डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: नड्डा बोले — विचार के लिए पद त्यागना उनकी सबसे बड़ी विरासत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 6 जुलाई 2026 को हरियाणा के अंबाला में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुखर्जी ने जीवनभर पद को नहीं, विचार को प्राथमिकता दी। नड्डा ने अंबाला की भूमि को गीता, स्वतंत्रता संग्राम और खेल की भूमि बताते हुए इसे नमन किया।
विचारधारा की नींव और भाजपा का उदय
नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, जिसकी वैचारिक जड़ों से आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) आज देश की 78 प्रतिशत जनसंख्या और लगभग 72 प्रतिशत भू-भाग पर शासन कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के बँटवारे की कहानी
नड्डा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि विभाजन के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री हुसैन सुहरावर्दी की योजना थी कि पूरा बंगाल पाकिस्तान के साथ चला जाए। उनके अनुसार, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उस समय जन-आंदोलन खड़ा किया और कांग्रेस की स्वीकृति के बावजूद पश्चिम बंगाल को भारत में बनाए रखा। नड्डा ने कहा, 'आज जो पश्चिम बंगाल है, वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की देन है।'
आत्मनिर्भर भारत की नींव और कश्मीर का संकल्प
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जब 1947 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुखर्जी को कैबिनेट मंत्री बनाया, तो उन्होंने एक वर्ष के भीतर 1948 में औद्योगिक नीति प्रस्तुत की — जिसे नड्डा ने 'आत्मनिर्भर भारत की नींव' बताया। मुखर्जी ने 1950 में जम्मू-कश्मीर जाकर एक संविधान देने का संकल्प लिया और कहा कि 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।'
धारा 370 और मुखर्जी का बलिदान
नड्डा ने कहा कि 1953 में मुखर्जी के बलिदान के बाद चार पीढ़ियों तक यह नारा गूँजता रहा — 'जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है।' उनके अनुसार, 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर मुखर्जी के उस संकल्प को पूरा किया, और तब से जम्मू-कश्मीर में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान लागू है।
125वीं जयंती का प्रतीकात्मक महत्व
नड्डा ने कहा कि इस जयंती पर सबसे बड़ी भेंट यह है कि पश्चिम बंगाल में — जिसे मुखर्जी ने बचाया था — आज भाजपा की सरकार बन चुकी है। उन्होंने मुखर्जी को कुशल प्रशासक, शिक्षाविद, वाइस चांसलर, विधायक और मंत्री के रूप में याद करते हुए कहा कि उनका जीवन 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना का जीवंत उदाहरण था। यह कार्यक्रम भाजपा के वैचारिक पुनर्स्मरण का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना।