6 जुलाई 2026
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: नड्डा बोले — विचार के लिए पद त्यागना उनकी सबसे बड़ी विरासत

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: नड्डा बोले — विचार के लिए पद त्यागना उनकी सबसे बड़ी विरासत

सारांश

अंबाला में 125वीं जयंती पर जेपी नड्डा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को वह नींव बताया जिस पर आज की भाजपा खड़ी है — पश्चिम बंगाल को बचाने से लेकर धारा 370 हटाने तक, नड्डा ने मुखर्जी के संकल्प और मोदी के कार्यकाल को एक सूत्र में पिरोया।

मुख्य बातें

जेपी नड्डा ने 6 जुलाई 2026 को अंबाला में डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर संबोधन दिया।
नड्डा ने कहा कि मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा बन चुकी है।
भाजपा और NDA आज देश की 78% जनसंख्या और 72% भू-भाग पर शासन कर रहे हैं — नड्डा का दावा।
मुखर्जी ने 1948 में औद्योगिक नीति बनाकर आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी थी।
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर मोदी ने मुखर्जी के 1950 के संकल्प को पूरा किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 6 जुलाई 2026 को हरियाणा के अंबाला में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुखर्जी ने जीवनभर पद को नहीं, विचार को प्राथमिकता दी। नड्डा ने अंबाला की भूमि को गीता, स्वतंत्रता संग्राम और खेल की भूमि बताते हुए इसे नमन किया।

विचारधारा की नींव और भाजपा का उदय

नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, जिसकी वैचारिक जड़ों से आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) आज देश की 78 प्रतिशत जनसंख्या और लगभग 72 प्रतिशत भू-भाग पर शासन कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के बँटवारे की कहानी

नड्डा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि विभाजन के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री हुसैन सुहरावर्दी की योजना थी कि पूरा बंगाल पाकिस्तान के साथ चला जाए। उनके अनुसार, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उस समय जन-आंदोलन खड़ा किया और कांग्रेस की स्वीकृति के बावजूद पश्चिम बंगाल को भारत में बनाए रखा। नड्डा ने कहा, 'आज जो पश्चिम बंगाल है, वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की देन है।'

आत्मनिर्भर भारत की नींव और कश्मीर का संकल्प

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जब 1947 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुखर्जी को कैबिनेट मंत्री बनाया, तो उन्होंने एक वर्ष के भीतर 1948 में औद्योगिक नीति प्रस्तुत की — जिसे नड्डा ने 'आत्मनिर्भर भारत की नींव' बताया। मुखर्जी ने 1950 में जम्मू-कश्मीर जाकर एक संविधान देने का संकल्प लिया और कहा कि 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।'

धारा 370 और मुखर्जी का बलिदान

नड्डा ने कहा कि 1953 में मुखर्जी के बलिदान के बाद चार पीढ़ियों तक यह नारा गूँजता रहा — 'जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है।' उनके अनुसार, 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर मुखर्जी के उस संकल्प को पूरा किया, और तब से जम्मू-कश्मीर में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान लागू है।

125वीं जयंती का प्रतीकात्मक महत्व

नड्डा ने कहा कि इस जयंती पर सबसे बड़ी भेंट यह है कि पश्चिम बंगाल में — जिसे मुखर्जी ने बचाया था — आज भाजपा की सरकार बन चुकी है। उन्होंने मुखर्जी को कुशल प्रशासक, शिक्षाविद, वाइस चांसलर, विधायक और मंत्री के रूप में याद करते हुए कहा कि उनका जीवन 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना का जीवंत उदाहरण था। यह कार्यक्रम भाजपा के वैचारिक पुनर्स्मरण का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना।

संपादकीय दृष्टिकोण

नड्डा का एकतरफा वर्णन उस जटिलता को नजरअंदाज करता है। 125वीं जयंती का यह आयोजन भाजपा के लिए अपने संस्थापक नायक को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर है — लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या पार्टी मुखर्जी की नीति-केंद्रित विरासत को महज़ प्रतीकवाद से आगे ले जाती है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर क्या हुआ?
6 जुलाई 2026 को हरियाणा के अंबाला में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुखर्जी की 125वीं जयंती पर संबोधन दिया। उन्होंने मुखर्जी की वैचारिक विरासत, भारतीय जनसंघ की स्थापना और धारा 370 से जुड़े संकल्प को याद किया।
जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल के बारे में क्या कहा?
नड्डा ने कहा कि विभाजन के समय हुसैन सुहरावर्दी की योजना पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने की थी, लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन-आंदोलन ने इसे रोका। उनके अनुसार, आज का पश्चिम बंगाल मुखर्जी की देन है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी और धारा 370 का क्या संबंध है?
मुखर्जी ने 1950 में जम्मू-कश्मीर जाकर एक संविधान का संकल्प लिया था और 'एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे' का नारा दिया था। 1953 में उनके निधन के बाद यह संकल्प अधूरा रहा, जिसे नड्डा के अनुसार 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर पूरा किया गया।
भारतीय जनसंघ की स्थापना कब हुई थी?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी। नड्डा ने कहा कि इसी वैचारिक नींव पर आज भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है।
नड्डा ने मुखर्जी को आत्मनिर्भर भारत से क्यों जोड़ा?
नड्डा ने कहा कि मुखर्जी ने 1947 में नेहरू कैबिनेट में उद्योग मंत्री रहते हुए 1948 में औद्योगिक नीति बनाई, जिसे उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की नींव बताया। यह संदर्भ मोदी सरकार की मौजूदा आत्मनिर्भर भारत नीति को ऐतिहासिक निरंतरता देने के लिए दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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