डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: PM मोदी बोले — 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के लिए जीवन न्योछावर किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जुलाई 2026 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में कहा कि पश्चिम बंगाल की धरती आज अपने एक महान सपूत और भारत की अखंडता के लिए समर्पित युगदृष्टा को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रही है। उन्होंने डॉ. मुखर्जी को 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विचार का जीवंत प्रतीक बताया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन एक विचार से जन-आंदोलन तक की परिणति का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा, 'जहाँ जमीन से जुड़ी वैचारिक शक्ति हो, इरादे मजबूत हों, नियत साफ हो और नए संकल्प के साथ संपूर्ण समर्पण हो — तो संकल्प की सिद्धि होती ही होती है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसा ही जीवन जीकर दिखाया।'
मोदी ने यह भी कहा कि कभी जो भारतीय जनसंघ था, वही आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली पीढ़ियाँ BJP की यात्रा का इतिहास लिखते समय डॉ. मुखर्जी के विचारों, साहस और दूरदृष्टि का अवश्य उल्लेख करेंगी।
दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव
प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती को दो वर्षों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है। यह उत्सव 6 जुलाई 2025 को आरंभ हुआ था और 6 जुलाई 2026 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद इस राष्ट्रीय सम्मान में बंगाल ने अपनी रौनक और बढ़ा दी है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व 20 जून को पश्चिम बंग दिवस का भव्य आयोजन किया गया था, जिसे मोदी ने 'बंगाल की धरती और विरासत को प्रणाम' बताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार को इस भव्य कार्यक्रम के लिए बधाई दी।
अखंडता की लड़ाई और ऐतिहासिक संदर्भ
प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के उस ऐतिहासिक संघर्ष का स्मरण कराया जब 1947 में देश विभाजन के बाद बंगाल क्षेत्र को देश से अलग करने की साजिशें रची जा रही थीं। उन्होंने कहा कि उस नाजुक समय में डॉ. मुखर्जी इन साजिशों के विरुद्ध मजबूती से खड़े रहे, जनसमर्थन जुटाया और यह सुनिश्चित किया कि बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना रहे।
मोदी ने डॉ. मुखर्जी के प्रसिद्ध कथन को उद्धृत किया: 'कांग्रेस पार्टी ने देश का विभाजन किया, और मैंने पाकिस्तान का विभाजन किया।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब देश में 'दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' की बात उठी, तब डॉ. मुखर्जी ने इसका जमकर विरोध किया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 125वीं जन्म जयंती को दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव का दर्जा देना और पश्चिम बंगाल में इसे बड़े पैमाने पर मनाना — यह BJP की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें डॉ. मुखर्जी को बंगाल की पहचान से जोड़कर राजनीतिक आख्यान गढ़ा जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में BJP की सरकार है और पार्टी अपनी वैचारिक जड़ों को सुदृढ़ करने में जुटी है।
आगे क्या
दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव 6 जुलाई 2026 को समापन की ओर है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर डॉ. मुखर्जी के विचारों पर आधारित कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और शैक्षणिक आयोजनों की शृंखला जारी रखेंगी। आने वाले समय में उनके जीवन और दर्शन पर केंद्रित और कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।