बड़ा फैसला: 41 बायोगैस सिलेंडर फिलिंग और स्टोरेज प्लांट्स को मंजूरी, 14 को लाइसेंस जारी
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 22 अप्रैल। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि 41 बायोगैस सिलेंडर फिलिंग और स्टोरेज प्लांट्स को सरकारी मंजूरी प्रदान की गई है, जिनमें से 14 प्लांट्स को औपचारिक लाइसेंस भी जारी कर दिया गया है। यह कदम पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
467 आवेदनों का प्राथमिकता से निपटारा
पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) स्टेशनों के लिए कुल 467 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन सभी आवेदनों को 25 मार्च से 21 अप्रैल के बीच प्राथमिकता के आधार पर निपटाया गया।
इनमें से 157 मामलों को अंतिम लाइसेंस प्रदान किया गया, जबकि 38 मामलों में नए सीएनजी/सीबीजी स्टेशनों के निर्माण के लिए पूर्व स्वीकृति दी गई। यह प्रक्रिया असाधारण तेज़ी से पूरी की गई, जो सामान्य प्रशासनिक समयसीमा से काफी कम है।
ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष उपाय
पीईएसओ ने मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के दौरान ईंधन और गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सुपीरियर केरोसीन ऑयल (एसकेओ) के अस्थायी भंडारण में विशेष छूट दी गई है, जिसके तहत 2,500 लीटर तक नियमित स्टोरेज और एकमुश्त 5,000 लीटर तक की अनुमति मिली है।
यह छूट इसलिए दी गई है ताकि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के अंतर्गत अंतिम उपभोक्ताओं तक केरोसीन की आपूर्ति बाधित न हो। गौरतलब है कि देश के ग्रामीण और वंचित वर्ग के करोड़ों परिवार अभी भी पीडीएस केरोसीन पर निर्भर हैं।
अमोनियम नाइट्रेट निर्यात पर रोक और एलएनजी नीति
घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 18 मार्च को अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। यह निर्णय रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग कृषि उर्वरकों और औद्योगिक विस्फोटकों दोनों में होता है।
इसके साथ ही एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) को क्रायोजेनिक सिलेंडरों में भरने की अनुमति देने के दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे ईंधन वितरण प्रणाली को अधिक लचीला और विकेंद्रीकृत बनाया जा सके। 14 मार्च को पोरबंदर जेट्टी पर एलपीजी उतारने की अनुमति भी दी गई, जिससे तटीय मार्ग से ईंधन आपूर्ति सुगम हुई।
पारदर्शिता और त्वरित मंजूरी की नई व्यवस्था
पीईएसओ ने 20 मार्च को निर्देश जारी किए कि सीएनजी स्टेशनों और डिकंप्रेशन यूनिट्स से जुड़े आवेदनों को 10 दिनों के भीतर निपटाया जाए। इससे ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास में तेज़ी आएगी।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 1 अप्रैल 2026 को पीईएसओ की आधिकारिक वेबसाइट पर पीडीएस केरोसीन और डीजल आपूर्ति के लिए अनुमोदित कंटेनर निर्माताओं और उनकी क्षमता की सूची सार्वजनिक की गई। इसी दिन सीएनजी/सीबीजी कंप्रेसर के लिए मंजूरी प्रक्रिया में 6 महीने की अस्थायी छूट भी दी गई।
डीपीआईआईटी का औद्योगिक सहयोग
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) भी इस दिशा में सक्रिय है। विभाग औद्योगिक गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने, सप्लाई चेन को स्थिर रखने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आवश्यक सहयोग देने के लिए समन्वित प्रयास कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के लंबा खिंचने की स्थिति में ये उपाय भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की परीक्षा लेंगे। कंप्रेस्ड बायोगैस को बढ़ावा देना न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि कृषि अपशिष्ट प्रबंधन और ग्रामीण रोजगार के लिहाज से भी दीर्घकालिक महत्व रखता है।
आने वाले हफ्तों में सरकार और अधिक सीएनजी/सीबीजी स्टेशनों को चालू करने की दिशा में काम करेगी, और पीईएसओ की त्वरित मंजूरी प्रक्रिया इस लक्ष्य को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।