अदाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को 'प्रहार' लाइट मशीन गन की पहली खेप सौंपी, सीईओ ने इसे 'ऐतिहासिक' बताया
सारांश
Key Takeaways
- अदाणी डिफेंस ने 2,000 'प्रहार' लाइट मशीन गन की पहली खेप सौंपी।
- सीईओ ने इसे 'मेक इन इंडिया' का मील का पत्थर बताया।
- यह मशीन गन 7.62 मिमी कैलिबर की है।
- कंपनी का लक्ष्य 41,000 एलएमजी का उत्पादन करना है।
- यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को दर्शाती है।
ग्वालियर, 28 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने शनिवार को भारतीय सशस्त्र बलों को 2,000 'प्रहार' लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप सौंपी। इस अवसर पर कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने इसे 'मेक इन इंडिया' योजना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
7.62 मिमी कैलिबर की यह अत्याधुनिक मशीन गन ग्वालियर के बाहरी क्षेत्र में स्थित कंपनी के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में निर्मित की गई है।
कार्यक्रम के दौरान न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए आशीष राजवंशी ने कहा कि कंपनी को सात वर्षों में कुल 41,000 एलएमजी देने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, लेकिन हमारी टीम की तेज गति के चलते हम यह लक्ष्य तीन वर्षों से भी कम समय में पूरा कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पहली 2,000 एलएमजी की डिलीवरी के बाद, कंपनी हर महीने 1,000 मशीन गन बनाने की क्षमता हासिल कर चुकी है, जो एक अनोखा रिकॉर्ड है।
सीईओ राजवंशी ने कहा कि यह सफलता 'मेक इन इंडिया' रणनीति के कारण संभव हो पाई है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में तकनीकी साझेदारों से मदद मिली, जिसके बाद कंपनी ने निरंतर मेहनत और अनुभव के माध्यम से खुद को मजबूत किया।
उन्होंने आगे कहा कि 2020 में 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के साथ इस यात्रा की शुरुआत हुई थी। पिछले छह वर्षों में, कंपनी एक छोटे कंपोनेंट निर्माता से पूर्ण हथियार बनाने वाली कंपनी (ओईएम) में बदल गई है।
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ए अनबरसु भी उपस्थित थे। उन्होंने सेना के लिए भेजी जा रही पहली खेप वाले ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
अनबरसु ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब तेजी से रक्षा सौदों को उत्पादन और डिलीवरी में बदलने की क्षमता रखता है, जो देश की रक्षा ताकत को और मजबूती प्रदान करेगा।