एसआईआर प्रक्रिया पर पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, अन्य राज्यों में हुआ आसानी से
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के एसआईआर मामले में सुनवाई को टाला।
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया।
- अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी।
- विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया में समानता की आवश्यकता।
- न्यायिक अधिकारियों को शामिल करने की मांग।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के एसआईआर से संबंधित मामले में सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई स्थगित कर दी गई है। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट एक अप्रैल को विचार करेगा। सीजेआई ने कहा कि जबकि अन्य राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया सुगमता से संपन्न हो गई है, पश्चिम बंगाल के मामले में स्थिति भिन्न है।
इससे पहले, १० मार्च को हुई सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पूर्वाग्रह का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के चलते समाज के कमजोर तबके के लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह प्रक्रिया कमजोर समूहों को प्रभावित कर रही है और उन्होंने निर्देश देने की मांग की है ताकि वास्तविक मतदाता सूची से बाहर न हो जाएं।
पिछली सुनवाई में, सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच के गतिरोध को समाप्त करने की कोशिश की और कहा कि मतदाताओं द्वारा दिए गए आपत्तियों और दावों के निपटारे में न्यायिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) रैंक के सक्रिय और कुछ सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को मनोनीत करें, ताकि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के दावों और आपत्तियों का समाधान हो सके।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारी और पश्चिम बंगाल सरकार न्यायिक अधिकारियों को इस प्रक्रिया में सहायता करेंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों को भी पश्चिम बंगाल में तैनात करने की अनुमति दी थी, ताकि एसआईआर प्रक्रिया के तहत उत्पन्न मतदाता दावों और आपत्तियों के समाधान को त्वरित किया जा सके।