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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर त्रिपुरा सीएम माणिक साहा का आह्वान — जनसेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि

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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर त्रिपुरा सीएम माणिक साहा का आह्वान — जनसेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि

सारांश

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर अगरतला में आयोजित भाजपा कार्यक्रम में त्रिपुरा सीएम माणिक साहा ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया — राष्ट्र पहले, पार्टी बाद में। एकात्म मानववाद से विकसित भारत 2047 तक, साहा ने वैचारिक निरंतरता को भाजपा की असली ताकत बताया।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 23 जून 2026 को अगरतला में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
साहा ने कहा — "सबसे पहले राष्ट्र, फिर पार्टी और उसके बाद व्यक्ति" — मुखर्जी की यही सीख है।
मुखर्जी मात्र 33 वर्ष की आयु में यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता के सबसे युवा कुलपति बने थे।
साहा ने एकात्म मानववाद और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को त्रिपुरा सरकार की कार्यनीति से जोड़ा।
कार्यक्रम में सांसद संबित पात्रा , प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक देबरॉय सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 23 जून 2026 को अगरतला स्थित भाजपा के राज्य कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं का आह्वान किया कि वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन-आदर्शों को आत्मसात करते हुए जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। यह कार्यक्रम भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रख्यात शिक्षाविद मुखर्जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री का संदेश — आदर्श से प्रेरणा, जन से जुड़ाव

मुख्यमंत्री साहा ने कहा, "हमें उनके सिद्धांतों और विचारधारा का अनुसरण करते हुए लोगों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए।" उन्होंने मुखर्जी को एक ऐसा असाधारण व्यक्तित्व बताया, जिन्होंने प्रतिष्ठित पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद सदैव आम जनता के हितों को प्राथमिकता दी और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

साहा ने रेखांकित किया कि मुखर्जी ने हमें यह सिखाया कि "सबसे पहले राष्ट्र, फिर पार्टी और उसके बाद व्यक्ति आता है।" यह संदेश आज के राजनीतिक परिवेश में भी उतना ही प्रासंगिक है।

मुखर्जी की विरासत — शिक्षा से राष्ट्रनिर्माण तक

मुख्यमंत्री ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी मात्र 33 वर्ष की आयु में यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता के कुलपति बने थे और यह पद संभालने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे। उनका यह कीर्तिमान उनकी असाधारण प्रतिभा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रमाण है।

गौरतलब है कि मुखर्जी ने न केवल शिक्षा जगत में, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ी। भारतीय जनसंघ की स्थापना उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम था, जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में विकसित हुई।

एकात्म मानववाद और विकसित भारत का लक्ष्य

साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और त्रिपुरा सरकार, पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद के दर्शन का अनुसरण करते हुए समग्र विकास और जनकल्याण के लिए कार्यरत हैं। उन्होंने जोर दिया कि त्रिपुरा भी विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा अपनी संगठनात्मक उपस्थिति को और सुदृढ़ करने में जुटी है। साहा ने कहा कि मुखर्जी, उपाध्याय और मोदी की विचारधारा से प्रेरित होकर ही आज भाजपा देश के लगभग 21 राज्यों में सरकार चला रही है।

भाजपा परिवार और वैचारिक आधार

मुख्यमंत्री ने कहा, "भाजपा एक परिवार है और यदि हम इस परिवार को प्रेरित करने वाले महापुरुषों के आदर्शों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेंगे तो एक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल बनेगा।" उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों को जनता तक पहुँचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक देबरॉय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद राजीब भट्टाचार्जी, भाजपा के पूर्वोत्तर समन्वयक एवं सांसद संबित पात्रा, असम-त्रिपुरा संगठन महासचिव रविंद्र राजू, त्रिपुरा भाजपा प्रभारी राजदीप रॉय, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और पार्टी के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

आगे की राह

इस कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि भाजपा अपने वैचारिक पुरखों की विरासत को राजनीतिक प्रेरणा के रूप में जीवित रखने के साथ-साथ जमीनी जनकल्याण को अपनी कार्यनीति का केंद्र बनाए रखना चाहती है। त्रिपुरा में आने वाले समय में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और जनसंपर्क अभियान की दिशा इसी वैचारिक धुरी पर टिकी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब पूर्वोत्तर में संगठनात्मक एकजुटता की जरूरत पहले से कहीं अधिक है। 'राष्ट्र प्रथम' का नारा प्रेरक है, लेकिन असली कसौटी यह है कि त्रिपुरा में विकसित भारत 2047 के वादे जमीन पर कितने दिखते हैं। एकात्म मानववाद की बात करना और उसे नीतिगत परिणामों में बदलना — इन दोनों के बीच की खाई को भरना ही साहा सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर त्रिपुरा में क्या कार्यक्रम हुआ?
23 जून 2026 को अगरतला स्थित भाजपा राज्य कार्यालय में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, सांसद संबित पात्रा सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
माणिक साहा ने भाजपा कार्यकर्ताओं से क्या अपील की?
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सिद्धांतों और विचारधारा का अनुसरण करते हुए जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि 'सबसे पहले राष्ट्र, फिर पार्टी और उसके बाद व्यक्ति' — यही मुखर्जी की सबसे बड़ी सीख है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे और उनका योगदान क्या है?
श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक प्रख्यात शिक्षाविद, विचारक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। वे मात्र 33 वर्ष की आयु में यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता के सबसे युवा कुलपति बने और उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित किया।
एकात्म मानववाद से त्रिपुरा सरकार का क्या संबंध है?
माणिक साहा ने कहा कि त्रिपुरा सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद के दर्शन का अनुसरण करते हुए समग्र विकास और जनकल्याण के लिए काम कर रही है। यह दर्शन व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समन्वित विकास पर बल देता है।
त्रिपुरा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में कैसे योगदान दे रहा है?
मुख्यमंत्री साहा के अनुसार, त्रिपुरा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में निरंतर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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