बड़ा फैसला: 41 बायोगैस सिलेंडर फिलिंग और स्टोरेज प्लांट्स को मंजूरी, 14 को लाइसेंस जारी

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बड़ा फैसला: 41 बायोगैस सिलेंडर फिलिंग और स्टोरेज प्लांट्स को मंजूरी, 14 को लाइसेंस जारी

सारांश

केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हुए 41 बायोगैस फिलिंग व स्टोरेज प्लांट्स को मंजूरी और 14 को लाइसेंस दिया। PESO ने 467 CNG/CBG आवेदनों का निपटारा किया, अमोनियम नाइट्रेट निर्यात पर रोक लगाई और SKO भंडारण में छूट दी।

Key Takeaways

41 बायोगैस सिलेंडर फिलिंग और स्टोरेज प्लांट्स को केंद्र सरकार ने औपचारिक मंजूरी दी, जिनमें से 14 को लाइसेंस जारी। PESO ने 25 मार्च से 21 अप्रैल के बीच 467 CNG/CBG आवेदन निपटाए — 157 को अंतिम लाइसेंस , 38 को पूर्व स्वीकृति । 18 मार्च से अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लागू, घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए। SKO के अस्थायी भंडारण में 2,500 लीटर (एकमुश्त 5,000 लीटर ) की छूट दी गई — PDS आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु। 14 मार्च को पोरबंदर जेट्टी पर LPG उतारने की अनुमति और 1 अप्रैल से CNG/CBG कंप्रेसर हेतु 6 माह की अस्थायी छूट । DPIIT भी सप्लाई चेन स्थिरता और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को समर्थन देने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाते हुए 41 बायोगैस सिलेंडर फिलिंग और स्टोरेज प्लांट्स को औपचारिक मंजूरी प्रदान की है। इनमें से 14 प्लांट्स को परिचालन लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है। यह घोषणा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में की गई।

467 आवेदनों का प्राथमिकता आधार पर निपटारा

पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) स्टेशनों के लिए कुल 467 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन सभी आवेदनों को 25 मार्च से 21 अप्रैल के बीच प्राथमिकता के आधार पर निपटाया गया।

मंत्रालय के अनुसार, इन 467 मामलों में से 157 को अंतिम लाइसेंस प्रदान किया गया, जबकि 38 मामलों में नए CNG/CBG स्टेशनों के निर्माण हेतु पूर्व स्वीकृति (Prior Approval) दी गई। यह कार्रवाई देश में स्वच्छ ईंधन अवसंरचना को तेज़ी से विस्तारित करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए विशेष कदम

PESO ने मौजूदा वैश्विक संकट के दौरान देश में ईंधन और गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक और सहायक उपाय लागू किए हैं।

सुपीरियर केरोसीन ऑयल (SKO) के अस्थायी भंडारण में विशेष छूट दी गई है, जिसके तहत 2,500 लीटर तक स्टोरेज की अनुमति दी गई है और एकमुश्त आधार पर 5,000 लीटर तक की छूट भी प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत अंतिम उपभोक्ता तक केरोसीन की आपूर्ति सुचारू रखना है।

इसके अतिरिक्त, 18 मार्च को अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया ताकि घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। साथ ही, एलएनजी (LNG) को क्रायोजेनिक सिलेंडरों में भरने की अनुमति देने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे ईंधन आपूर्ति तंत्र को अधिक लचीला बनाया जा सके।

CNG स्टेशनों और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली रफ्तार

PESO ने 20 मार्च को निर्देश जारी किए कि CNG स्टेशनों और डिकंप्रेशन यूनिट्स से जुड़े आवेदनों को 10 दिनों के भीतर निपटाया जाए, ताकि देश में ईंधन अवसंरचना का तीव्र विकास हो सके।

आपूर्ति की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 14 मार्च को पोरबंदर जेट्टी पर एलपीजी (LPG) उतारने की अनुमति भी दी गई। यह निर्णय पश्चिमी तट पर ईंधन की उपलब्धता को सुदृढ़ करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

