13 अक्टूबर 2026
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जुबीन गर्ग मौत केस: अमृतप्रभा महंत हाफलोंग जेल से रिहा, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दी थी जमानत

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जुबीन गर्ग मौत केस: अमृतप्रभा महंत हाफलोंग जेल से रिहा, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दी थी जमानत

सारांश

जुबीन गर्ग मौत मामले में पहली बार किसी मुख्य आरोपी को जमानत मिली — गायिका अमृतप्रभा महंत करीब एक साल जेल में रहने के बाद 13 अक्टूबर को हाफलोंग सब-जेल से रिहा हुईं। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मेडिकल लापरवाही की प्रारंभिक आशंका जताई, लेकिन आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण ट्रायल पर छोड़ा।

मुख्य बातें

गायिका अमृतप्रभा महंत को 13 अक्टूबर 2026 को हाफलोंग सब-जेल से रिहा किया गया — वह इस मामले में जमानत पाने वाली पहली मुख्य आरोपी हैं।
गुवाहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस प्रांजल दास ने 9 अक्टूबर को ₹50,000 के बॉन्ड और दो जमानत राशि की शर्त पर जमानत दी।
अमृतप्रभा 17 अक्टूबर 2025 से जेल में थीं — लगभग एक वर्ष की हिरासत।
हाईकोर्ट ने कहा कि जुबीन की मृत्यु से पहले मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने के प्रारंभिक संकेत हैं, पर आपराधिक जिम्मेदारी ट्रायल में तय होगी।
SIT चार्जशीट में 7 आरोपी — चार पर हत्या, एक पर गैर-इरादतन हत्या और दो पर साजिश के आरोप।
जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के दौरान हुई थी।

गायिका अमृतप्रभा महंत को मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को असम के हाफलोंग सब-जेल से रिहा कर दिया गया। वह असम के प्रख्यात गायक जुबीन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में आरोपी थीं और 17 अक्टूबर 2025 से न्यायिक हिरासत में थीं। गुवाहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस प्रांजल दास ने 9 अक्टूबर को उन्हें जमानत देने का आदेश सुनाया था, जिसके चार दिन बाद सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने पर वे जेल से बाहर आईं।

रिहाई की शर्तें और कानूनी प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने जमानत के लिए ₹50,000 के निजी बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो जमानत जमा करने की शर्त निर्धारित की थी। आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद अमृतप्रभा महंत हाफलोंग जेल से बाहर आईं। विशेष लोक अभियोजक जियाउल कमर ने कोर्ट के इस फैसले की पुष्टि की। इस प्रकार वह इस मामले में मुख्य केस में जमानत पाने वाली पहली आरोपी बन गई हैं।

हाईकोर्ट की टिप्पणियाँ

जमानत आदेश में जस्टिस प्रांजल दास ने प्रारंभिक टिप्पणी की कि जुबीन गर्ग की मृत्यु से पूर्व उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए आवश्यक चिकित्सा सावधानियों का पालन नहीं किया गया प्रतीत होता है। कोर्ट ने कहा कि गायक पहले से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, इसलिए उनके साथ एक केयरटेकर या मेडिकल अटेंडेंट होना अपेक्षित था जो डॉक्टरों के निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करता।

हालाँकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन चूकों के लिए आपराधिक जिम्मेदारी किसकी है — यह निर्धारण ट्रायल के दौरान किया जाएगा। अदालत ने अभी किसी की दोषसिद्धि नहीं मानी है।

जुबीन गर्ग की मौत और मामले की पृष्ठभूमि

असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में समुद्र में तैरते वक्त मृत्यु हो गई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में भाग लेने के लिए सिंगापुर गए थे। उनकी मौत की खबर आते ही असम में व्यापक आक्रोश फैल गया। प्रशंसकों और कई सामाजिक संगठनों ने पारदर्शी जाँच की माँग की।

