10 अगस्त 2026
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जुबीन गर्ग मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने श्यामकानु महंत की जमानत याचिका पर असम सरकार से माँगा जवाब

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जुबीन गर्ग मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने श्यामकानु महंत की जमानत याचिका पर असम सरकार से माँगा जवाब

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने जुबीन गर्ग मौत मामले में आरोपी श्यामकानु महंत की जमानत याचिका पर असम सरकार से जवाब माँगा है। गुवाहाटी हाई कोर्ट पहले ही जमानत खारिज कर चुका है। भारत-सिंगापुर जाँच के परस्पर विरोधी निष्कर्षों के बीच यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 23 जून 2026 को श्यामकानु महंत की जमानत याचिका पर असम सरकार को नोटिस जारी किया।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया; अगली सुनवाई 10 अगस्त को।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पहले ही महंत की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज की थी कि साक्ष्य कथित साजिश में उनकी सक्रिय भूमिका की ओर इशारा करते हैं।
हाई कोर्ट ने फरार होने की आशंका जताई — महंत घटना के बाद मलेशिया गए थे और दिल्ली हवाई अड्डे पर गिरफ्तार हुए।
गायक जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजारस द्वीप के पास हुई थी; सिंगापुर पुलिस को आपराधिक कृत्य के सबूत नहीं मिले, असम सरकार इससे असहमत है।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 23 जून 2026 को असमिया गायक जुबीन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में आरोपी श्यामकानु महंत की जमानत याचिका पर असम सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। न्यायालय की यह कार्रवाई उस विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई के दौरान हुई, जिसमें महंत ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के जमानत-अस्वीकृति आदेश को चुनौती दी है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का ब्यौरा

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने श्यामकानु महंत की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए असम सरकार को नोटिस जारी किया। महंत के वकील अनसूया चौधरी ने कहा कि उनके मुवक्किल जेल में हैं और शुरू से ही जाँच में सहयोग कर रहे हैं। अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित है।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत

पिछले महीने न्यायमूर्ति मिताली ठाकुरिया की एकल पीठ ने महंत की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके विरुद्ध आरोप गंभीर हैं। अदालत ने कहा था कि जाँच में जुटाए गए साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि यॉट पार्टी श्यामकानु महंत की सलाह पर आयोजित की गई थी और उन्होंने कथित साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हाई कोर्ट ने कहा, 'पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता और अन्य सह-आरोपियों के बीच साजिश थी।'

अभियोजन पक्ष के अनुसार, गायक को उनकी स्वास्थ्य संबंधी पाबंदियों के बावजूद पूरी रात शराब उपलब्ध कराई गई और बिना किसी चिकित्सीय सहायता के यॉट यात्रा पर ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें शराब सेवन और जल-क्रीड़ाओं से दूर रहने की सलाह दी थी। हाई कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि जमानत मिलने पर महंत फरार हो सकते हैं, यह देखते हुए कि घटना के बाद वह मलेशिया चले गए थे और लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद दिल्ली हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किए गए थे।

न्यायमूर्ति ठाकुरिया ने यह भी रेखांकित किया कि अभियोजन पक्ष ने बड़ी संख्या में गवाहों को सूचीबद्ध किया है, इसलिए इस चरण में गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि महंत की हिरासत की अवधि को अत्यधिक लंबी कैद नहीं कहा जा सकता और मामले की रोज़ाना सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत का गठन भी किया जा चुका है।

जुबीन गर्ग की मौत: पृष्ठभूमि

यह मामला प्रसिद्ध असमिया गायक जुबीन गर्ग की 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजारस द्वीप के पास तैराकी के दौरान हुई मौत से जुड़ा है। वह अगले दिन नॉर्थईस्ट इंटरनेशनल फेस्टिवल (NEIF) में प्रस्तुति देने वाले थे।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधानसभा में इस मामले को 'सीधी और साफ हत्या' बताया था। दूसरी ओर, सिंगापुर पुलिस बल की जाँच में मौत में किसी साजिश या आपराधिक कृत्य के सबूत नहीं मिले। हालाँकि, असम सरकार का कहना है कि सिंगापुर जाँच के निष्कर्षों का राज्य में चल रही आपराधिक कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के नोटिस के बाद असम सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होने की संभावना है, जब न्यायालय दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगा। यह मामला न केवल न्यायिक, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि भारत और सिंगापुर की जाँच के निष्कर्ष परस्पर विरोधी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असम सरकार इसे 'हत्या' बता रही है; सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या घरेलू अभियोजन विदेशी जाँच से स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सकता है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री का विधानसभा में 'सीधी हत्या' वाला बयान न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर चला, जो कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन पर सवाल उठाता है। जब तक दोनों देशों की जाँच रिपोर्टों में सामंजस्य नहीं बैठता, यह मुकदमा कानूनी के साथ-साथ कूटनीतिक चुनौती भी बना रहेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुबीन गर्ग मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 23 जून 2026 को आरोपी श्यामकानु महंत की जमानत याचिका पर असम सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होने की संभावना है।
श्यामकानु महंत की जमानत गुवाहाटी हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी?
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पाया कि साक्ष्य कथित साजिश में महंत की सक्रिय भूमिका की ओर इशारा करते हैं और फरार होने की आशंका भी है, क्योंकि वह घटना के बाद मलेशिया चले गए थे। अदालत ने यह भी कहा कि गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जुबीन गर्ग की मौत कब और कहाँ हुई थी?
जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजारस द्वीप के पास तैराकी के दौरान हुई थी। वह अगले दिन नॉर्थईस्ट इंटरनेशनल फेस्टिवल (NEIF) में प्रस्तुति देने वाले थे।
सिंगापुर और असम की जाँच के निष्कर्षों में क्या अंतर है?
सिंगापुर पुलिस बल की जाँच में जुबीन गर्ग की मौत में किसी साजिश या आपराधिक कृत्य के सबूत नहीं मिले। इसके विपरीत, असम सरकार इसे आपराधिक मामला मानती है और उसका कहना है कि सिंगापुर जाँच के निष्कर्षों का राज्य में चल रही आपराधिक कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस मामले में आगे क्या होगा?
असम सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में अपना जवाब दाखिल करना होगा और 10 अगस्त को अगली सुनवाई होगी। मामले की रोज़ाना सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत का गठन पहले ही किया जा चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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