क्या भारत-रूस समुद्री सहयोग से नए व्यापार मार्ग बनेंगे और जहाज निर्माण को बढ़ावा मिलेगा?
सारांश
Key Takeaways
- भारत-रूस के बीच समुद्री सहयोग से नए व्यापार मार्गों का विकास होगा।
- यह जहाज निर्माण क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
- इसके माध्यम से दोनों देशों की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।
- इस समझौते को मेक इन इंडिया अभियान के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है।
- हिंद महासागर और रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में नए व्यापार मार्ग विकसित होंगे।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में भारत और रूस के बीच समुद्री सहयोग पर हुए समझौतों से भारत की वैश्विक समुद्री उपस्थिति में मजबूती आएगी और जहाज निर्माण, आर्कटिक-क्षम समुद्री गतिविधियों एवं नए व्यापार मार्गों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह जानकारी मैरीटाइम फेयरट्रेड की एक रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह साझेदारी भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करेगी और लॉजिस्टिक्स संचालन को बेहतर बनाकर व्यापार प्रवाह में सुधार लाएगी, जो दोनों देशों की आर्थिक प्रगति को गति प्रदान करेगा।
यह भी बताया गया है कि हिंद महासागर और रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र के बीच नए व्यापार मार्गों का विकास किया जाएगा। भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं को रूस के अनुभव और संसाधनों के साथ मिलाकर आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत और रूस ने नवंबर 2025 के अंत में उच्च-स्तरीय वार्ताएं की थीं, जिसमें जहाज निर्माण, व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में संभावित साझेदारी पर विचार किया गया।
इन उच्च-स्तरीय अंतर-एजेंसी परामर्श बैठकों का नेतृत्व केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी तथा रूस के समुद्री बोर्ड के अध्यक्ष निकोलाई पेत्रुशेव ने किया।
मैरीटाइम फेयरट्रेड की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पहल उस सोच को दर्शाती है, जिसे सोनोवाल ने “समुद्री कनेक्टिविटी और वैश्विक सहयोग का नया युग” बताया है।
सोनोवाल ने भारत-रूस साझेदारी के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए विशेष रूप से जहाज निर्माण और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे तथा चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर जैसे नए व्यापार मार्गों की स्थापना पर जोर दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने इस सहयोग को “विन-विन” स्थिति करार दिया, जो न केवल भारत के “मेक इन इंडिया” अभियान को आगे बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार सृजन के साथ साझा समुद्री भविष्य को भी आकार देगा।
इस महत्वाकांक्षी एजेंडे को 5 दिसंबर 2025 को भारत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के दौरान भी रेखांकित किया गया था। दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया और शिपिंग तथा लॉजिस्टिक्स को विकास के अहम क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया।
इस बीच, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इससे पहले मॉस्को में रूसी नेतृत्व के साथ प्रस्तावित भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा की थी।