श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: बंगाल के स्कूल सिलेबस में जुड़ेगा उनके जीवन पर अध्याय, CM सुवेंदु का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 7 जुलाई 2026 को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर घोषणा की कि राज्य के स्कूल पाठ्यक्रम में मुखर्जी के जीवन और योगदान पर एक समर्पित अध्याय शामिल किया जाएगा। यह घोषणा कोलकाता के मित्रा इंस्टीट्यूशन में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित करते हुए की गई।
मुख्यमंत्री की घोषणा और प्रस्ताव
मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस संबंध में राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और विभागीय सचिवों से अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, "स्कूल के सिलेबस में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का जिक्र जरूर होना चाहिए। मैं यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में बनने वाली सिलेबस कमेटी के सामने रखूंगा, जो आखिरकार यह तय करेगी कि स्कूल के सिलेबस में क्या शामिल किया जाए और क्या नहीं।" गौरतलब है कि अंतिम निर्णय प्रस्तावित सिलेबस समिति पर निर्भर करेगा।
नबन्ना में पहली बार जयंती का आयोजन
इस वर्ष एक ऐतिहासिक पहल के तहत सोमवार को पहली बार राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती मनाई गई। सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद राज्य सरकार के कर्मचारियों का एक समूह सचिवालय पहुँचा और भारतीय जनसंघ के संस्थापक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
125 फुट ऊँची प्रतिमा की आधारशिला
जयंती समारोह की एक प्रमुख पहल के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके न्यू टाउन स्थित इको पार्क में डॉ. मुखर्जी की 125 फुट ऊँची प्रतिमा की आधारशिला रखी और एक पट्टिका का अनावरण किया। शाह नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद सीधे इको पार्क पहुँचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री अधिकारी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद सामिक भट्टाचार्य भी उपस्थित रहे।
राजनीतिक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP सरकार राज्य की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को पुनर्परिभाषित करने के प्रयास में है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जो बंगाल से ही थे, को BJP और उसके वैचारिक पूर्वज जनसंघ के प्रणेता के रूप में देखा जाता है। पाठ्यक्रम में उनके जीवन को शामिल करने का प्रस्ताव राज्य की शिक्षा नीति में एक नई दिशा का संकेत देता है। आगामी सिलेबस समिति के गठन और उसके निर्णय पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।