इसके बाद असम सरकार ने एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित किया। SIT की चार्जशीट में सात लोगों को आरोपी बनाया गया। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक सेलिब्रिटी की असामयिक मृत्यु तक सीमित नहीं है — इसने असम में आयोजन प्रबंधन के दौरान कलाकारों की मेडिकल देखभाल को लेकर व्यापक सवाल खड़े किए हैं।

मामले के सात आरोपी

SIT की चार्जशीट के अनुसार फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत, जुबीन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड सदस्य शेखरज्योति गोस्वामी और गायिका अमृतप्रभा महंत पर हत्या के आरोप लगाए गए हैं। जुबीन के कजिन संदीपन गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या का आरोप है, जबकि उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य पर आपराधिक साजिश और विश्वासघात के आरोप हैं।

आगे क्या होगा

अमृतप्रभा महंत की रिहाई के बाद अब सबकी नजरें मुकदमे की प्रक्रिया पर टिकी हैं। शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी बाकी है। ट्रायल कोर्ट को यह तय करना होगा कि मेडिकल लापरवाही किस हद तक आपराधिक जिम्मेदारी का आधार बनती है — एक ऐसा प्रश्न जो आने वाले समय में इस मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल अभी बाकी है — क्या मेडिकल लापरवाही को आपराधिक दायित्व में बदला जा सकता है? हाईकोर्ट ने स्वयं कहा कि यह ट्रायल कोर्ट का काम है, जो दर्शाता है कि सबूत अभी भी व्याख्या की माँग करते हैं। सात आरोपियों पर अलग-अलग धाराओं में मुकदमा चलाने की रणनीति SIT की जटिल कानूनी स्थिति को उजागर करती है — हत्या का आरोप साबित करना, जहाँ इरादा सिद्ध करना ज़रूरी है, बेहद कठिन होगा। यह मामला केवल जुबीन गर्ग की मौत का नहीं, बल्कि बड़े आयोजनों में कलाकारों की मेडिकल सुरक्षा की जवाबदेही का सवाल भी है, जिस पर अभी तक कोई ठोस नीतिगत चर्चा नहीं हुई है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमृतप्रभा महंत को जेल से कब और कैसे रिहा किया गया?
अमृतप्रभा महंत को 13 अक्टूबर 2026 को हाफलोंग सब-जेल से रिहा किया गया। गुवाहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस प्रांजल दास ने 9 अक्टूबर को ₹50,000 के बॉन्ड और दो जमानत राशि की शर्त पर उन्हें जमानत दी थी, जिसके चार दिन बाद सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने पर वे जेल से बाहर आईं।
जुबीन गर्ग की मौत कब और कहाँ हुई थी?
जुबीन गर्ग की मृत्यु 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय हुई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में भाग लेने के लिए सिंगापुर गए थे।
इस मामले में कितने और कौन-कौन से आरोपी हैं?
असम SIT की चार्जशीट में सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। फेस्टिवल आयोजक श्यामकानु महंत, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड सदस्य शेखरज्योति गोस्वामी और अमृतप्रभा महंत पर हत्या के आरोप हैं। कजिन संदीपन गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या और सुरक्षाकर्मियों नंदेश्वर बोरा व परेश बैश्य पर साजिश व विश्वासघात के आरोप हैं।
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जमानत देते वक्त क्या टिप्पणी की?
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर ऐसा लगता है कि जुबीन गर्ग की मौत से पहले उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए आवश्यक मेडिकल सावधानियाँ नहीं बरती गईं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसकी आपराधिक जिम्मेदारी किसकी है, यह ट्रायल के दौरान तय किया जाएगा।
क्या इस मामले में बाकी आरोपियों को भी जमानत मिल सकती है?
अभी तक अमृतप्रभा महंत ही एकमात्र आरोपी हैं जिन्हें मुख्य केस में जमानत मिली है। शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी बाकी है और उनका निर्णय संबंधित अदालतों पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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