जुबिन गर्ग मौत मामला: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने श्यामकानु महंत की जमानत अर्जी दूसरी बार खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को असम के मशहूर संगीतकार जुबिन गर्ग की मौत के मामले में मुख्य आरोपी और फेस्टिवल ऑर्गनाइजर श्यामकानु महंत की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष द्वारा रखे गए सात अहम पहलुओं पर विचार करने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले एक फास्ट ट्रैक कोर्ट भी महंत की जमानत अर्जी ठुकरा चुका था।
अभियोजन पक्ष के मुख्य तर्क
असम के एडवोकेट जनरल देवाजीत सैकिया ने कोर्ट में जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि महंत को रिहा किया गया तो वह फरार हो सकता है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान महंत के मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया गया है।
सैकिया ने यह भी आरोप लगाया कि महंत ने कुछ नोट्स तैयार किए थे, जिनमें जुबिन गर्ग के बैंडमेट और गायिका अमृतप्रभा महंता को निर्देश दिए गए थे कि उन्हें अपने बयान में क्या कहना चाहिए। उनके अनुसार, इन घटनाक्रमों से जांच को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की संभावित कोशिशों को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
जुबिन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजरस द्वीप के पास तैरते समय हुई थी। यह घटना उस दिन से ठीक एक दिन पहले हुई, जिस दिन उन्हें NEIF के बैनर तले आयोजित एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देनी थी। घटना के बाद असम पुलिस की सीआईडी द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) ने गहन जांच की और दिसंबर 2025 में चार्जशीट दाखिल की।
चार्जशीट में महंत सहित सात आरोपियों के नाम शामिल हैं, जिनमें से चार पर हत्या का आरोप लगाया गया है। अमृतप्रभा महंता, जो जुबिन गर्ग के साथ सिंगापुर गई थीं, भी इस मामले में कथित भूमिका के चलते न्यायिक हिरासत में हैं।
सरकार और न्यायालय का रुख
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य विधानसभा में इस मामले को 'सीधी-सादी हत्या' करार दिया था और इस मुद्दे पर सरकार के कड़े रुख को स्पष्ट किया था। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करने के साथ ही जांच जारी रखने की अनुमति भी दे दी।
सिंगापुर जांच से विरोधाभास
उल्लेखनीय है कि सिंगापुर पुलिस द्वारा की गई जांच में एक अलग निष्कर्ष सामने आया है — जांच में कहा गया है कि गर्ग की मौत में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है। इसके बावजूद, असम के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि विदेशी जांच के निष्कर्षों का राज्य में चल रही कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सोशल मीडिया और जन-प्रतिक्रिया
यह मामला सोशल मीडिया पर लगातार तीखी प्रतिक्रियाएँ बटोर रहा है। बड़ी संख्या में लोग 'जुबिन गर्ग के लिए न्याय' अभियान के तहत इस मामले में शामिल आरोपियों के लिए कड़ी सजा की माँग कर रहे हैं। यह मामला अब असम की न्यायिक और सामाजिक चेतना दोनों के केंद्र में है, और अगली सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।