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पश्चिम बंगाल: 325 'लोकतंत्र सेनानियों' को ₹10,000 मासिक भत्ता, मुफ्त बस व अस्पताल सुविधा का ऐलान

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पश्चिम बंगाल: 325 'लोकतंत्र सेनानियों' को ₹10,000 मासिक भत्ता, मुफ्त बस व अस्पताल सुविधा का ऐलान

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार ने 1975-77 के आपातकाल में जेल गए 325 'लोकतंत्र सेनानियों' को ₹10,000 मासिक भत्ता, मुफ्त बस यात्रा और सरकारी अस्पताल में इलाज देने का ऐलान किया। साथ ही 13 अगस्त को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उनकी विचारधारा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए विशेष समिति बनाने की घोषणा हुई।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने 9 अगस्त 2026 को 325 लोकतंत्र सेनानियों को ₹10,000 मासिक भत्ता , मुफ्त सरकारी बस यात्रा और निःशुल्क सरकारी अस्पताल इलाज देने की घोषणा की।
सम्मानित सेनानियों को तांबे का मेडल प्रदान किया गया; यदि सेनानी जीवित नहीं हैं तो उनके जीवनसाथी को सुविधाएँ मिलेंगी।
ये सुविधाएँ 1975-1977 की आंतरिक आपातकाल अवधि में मीसा या डीआईआर के तहत कैद हुए लोगों के लिए हैं।
आपातकाल में पूरे देश में एक लाख और अकेले बंगाल में कम से कम 5,000 लोग जेल गए थे।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित होगी, जो उनकी विचारधारा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करेगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने 9 अगस्त 2026 को राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित एक विशेष समारोह में 325 'लोकतंत्र सेनानियों' को सम्मानित करते हुए उनके लिए ₹10,000 मासिक भत्ता, सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की घोषणा की। यह सुविधाएँ उन लोगों को दी जाएंगी जिन्हें 1975-1977 की आंतरिक आपातकाल अवधि में मीसा या डीआईआर जैसे कानूनों के तहत कारावास भुगतना पड़ा था।

समारोह और सम्मान

नबन्ना में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तापस रॉय भी उपस्थित थे। सम्मानित किए गए प्रत्येक लोकतंत्र सेनानी को तांबे का मेडल प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सम्मानित व्यक्ति अब जीवित नहीं हैं, तो उनकी पत्नी या पति को ये सभी सुविधाएँ प्राप्त होंगी।

'लोकतंत्र सेनानी' कौन हैं

'लोकतंत्र सेनानी' उन व्यक्तियों को कहा जाता है जिन्हें 1975 और 1977 के बीच लागू आंतरिक आपातकाल के दौरान मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) अथवा डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स (डीआईआर) के अंतर्गत जेल में रखा गया था। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्मरण कराया कि उस कठिन दौर में पूरे देश में एक लाख से अधिक लोगों को कारावास में डाला गया था, जिनमें से अकेले बंगाल में कम से कम 5,000 लोग जेल गए थे।

आपातकाल की विरासत और लोकतंत्र की रक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस अंधकारमय दौर में जेल की सलाखों के पीछे जीवन बिताने वाले इन सेनानियों के त्याग और संघर्ष की बदौलत ही आज देश में लोकतंत्र, संसदीय व्यवस्था और मतदान के अधिकार को दबाने की कोशिशों के बावजूद ये मूल्य सुरक्षित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ के आसपास देशभर में इस ऐतिहासिक घटना पर चर्चा फिर से तेज हुई है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति समिति का गठन

कार्यक्रम में एक अधिकारी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को भी याद किया और आरोप लगाया कि पहले राष्ट्रवाद, देशभक्ति और पारंपरिक संस्कृति को मिटाने की कोशिशें की गई थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को उनके योगदान से अवगत कराना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर 13 अगस्त को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समिति के माध्यम से श्यामा प्रसाद की विचारधारा और बंगाल के विभाजन का सही इतिहास स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार की इस घोषणा के बाद भत्ते और सुविधाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। 13 अगस्त को प्रस्तावित समिति के गठन के बाद पाठ्यक्रम संशोधन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है। यह कदम राज्य में ऐतिहासिक पुनर्मूल्यांकन की एक नई बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस सम्मान को दलगत राजनीति से परे ले जाता है। वहीं, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा पाठ्यपुस्तक राजनीति की उस बहस को फिर से हवा देती है जो देशभर में जारी है। असली परीक्षा यह होगी कि ₹10,000 का भत्ता और ये सुविधाएँ कितनी जल्दी और पारदर्शी तरीके से पात्र सेनानियों या उनके जीवनसाथियों तक पहुँचती हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में 'लोकतंत्र सेनानी' कौन हैं?
'लोकतंत्र सेनानी' वे लोग हैं जिन्हें 1975 और 1977 के बीच लागू आंतरिक आपातकाल के दौरान मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) या डीआईआर (डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स) जैसे कानूनों के तहत जेल में रखा गया था। पश्चिम बंगाल में ऐसे कम से कम 5,000 लोग कारावास में रहे थे।
लोकतंत्र सेनानियों को क्या-क्या सुविधाएँ मिलेंगी?
राज्य सरकार ने ₹10,000 मासिक भत्ता, सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की घोषणा की है। यदि सेनानी अब जीवित नहीं हैं, तो ये सभी सुविधाएँ उनके जीवनसाथी को दी जाएंगी।
9 अगस्त के समारोह में कितने लोगों को सम्मानित किया गया?
नबन्ना में आयोजित समारोह में कुल 325 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। प्रत्येक सेनानी को तांबे का मेडल प्रदान किया गया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर क्या होगा?
13 अगस्त को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की जाएगी। इस समिति का उद्देश्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा और बंगाल के विभाजन के सही इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना है।
1975 की आंतरिक आपातकाल में कितने लोग जेल गए थे?
मुख्यमंत्री के अनुसार 1975-1977 की आपातकाल अवधि में पूरे देश में एक लाख लोगों को जेल में डाला गया था। अकेले पश्चिम बंगाल में कम से कम 5,000 लोगों को कारावास भुगतना पड़ा था।
राष्ट्र प्रेस
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