28 अक्टूबर 2026
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योगी सरकार का माटी कला महोत्सव 2026: 48 हजार कुम्हार परिवारों को बाजार से जोड़ने की योजना

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योगी सरकार का माटी कला महोत्सव 2026: 48 हजार कुम्हार परिवारों को बाजार से जोड़ने की योजना

सारांश

योगी सरकार ने लखनऊ में 11 दिवसीय माटी कला महोत्सव-2026 का आगाज़ किया — 48 हजार से अधिक कुम्हार परिवारों को चिह्नित कर उन्हें आधुनिक उपकरण, बाजार और वित्तीय सहायता से जोड़ने की बड़ी कोशिश। पारंपरिक मिट्टी शिल्प अब सिर्फ विरासत नहीं, रोजगार का ज़रिया बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

माटी कला महोत्सव-2026 का उद्घाटन 28 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के खादी भवन परिसर में हुआ; महोत्सव 7 नवंबर तक चलेगा।
प्रदेश में 48 हजार से अधिक शिल्पकार परिवार चिह्नित; 40 हजार को भूमि एवं पट्टा सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
अब तक 18,400 से अधिक विद्युत चालित चाक वितरित; चालू वर्ष में 2,740 अतिरिक्त चाक देने का लक्ष्य।
मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के तहत 1,300 से अधिक उद्यम स्थापित; इस वर्ष 300 और उद्यम का लक्ष्य।
10 कॉमन फैसिलिटी सेंटर और 128 सहकारी समितियाँ स्थापित कर सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा।
लगभग 4,900 शिल्पकारों के कौशल उन्नयन की योजना; आधुनिक तकनीक और उद्यम प्रबंधन प्रशिक्षण शामिल।

उत्तर प्रदेश में पारंपरिक माटी कला को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर शिल्पकारों की आजीविका सशक्त करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने 28 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में 11 दिवसीय माटी कला महोत्सव-2026 और राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। राज्य में अब तक 48 हजार से अधिक शिल्पकार परिवार चिह्नित किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 40 हजार शिल्पकारों को मिट्टी की उपलब्धता के लिए भूमि एवं पट्टा संबंधी सुविधाएं प्रदान की गई हैं।

महोत्सव का उद्देश्य और थीम

उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड द्वारा आयोजित यह महोत्सव 28 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक चलेगा। 'मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि' थीम पर आधारित इस प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिल्पकारों द्वारा तैयार पारंपरिक एवं आधुनिक माटी कला उत्पाद, गृह-सज्जा की वस्तुएं और कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं। यहाँ उत्पादों की बिक्री भी हो रही है, जिससे शिल्पकारों को नए ग्राहकों तक पहुँचने का प्रत्यक्ष अवसर मिल रहा है।

मंत्री राकेश सचान ने उद्घाटन समारोह में कहा कि माटी कला प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सरकार शिल्पकारों को आधुनिक उपकरण, तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुँच दिलाने की दिशा में काम कर रही है।

आधुनिकीकरण की दिशा में प्रमुख कदम

माटी कला के आधुनिकीकरण के तहत राज्य में अब तक 18,400 से अधिक विद्युत चालित चाक वितरित किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 2,740 अतिरिक्त विद्युत चालित चाक उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही पॉटरी और दीया निर्माण से जुड़े आधुनिक उपकरण भी वितरित किए जा रहे हैं।

उद्घाटन के अवसर पर राकेश सचान ने 5 शिल्पकारों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक और 2 शिल्पकारों को पग मिल प्रदान किए। मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति पत्र भी वितरित किए गए। मंत्री ने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल विपणन में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि इससे शिल्पकारों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिल सकेगा।

रोजगार और उद्यमिता का ढाँचा

मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता और बैंक ऋण के माध्यम से अब तक 1,300 से अधिक उद्यम स्थापित किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 300 अतिरिक्त उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य है। शिल्पकारों के कौशल उन्नयन के लिए लगभग 4,900 लोगों को आधुनिक तकनीक, उपकरण संचालन और उद्यम प्रबंधन का प्रशिक्षण देने की योजना है।

सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 128 सहकारी समितियाँ पंजीकृत की गई हैं। साझा तकनीकी और उत्पादन सुविधाओं के लिए पीलीभीत, रामपुर, कन्नौज, अमरोहा, बाराबंकी, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमेठी, बरेली और जालौन में 10 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए गए हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड की स्थापना 19 जुलाई 2018 को हुई थी और तब से यह बोर्ड शिल्पकार परिवारों को कच्चा माल, उपकरण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में जुटा है।

पुरस्कार और प्रोत्साहन व्यवस्था

उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने हेतु मंडल और राज्य स्तर पर पुरस्कार देने की व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने लोगों से स्थानीय शिल्पकारों के उत्पाद अपनाने और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की। आने वाले दिनों में यह महोत्सव प्रदेशभर के शिल्पकारों के लिए बाजार से सीधा जुड़ाव स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है। 48 हजार परिवारों की पहचान और 18,400 विद्युत चालित चाक का वितरण प्रभावशाली आँकड़े हैं, परंतु यह स्पष्ट नहीं है कि इन शिल्पकारों की वास्तविक आय में कितना सुधार हुआ है — सरकार ने इस पर कोई मापन-योग्य डेटा साझा नहीं किया। 'वोकल फॉर लोकल' जैसे अभियान बिना डिजिटल विपणन के मज़बूत बुनियादी ढाँचे के महज़ नारे बन सकते हैं। तब तक, कुम्हार समुदाय का संघर्ष महोत्सव के बाद भी जारी रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माटी कला महोत्सव-2026 क्या है और यह कब तक चलेगा?
माटी कला महोत्सव-2026 उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड द्वारा आयोजित 11 दिवसीय प्रदर्शनी है, जो 28 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक लखनऊ के डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में चलेगी। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिल्पकारों के पारंपरिक और आधुनिक माटी कला उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं और उनकी बिक्री भी हो रही है।
योगी सरकार ने कुम्हार परिवारों के लिए क्या योजनाएं बनाई हैं?
मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के तहत वित्तीय सहायता और बैंक ऋण से 1,300 से अधिक उद्यम स्थापित किए गए हैं और 18,400 से अधिक विद्युत चालित चाक वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 10 कॉमन फैसिलिटी सेंटर और 128 सहकारी समितियाँ भी स्थापित की गई हैं।
उत्तर प्रदेश में कितने शिल्पकार परिवार माटी कला से जुड़े हैं?
उत्तर प्रदेश में अब तक 48 हजार से अधिक शिल्पकार परिवार चिह्नित किए गए हैं। इनमें से लगभग 40 हजार शिल्पकारों को मिट्टी की उपलब्धता के लिए भूमि एवं पट्टा संबंधी सुविधाओं का लाभ दिया गया है।
माटी कला बोर्ड का गठन कब हुआ और इसका क्या उद्देश्य है?
उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड की स्थापना 19 जुलाई 2018 को हुई थी। इसका उद्देश्य पारंपरिक माटी कला से जुड़े परिवारों को कच्चा माल, उपकरण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है ताकि उनकी आजीविका सशक्त हो सके।
कुम्हार शिल्पकारों के लिए कौन-कौन से जिलों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाए गए हैं?
पीलीभीत, रामपुर, कन्नौज, अमरोहा, बाराबंकी, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमेठी, बरेली और जालौन — इन 10 जिलों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र शिल्पकारों को साझा तकनीकी और उत्पादन सुविधाएं प्रदान करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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