श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: त्रिपुरा CM माणिक साहा ने युवाओं से माँगा राष्ट्रसेवा का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 5 जुलाई 2025 को अगरतला में आयोजित एक संगोष्ठी में नागरिकों — विशेषकर युवाओं — से भारत केसरी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात करने तथा राष्ट्र निर्माण एवं जनसेवा के लिए स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया। यह कार्यक्रम मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था।
मुख्यमंत्री का संबोधन
मुख्यमंत्री साहा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को एक महान देशभक्त, प्रख्यात शिक्षाविद, प्रतिष्ठित सांसद और दूरदर्शी राजनेता बताया। उन्होंने कहा कि मुखर्जी का जीवन और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।
साहा ने यह भी रेखांकित किया कि कई महान नेताओं ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, किंतु वर्षों तक जनसाधारण को उनके योगदान की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उनके अनुसार, यह ऐतिहासिक उपेक्षा अब दूर की जा रही है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी: एक असाधारण व्यक्तित्व
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने — इस प्रतिष्ठित पद को सँभालने वाले वे सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे। साहा ने कहा कि वे सर आशुतोष मुखर्जी के सुयोग्य पुत्र थे, जिन्होंने एक सुविधासंपन्न जीवन की बजाय राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना।
उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों महान विभूतियाँ आज भी पार्टी और समाज का मार्गदर्शन करती हैं। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रत्येक कार्यक्रम भारत माता, मुखर्जी और उपाध्याय को श्रद्धांजलि से आरंभ होता है।
युवाओं पर विशेष जोर
साहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवा-केंद्रित दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी 18 से 35-40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। उन्होंने 'परीक्षा पे चर्चा' जैसे कार्यक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि ये पहलें छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए शुरू की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के छात्र राज्य और राष्ट्र दोनों का भविष्य हैं, और प्रधानमंत्री उन्हें बड़े सपने देखने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करते हैं — क्योंकि सपने देखने वाले ही महान उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं।
सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का आह्वान
संगोष्ठी के समापन में साहा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध, जीवंत और अटूट है। उन्होंने इस विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित और सुदृढ़ करने हेतु हर संभव प्रयास किए जाने की अपील की। गौरतलब है कि त्रिपुरा जैसे सीमावर्ती राज्य में सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का यह संदेश विशेष महत्व रखता है।