1 अप्रैल 2026 को PESO की आधिकारिक वेबसाइट पर पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से PDS केरोसीन और डीजल आपूर्ति के लिए अनुमोदित कंटेनर निर्माताओं एवं उनकी उत्पादन क्षमता की सूची सार्वजनिक की गई।

CNG/CBG कंप्रेसर के लिए 6 माह की अस्थायी छूट

1 अप्रैल को ही CNG/CBG कंप्रेसर की मंजूरी प्रक्रिया में 6 महीने की अस्थायी छूट भी दी गई है, ताकि नए स्टेशन शीघ्र चालू हो सकें और देश में स्वच्छ ईंधन का विस्तार तेज़ हो।

इन सभी प्रयासों के समानांतर उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) भी औद्योगिक गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने, सप्लाई चेन को स्थिर रखने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को समर्थन देने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

व्यापक परिप्रेक्ष्य: ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में रणनीतिक पहल

गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर रहता है, और पश्चिम एशिया में अस्थिरता सीधे तेल-गैस आपूर्ति को प्रभावित करती है। ऐसे में बायोगैस और CNG अवसंरचना का विस्तार न केवल आयात निर्भरता कम करने की रणनीति है, बल्कि SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) योजना के तहत किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को भी लाभान्वित करने का एक माध्यम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से CBG स्टेशनों का विस्तार होता रहा, तो आगामी वर्षों में भारत आयातित प्राकृतिक गैस पर अपनी निर्भरता में उल्लेखनीय कमी ला सकता है। आने वाले महीनों में PESO की कार्यप्रणाली और नए लाइसेंस जारी होने की रफ्तार पर सभी की नज़र रहेगी।

Point of View

लेकिन इसका सबसे सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है — और सरकार के ये कदम उसी असर को थामने की कोशिश हैं। 467 आवेदनों का 25 दिनों में निपटारा PESO की सामान्य गति से कहीं तेज़ है, जो दर्शाता है कि नौकरशाही भी संकट में तेज़ चल सकती है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये 41 प्लांट्स कब तक जमीन पर काम करने लगते हैं — मंजूरी और परिचालन के बीच की खाई अक्सर बड़ी होती है। SATAT जैसी योजनाओं के बावजूद CBG अवसंरचना अभी भी लक्ष्य से पीछे है, इसलिए इन घोषणाओं को दीर्घकालिक नीतिगत प्रतिबद्धता की कसौटी पर कसना होगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

केंद्र सरकार ने कितने बायोगैस प्लांट्स को मंजूरी दी है?
केंद्र सरकार ने 41 बायोगैस सिलेंडर फिलिंग और स्टोरेज प्लांट्स को मंजूरी दी है। इनमें से 14 प्लांट्स को परिचालन लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है।
PESO ने CNG और CBG स्टेशनों के कितने आवेदन निपटाए?
PESO को 467 आवेदन प्राप्त हुए थे जिन्हें 25 मार्च से 21 अप्रैल के बीच निपटाया गया। इनमें 157 को अंतिम लाइसेंस और 38 को पूर्व मंजूरी दी गई।
अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर रोक क्यों लगाई गई?
18 मार्च को अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध इसलिए लगाया गया ताकि देश में इसकी घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित रहे। पश्चिम एशिया संकट के बीच यह कदम आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने के लिए उठाया गया।
SKO यानी केरोसीन भंडारण में क्या छूट दी गई है?
सुपीरियर केरोसीन ऑयल (SKO) के अस्थायी भंडारण में 2,500 लीटर तक की अनुमति और एकमुश्त आधार पर 5,000 लीटर तक की विशेष छूट दी गई है। यह छूट PDS के तहत अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति बनाए रखने के लिए है।
CNG/CBG कंप्रेसर के लिए क्या नई सुविधा दी गई है?
1 अप्रैल 2026 को CNG/CBG कंप्रेसर की मंजूरी प्रक्रिया में 6 महीने की अस्थायी छूट दी गई है। इसका उद्देश्य नए स्टेशनों को शीघ्र चालू करना और स्वच्छ ईंधन अवसंरचना का विस्तार करना है।
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