वाशिम में डीजल टैंकर पलटा, 45 मिनट के रेस्क्यू ऑपरेशन में ड्राइवर सुरक्षित बचाया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के वाशिम जिले में 24 मई को एक बड़ा हादसा टल गया, जब कारंजा-मूर्तिजापुर मार्ग पर तक्षशिला महाविद्यालय के निकट डीजल से भरा एक टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। ड्राइवर केबिन में फंस गया और टैंकर से लगातार डीजल रिसाव के चलते विस्फोट का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। ग्रामीण पुलिस की त्वरित कार्रवाई और 45 मिनट के सघन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चालक को सुरक्षित निकाल लिया गया।
हादसे का घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार यह टैंकर वर्धा जिले की ओर डीजल की आपूर्ति करने जा रहा था। तक्षशिला महाविद्यालय के पास ड्राइवर का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ा और टैंकर सड़क पर पलट गया। टैंकर के पलटते ही चालक केबिन के नीचे दब गया। साथ ही टैंकर से डीजल का रिसाव शुरू हो गया, जिससे मौके पर आग या विस्फोट की आशंका बन गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही वाशिम ग्रामीण पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। क्रेन की सहायता से लगभग 45 मिनट की मशक्कत के बाद फंसे हुए चालक को केबिन से बाहर निकाला गया। उसे तत्काल नज़दीकी अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने टैंकर से हो रहे डीजल रिसाव को भी नियंत्रित कर लिया और टैंकर को मार्ग से हटाकर यातायात बहाल कर दिया।
आधिकारिक स्थिति
पुलिस के अनुसार फिलहाल ड्राइवर और टैंकर मालिक की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों ने बताया कि टैंकर मालिक से संपर्क किया जा रहा है। पुलिस ने पुष्टि की है कि डीजल रिसाव पूरी तरह रोक दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।
पृष्ठभूमि: टैंकर हादसों का बढ़ता सिलसिला
यह ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में टैंकर दुर्घटनाओं की घटनाएँ सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि 1 मई को बिहार के मोतिहारी में सुगौली क्षेत्र के छपवा-रक्सौल मुख्य मार्ग पर सोयाबीन तेल से भरा एक टैंकर बंगरा गाँव के पास खेत में पलट गया था। उस घटना में स्थानीय लोगों की भीड़ बाल्टी और बर्तन लेकर तेल भरने पहुँच गई थी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी। वायरल वीडियो में ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की दिखी थी और पुलिस को भीड़ नियंत्रित करनी पड़ी थी।
आगे की स्थिति
वाशिम पुलिस मामले की जाँच कर रही है। टैंकर पलटने के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर भारी वाहनों की नियमित जाँच और चालकों की थकान प्रबंधन नीति को और सख्त करने की ज़रूरत है, ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।