PM मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि एथिराजुलु का जीवन और शिल्प कौशल भारत की गौरवशाली परंपराओं और राष्ट्रीय यात्रा के बीच एक उल्लेखनीय संबंध का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि 2023 में संसद भवन में सेंगोल स्थापना के समय उन्हें एथिराजुलु से मिलकर आभार व्यक्त करने का सम्मान मिला था।
सेंगोल को नए संसद भवन में कब स्थापित किया गया?
सेंगोल को 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के निकट स्थापित किया गया था। इस अवसर पर PM मोदी ने स्वयं तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु से मुलाकात कर उनके योगदान के लिए आभार जताया था।
तमिलनाडु के राज्यपाल ने एथिराजुलु को किस रूप में याद किया?
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि एथिराजुलु का जीवन और शिल्प कौशल भारत के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंग बन गया है। उन्होंने सेंगोल को भारत की सभ्यतागत विरासत और स्वतंत्रता की दहलीज पर सत्ता-हस्तांतरण का कालातीत प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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