वर्धा: आरोपी ने PHC में महिला डॉक्टर को जड़ा थप्पड़, CCTV में कैद; डॉक्टरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के वर्धा जिले के तलेगांव (शामजी) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में 23 अक्टूबर 2026 को एक गंभीर घटना सामने आई, जब एक आरोपी ने ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर को थप्पड़ मार दिया। पूरी घटना PHC में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई और फुटेज तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र में डॉक्टरों की कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
घटनाक्रम: कैसे हुई वारदात
आरोपी कादिर अली रज्जाक को पाँच पुलिसकर्मियों की निगरानी में न्यायालय में पेश करने से पूर्व अनिवार्य मेडिकल जाँच के लिए तलेगांव PHC लाया गया था। जाँच के दौरान अचानक गुस्से में आए आरोपी ने ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत आरोपी को काबू में लिया।
यह पूरा घटनाक्रम PHC परिसर में स्थापित CCTV कैमरे में दर्ज हो गया। वीडियो फुटेज के सामने आने के बाद चिकित्सा समुदाय और आम नागरिकों में व्यापक आक्रोश देखा जा रहा है।
कानूनी कार्रवाई
घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने आरोपी कादिर अली रज्जाक के विरुद्ध पृथक मामला दर्ज किया है। उस पर सरकारी कर्मचारी पर हमला और सरकारी कर्तव्य में बाधा डालने संबंधी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला पूर्व में दर्ज उसके अपराध के अतिरिक्त है।
डॉक्टरों और मेडिकल एसोसिएशन में आक्रोश
वर्धा जिले के डॉक्टरों और मेडिकल एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। चिकित्सकों ने आरोपी के विरुद्ध सख्त-से-सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए सभी PHC और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल मज़बूत करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जब एक आरोपी पाँच सशस्त्र पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में डॉक्टर पर हाथ उठाने से नहीं डरता, तो एकाकी ड्यूटी पर काम करने वाले चिकित्सकों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
पृष्ठभूमि: महाराष्ट्र में बढ़ते हमलों का सिलसिला
गौरतलब है कि यह घटना अकेली नहीं है। बीते महीने दही हांडी उत्सव के दौरान मानव पिरामिड में घायल हुए लोगों को पालघर के एक अस्पताल लाया गया था, जहाँ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया था। उस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरत को पार्टी से निलंबित कर निष्कासित करने की घोषणा की थी।
शिंदे ने उस घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा था, 'यदि किसी मरीज के इलाज को लेकर कोई शिकायत थी तो कानूनी रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। कानून को अपने हाथ में लेना गलत है और शिवसेना ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करेगी।' उन्होंने स्पष्ट किया था कि डॉक्टरों या अस्पताल कर्मचारियों के साथ मारपीट किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
आगे क्या होगा
वर्धा घटना के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ा है कि वह PHC और ज़िला अस्पतालों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करे। चिकित्सा संगठनों ने माँग की है कि 'महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशन्स (हिंसा और संपत्ति क्षति का निवारण) अधिनियम' के तहत त्वरित न्यायिक सुनवाई की व्यवस्था की जाए, ताकि ऐसी घटनाएँ भविष्य में रोकी जा सकें।