सपा सांसद अवधेश प्रसाद का दावा: योगी सरकार से उठा भरोसा, पीडीए फॉर्मूला ही विकल्प
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने 25 अक्टूबर 2026 को कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार से आम जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है और अब केवल सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला ही जनता की उम्मीद बचा है। उनकी यह प्रतिक्रिया उस नए पोस्टर के संदर्भ में आई, जो सपा कार्यालय और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आवास के बाहर लगाया गया है — जिस पर लिखा है: 'ब्राह्मण राह दिखाएगा, केवट पार लगाएगा और मिलकर पीडीए सरकार बनाएंगे।'
योगी सरकार पर निशाना
अवधेश प्रसाद ने कहा कि समाज का हर वर्ग — चाहे किसान हो, युवा हो या व्यापारी — किसी न किसी रूप में मौजूदा सरकार से परेशान और आहत है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार कल्याणकारी कार्य करने की बजाय 'व्यापार' कर रही है, जबकि संविधान का स्पष्ट निर्देश है कि सरकार को एक वेलफेयर स्टेट की भूमिका निभानी चाहिए। उनके अनुसार, इसी कारण लोग अखिलेश यादव के नेतृत्व में पीडीए की सरकार बनाना चाहते हैं।
पीडीए फॉर्मूला और ब्राह्मण समाज
सपा सांसद ने दावा किया कि ब्राह्मण समाज सहित समाज के तमाम वर्ग अब अखिलेश यादव की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'जनविरोधी' सरकार को हटाने की ताकत अगर किसी में है, तो वह केवल सपा और उसके पीडीए गठबंधन में है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो गई हैं।
कांग्रेस के पोस्टर पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस द्वारा 200 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे वाले होर्डिंग पर अवधेश प्रसाद ने कहा कि यह एक 'गैर-जिम्मेदाराना' कदम है और इससे भ्रम फैलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटों के बंटवारे का अंतिम निर्णय अखिलेश यादव और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता मिलकर करेंगे। उनका तर्क था कि सीटें संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि 'जीतने की क्षमता' के आधार पर तय होंगी ताकि गठबंधन अधिकतम सीटें जीत सके।
अन्य मुद्दों पर सांसद के विचार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऑपरेशन ट्राइडेंट और 2029 तक देश को नशामुक्त करने के दावे पर अवधेश प्रसाद ने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार के ऐसे दावे पहले भी जमीनी हकीकत से दूर रहे हैं। फिल्म 'फौजी' के टीजर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और हिटलर के बीच बातचीत दिखाए जाने के विवाद पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई और इसे 'देशद्रोह' करार दिया। जेएनयू में 'फ्री खालिद अंसारी' और 'फ्री कश्मीर' जैसे नारों पर उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाले नारों पर पाबंदी लगनी चाहिए।
रामलीला मैदान रैली और आगे की राह
30 अक्टूबर को प्रस्तावित जन-महाभियोग और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की महारैली को लेकर उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक बड़ी 'हुंकार' है। दिल्ली के कारोबारी समुदाय की रैली टालने की माँग को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह रैली खुद व्यापारियों के हित में है, क्योंकि कथित 'डबल इंजन सरकार' में सभी कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। इंडिया गठबंधन का यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक माँगें पूरी नहीं हो जातीं।