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विश्व तोता दिवस 2026: भारत के तीन खास तोते और 'मिट्ठू' से जुड़े रोचक तथ्य

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विश्व तोता दिवस 2026: भारत के तीन खास तोते और 'मिट्ठू' से जुड़े रोचक तथ्य

सारांश

31 मई को विश्व तोता दिवस पर जानें भारत की तीन खास प्रजातियों — रोज-रिंग्ड, एलेक्जेंड्रिन और प्लम-हेडेड पैरेट — के बारे में। ये 'मिट्ठू' सिर्फ बोलने वाले पक्षी नहीं, बल्कि इकोसिस्टम के संकेतक और बीज-प्रसारक भी हैं।

मुख्य बातें

विश्व तोता दिवस प्रतिवर्ष 31 मई को तोतों की बुद्धिमत्ता और पारिस्थितिक भूमिका के प्रति जागरूकता हेतु मनाया जाता है।
भारत में रोज-रिंग्ड पैरेट सबसे आम प्रजाति है, जो राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में पाई जाती है।
एलेक्जेंड्रिन पैरेट की पहचान उसकी गहरे लाल चोंच और मैरून कंधे-पैच से होती है; यह सख्त मेवे और बड़े बीज तोड़ने में सक्षम है।
प्लम-हेडेड पैरेट में नर का सिर गहरे बेर रंग का और मादा का हल्के भूरे रंग का होता है।
शहरीकरण, वृक्ष-कटाई और अवैध व्यापार के कारण इन प्रजातियों की संख्या पर असर पड़ रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, तोते इकोसिस्टम के संकेतक प्रजाति हैं और बीज-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विश्व तोता दिवस हर वर्ष 31 मई को मनाया जाता है — एक ऐसे पक्षी के सम्मान में जो न केवल बुद्धिमान और मिलनसार है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता है। भारत में तोतों को प्यार से 'मिट्ठू' कहा जाता है, और यहाँ तीन प्रमुख प्रजातियाँ — रोज-रिंग्ड पैरेट, एलेक्जेंड्रिन पैरेट और प्लम-हेडेड पैरेट — विशेष रूप से पाई जाती हैं। ये पक्षी जहाँ भी जाते हैं, बीज फैलाकर वनस्पति को पुनर्जीवित करते हैं।

तोते क्यों हैं इकोसिस्टम के रखवाले

तोतों की मुड़ी हुई, मजबूत चोंच उन्हें कठोर बीज और फल तोड़ने में सक्षम बनाती है, जबकि उनके पैरों की विशेष बनावट उन्हें पेड़ की डालियों को मजबूती से पकड़ने और भोजन चुनने में मदद करती है। ये पक्षी जोड़ों में या छोटे झुंड में विचरण करते हैं और इस दौरान बीजों का प्रसार करते हैं, जिससे वन-आवरण बना रहता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, तोते पर्यावरण के 'संकेतक प्रजाति' हैं — यदि तोते स्वस्थ हैं, तो पारिस्थितिकी तंत्र भी स्वस्थ है।

रोज-रिंग्ड पैरेट: भारत का सबसे परिचित तोता

गुलाबी छल्ले वाला तोता (रोज-रिंग्ड पैरेट) भारत की सबसे आम और व्यापक रूप से पाई जाने वाली तोता प्रजाति है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में यह शहरी बगीचों, खेतों और यहाँ तक कि बालकनियों पर भी दिख जाता है। इस प्रजाति की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसकी तीव्र स्मरण-शक्ति है — यह पुरानी जगहों और परिचित आवाज़ों को लंबे समय तक याद रख सकता है। ऊर्जा और सामाजिकता इसके स्वभाव के दो प्रमुख गुण हैं।

