6 जुलाई 2026
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: PM मोदी बोले — 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के लिए जीवन न्योछावर किया

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: PM मोदी बोले — 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के लिए जीवन न्योछावर किया

सारांश

PM मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का प्रतीक बताया। 1947 के विभाजन में बंगाल को भारत से अलग होने से बचाने वाले इस युगदृष्टा की विरासत को केंद्र सरकार दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 6 जुलाई 2026 को डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
केंद्र सरकार इस जयंती को दो वर्षों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है — 6 जुलाई 2025 से 6 जुलाई 2026 तक।
मोदी ने कहा कि भारतीय जनसंघ से जन्मी BJP आज विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति है।
1947 के विभाजन के बाद बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में डॉ.
मुखर्जी की निर्णायक भूमिका को याद किया गया।
20 जून को पश्चिम बंग दिवस का भव्य आयोजन भी इसी उत्सव शृंखला का हिस्सा रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जुलाई 2026 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में कहा कि पश्चिम बंगाल की धरती आज अपने एक महान सपूत और भारत की अखंडता के लिए समर्पित युगदृष्टा को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रही है। उन्होंने डॉ. मुखर्जी को 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विचार का जीवंत प्रतीक बताया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन एक विचार से जन-आंदोलन तक की परिणति का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा, 'जहाँ जमीन से जुड़ी वैचारिक शक्ति हो, इरादे मजबूत हों, नियत साफ हो और नए संकल्प के साथ संपूर्ण समर्पण हो — तो संकल्प की सिद्धि होती ही होती है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसा ही जीवन जीकर दिखाया।'

मोदी ने यह भी कहा कि कभी जो भारतीय जनसंघ था, वही आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली पीढ़ियाँ BJP की यात्रा का इतिहास लिखते समय डॉ. मुखर्जी के विचारों, साहस और दूरदृष्टि का अवश्य उल्लेख करेंगी।

दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव

प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती को दो वर्षों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है। यह उत्सव 6 जुलाई 2025 को आरंभ हुआ था और 6 जुलाई 2026 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद इस राष्ट्रीय सम्मान में बंगाल ने अपनी रौनक और बढ़ा दी है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व 20 जून को पश्चिम बंग दिवस का भव्य आयोजन किया गया था, जिसे मोदी ने 'बंगाल की धरती और विरासत को प्रणाम' बताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार को इस भव्य कार्यक्रम के लिए बधाई दी।

अखंडता की लड़ाई और ऐतिहासिक संदर्भ

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के उस ऐतिहासिक संघर्ष का स्मरण कराया जब 1947 में देश विभाजन के बाद बंगाल क्षेत्र को देश से अलग करने की साजिशें रची जा रही थीं। उन्होंने कहा कि उस नाजुक समय में डॉ. मुखर्जी इन साजिशों के विरुद्ध मजबूती से खड़े रहे, जनसमर्थन जुटाया और यह सुनिश्चित किया कि बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना रहे।

मोदी ने डॉ. मुखर्जी के प्रसिद्ध कथन को उद्धृत किया: 'कांग्रेस पार्टी ने देश का विभाजन किया, और मैंने पाकिस्तान का विभाजन किया।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब देश में 'दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' की बात उठी, तब डॉ. मुखर्जी ने इसका जमकर विरोध किया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 125वीं जन्म जयंती को दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव का दर्जा देना और पश्चिम बंगाल में इसे बड़े पैमाने पर मनाना — यह BJP की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें डॉ. मुखर्जी को बंगाल की पहचान से जोड़कर राजनीतिक आख्यान गढ़ा जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में BJP की सरकार है और पार्टी अपनी वैचारिक जड़ों को सुदृढ़ करने में जुटी है।

आगे क्या

दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव 6 जुलाई 2026 को समापन की ओर है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर डॉ. मुखर्जी के विचारों पर आधारित कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और शैक्षणिक आयोजनों की शृंखला जारी रखेंगी। आने वाले समय में उनके जीवन और दर्शन पर केंद्रित और कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक पुनर्निर्माण भी है। बंगाल में BJP सरकार के बाद डॉ. मुखर्जी को बंगाली अस्मिता के साथ जोड़ने की कोशिश स्पष्ट है। हालाँकि, उनके 'दो विधान, दो निशान' विरोध की विरासत पर जोर देना — जो अनुच्छेद 370 हटाने से जुड़ा आख्यान है — यह बताता है कि वैचारिक इतिहास को समसामयिक राजनीति से जोड़ा जा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस तथ्य को नजरअंदाज करती है कि डॉ. मुखर्जी की असली विरासत उनके बहुलवादी शैक्षणिक योगदान में भी उतनी ही है — जिसका उल्लेख इन आयोजनों में प्रायः कम होता है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे और उनका महत्व क्यों है?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के著名 राष्ट्रवादी नेता, शिक्षाविद् और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) बनी। 1947 के विभाजन के दौरान उन्होंने बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाई और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विचार के प्रबल पक्षधर रहे।
125वीं जन्म जयंती का राष्ट्रीय उत्सव कब से कब तक चलेगा?
केंद्र सरकार यह उत्सव दो वर्षों तक मना रही है — 6 जुलाई 2025 से 6 जुलाई 2026 तक। PM मोदी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में BJP सरकार बनने के बाद इस उत्सव को और भव्यता मिली है।
डॉ. मुखर्जी ने 'दो विधान, दो प्रधान, दो निशान' का विरोध क्यों किया था?
डॉ. मुखर्जी भारत की एकता और अखंडता के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि एक ही देश में दो संविधान, दो प्रधान और दो राष्ट्रीय चिह्न राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध हैं। यह विरोध मुख्यतः जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे के संदर्भ में था।
PM मोदी ने भारतीय जनसंघ और BJP के संबंध में क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि कभी जो भारतीय जनसंघ था, वही आज BJP के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली पीढ़ियाँ BJP की यात्रा लिखते समय डॉ. मुखर्जी के विचारों और दूरदृष्टि का अवश्य उल्लेख करेंगी।
पश्चिम बंग दिवस का आयोजन इस उत्सव से कैसे जुड़ा है?
20 जून को पश्चिम बंग दिवस का भव्य आयोजन किया गया, जिसे PM मोदी ने बंगाल की धरती और विरासत को प्रणाम बताया। यह आयोजन डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के दो वर्षीय राष्ट्रीय उत्सव की शृंखला का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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