बंगाल में ऐतिहासिक मतदान: NDA नेताओं ने कहा — जनता TMC से बदलाव चाहती है
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में करीब 95 प्रतिशत ऐतिहासिक मतदान दर्ज हुआ।
- भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने उच्च मतदान को ममता बनर्जी के खिलाफ जनता की बदलाव की इच्छा बताया।
- भाजपा विधायक योगेश सागर ने कहा कि फर्जी मतदाता हटाने के बाद भी रिकॉर्ड वोटिंग बदलाव का संकेत है।
- शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने मतदान को लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण बताया।
- आरएलडी नेता के.सी. त्यागी ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को चुनाव आयोग के नोटिस का जिक्र करते हुए संयम बरतने की सलाह दी।
- दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को 142 विधानसभा सीटों पर होगा।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में दर्ज हुए ऐतिहासिक मतदान प्रतिशत ने पूरे देश की राजनीतिक बिरादरी का ध्यान खींचा है। भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) समेत एनडीए के शीर्ष नेताओं ने इस उच्च मतदान को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के खिलाफ जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान पर टिकी है।
सुवेंदु अधिकारी का ममता पर सीधा हमला
कोलकाता में राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भवानीपुर से भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने उच्च मतदान प्रतिशत को जनता की बदलाव की तीव्र इच्छा का प्रतीक बताया। उन्होंने ममता बनर्जी के उस बयान पर पलटवार किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके साथ केवल 16 लोग हैं और वे सभी बाहरी हैं।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दूसरे चरण में 142 विधानसभा क्षेत्रों में 29 अप्रैल को मतदान होगा और उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह चरण भी पहले चरण जितना ही उत्साहजनक रहेगा। गौरतलब है कि अधिकारी खुद 2021 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और तब से पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे मुखर चेहरे बने हुए हैं।
मुंबई और दिल्ली से भी NDA नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
मुंबई में भाजपा विधायक योगेश सागर ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों राज्यों के चुनावी रुझानों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व ने पहले ही भांप लिया था कि दोनों राज्यों की जनता सत्ता परिवर्तन चाहती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं को सूची से हटाए जाने के बावजूद इतना अधिक मतदान होना यह साबित करता है कि असली जनमत बदलाव के पक्ष में है।
दिल्ली में आरएलडी नेता के.सी. त्यागी ने दावा किया कि बंगाल में करीब 95 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है, जिसे उन्होंने लोकतंत्र की जीत करार दिया। त्यागी ने यह भी कहा कि रुझान स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि जनता बदलाव के मूड में है।
शिवसेना नेताओं ने लोकतंत्र की मजबूती बताया
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने पहले चरण की वोटिंग को ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले भी मतदान प्रतिशत 80 फीसदी से ऊपर रहा है, लेकिन इस बार का उत्साह और माहौल पूरी तरह अलग है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र की जड़ों की मजबूती का प्रमाण बताया।
शिवसेना नेता शाइना एन.सी. ने उच्च मतदान को टीएमसी शासन के खिलाफ जनाक्रोश का संकेत बताया। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, पलायन और राजनीतिक हिंसा के मुद्दों को उठाया और सवाल किया कि आखिर क्यों बंगाल के लोग राज्य छोड़ने पर मजबूर हैं।
खड़गे नोटिस पर त्यागी का बयान
के.सी. त्यागी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनाव आयोग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का भी जिक्र किया। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर भेजा गया था। त्यागी ने कहा कि राज्यसभा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक खड़गे को इस तरह के बयानों से बचना चाहिए था।
गहरा विश्लेषण: क्या सच में बदलाव की बयार है?
यह ध्यान देने योग्य है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इसी तरह के दावे किए थे, लेकिन ममता बनर्जी ने 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी। उस चुनाव में भी मतदान प्रतिशत ऊंचा था। इसलिए केवल उच्च मतदान को बदलाव की गारंटी मानना जल्दबाजी होगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में उच्च मतदान ऐतिहासिक रूप से सत्ताधारी दल के पक्ष में भी जा सकता है, क्योंकि टीएमसी का बूथ प्रबंधन बेहद मजबूत रहा है। 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या यह वाकई बदलाव की लहर है या महज उच्च भागीदारी।