एलेक्जेंड्रिन पैरेट: शक्ति और सौंदर्य का संगम

एलेक्जेंड्रिन पैरेट आकार में रोज-रिंग्ड पैरेट से बड़ा होता है और इसकी पहचान इसकी गहरे लाल रंग की शक्तिशाली चोंच तथा कंधे पर स्थित मैरून रंग के पैच से होती है। इसकी मजबूत चोंच इसे सख्त मेवे, बड़े बीज और कठोर फल आसानी से तोड़ने में सक्षम बनाती है, जो अन्य छोटी प्रजातियों के लिए संभव नहीं होता। यही कारण है कि यह तोता आहार-विविधता के मामले में अपनी प्रजातियों में अग्रणी माना जाता है।

प्लम-हेडेड पैरेट: रंगों का जादू

प्लम-हेडेड पैरेट (बेर के सिर वाला तोता) अपने असाधारण रंगों के कारण पक्षी-प्रेमियों की पहली पसंद है। नर का सिर गहरे बेर (प्लम) रंग का होता है, जो इसे एक अलग पहचान देता है, जबकि मादा का सिर हल्के भूरे रंग का होता है। यह लैंगिक द्विरूपता (sexual dimorphism) इस प्रजाति को दूर से भी पहचानना आसान बनाती है। ये भी अन्य तोतों की तरह झुंड में रहना पसंद करते हैं और सामाजिक व्यवहार में अत्यंत सक्रिय होते हैं।

खतरे और संरक्षण की ज़रूरत

शहरीकरण की तीव्र गति, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और अवैध पालतू-व्यापार के कारण इन तीनों प्रजातियों की संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि तोते केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि वन-पुनरुद्धार की प्रक्रिया के अदृश्य स्तंभ हैं। विश्व तोता दिवस इन्हीं पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। आने वाले वर्षों में इनके प्राकृतिक आवास की रक्षा ही इनके अस्तित्व की गारंटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली मुद्दा इससे कहीं गहरा है। भारत में तोतों का अवैध पालतू-व्यापार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है, फिर भी यह धड़ल्ले से जारी है — और इस पर मुख्यधारा की कवरेज लगभग न के बराबर है। बीज-प्रसारक के रूप में इनकी भूमिका वनों की पुनर्बहाली के लिए अनिवार्य है, जबकि शहरी हरित-आवरण घटने से इनके घोंसले के स्थल तेज़ी से कम हो रहे हैं। जागरूकता दिवस तभी सार्थक होंगे जब संरक्षण नीति और शहरी वृक्षारोपण योजनाएँ इन प्रजातियों को केंद्र में रखकर बनाई जाएँ।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व तोता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व तोता दिवस प्रतिवर्ष 31 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य तोतों की पारिस्थितिक भूमिका, उनकी बुद्धिमत्ता और उनके संरक्षण की आवश्यकता के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।
भारत में कौन-सी तीन प्रमुख तोता प्रजातियाँ पाई जाती हैं?
भारत में रोज-रिंग्ड पैरेट (गुलाबी छल्ले वाला तोता), एलेक्जेंड्रिन पैरेट और प्लम-हेडेड पैरेट (बेर के सिर वाला तोता) तीन प्रमुख प्रजातियाँ हैं। तीनों सामाजिक, बुद्धिमान और इकोसिस्टम के लिए उपयोगी हैं।
तोते पर्यावरण के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
तोते बीज-प्रसारक की भूमिका निभाते हैं — जहाँ भी जाते हैं, बीज फैलाते हैं और वनस्पति को पुनर्जीवित करते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ये 'संकेतक प्रजाति' हैं; इनका स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति दर्शाता है।
एलेक्जेंड्रिन पैरेट की खास पहचान क्या है?
एलेक्जेंड्रिन पैरेट रोज-रिंग्ड पैरेट से बड़ा होता है और इसकी गहरे लाल रंग की शक्तिशाली चोंच तथा कंधे पर मैरून पैच इसे अलग पहचान देते हैं। यह सख्त मेवे, बड़े बीज और कठोर फल तोड़ने में सक्षम है।
तोतों की संख्या पर किन कारणों से खतरा है?
शहरीकरण की बढ़ती गति, पेड़ों की कटाई और अवैध पालतू-व्यापार तोतों की संख्या पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं। भारत में तोतों को पालतू बनाना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है, फिर भी यह व्यापार जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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