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ईएसआईसी से 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा, मनसुख मांडविया ने सीआईआई सम्मेलन में गिनाईं योजनाएँ

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ईएसआईसी से 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा, मनसुख मांडविया ने सीआईआई सम्मेलन में गिनाईं योजनाएँ

सारांश

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने सीआईआई सम्मेलन में खुलासा किया कि ईएसआईसी अब 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य कवच दे रहा है। 80 करोड़ को मुफ्त अनाज, 10 करोड़ किसानों को सीधे ₹2,000 और 10 राज्यों में महिलाओं को मासिक नकद सहायता — यह सरकार की सामाजिक सुरक्षा की व्यापक तस्वीर है।

मुख्य बातें

केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ.
मनसुख मांडविया ने 28 सितंबर 2026 को कहा कि ईएसआईसी के ज़रिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी जा रही है।
सरकार 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क अनाज उपलब्ध करा रही है।
10 करोड़ किसानों को हर चार महीने में सीधे बैंक खाते में ₹2,000 दिए जाते हैं।
देश के 10 राज्य महिलाओं को प्रतिमाह ₹1,200 से ₹2,000 तक की नकद सहायता दे रहे हैं।
मंत्री ने राज्यों को श्रम संहिताओं और सेस फंड के उपयोग की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई-ईएफआई राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि भारत सरकार कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के माध्यम से देश के 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है। 'औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में मंत्री ने केंद्र सरकार की व्यापक सामाजिक सुरक्षा पहलों का विस्तृत ब्यौरा दिया।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा

मांडविया ने बताया कि सरकार 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क अनाज उपलब्ध करा रही है, जो देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 10 करोड़ किसानों को प्रत्येक चार महीने पर सीधे उनके बैंक खातों में ₹2,000 की राशि हस्तांतरित की जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण आय और कृषि संकट को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है।

महिलाओं के लिए राज्य-स्तरीय नकद सहायता

मंत्री ने कहा, 'आज देश में 10 ऐसे राज्य हैं जो महिलाओं के खातों में हर महीने ₹2,000, ₹1,500 या ₹1,200 जैसी रकम जमा करते हैं।' उन्होंने इसे सामाजिक सुरक्षा के विकेंद्रीकरण का उदाहरण बताया। गौरतलब है कि इस प्रकार की महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाएँ हाल के विधानसभा चुनावों में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा रही हैं।

औद्योगिक संबंधों पर भारतीय दृष्टिकोण

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के ढाँचे और भारतीय परंपराओं के बीच संतुलन पर बोलते हुए मांडविया ने कहा, 'जब हम औद्योगिक संबंधों की बात करते हैं... तो एक तरफ आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीके और अंतरराष्ट्रीय ढाँचे होते हैं, और दूसरी तरफ भारत की अपनी परंपराएँ और संबंध; तो मुझे यह थोड़ा अलग लगता है।' उन्होंने जोर दिया कि भारत के औद्योगिक संबंधों के दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय मानकों और देश के अपने सामाजिक-आर्थिक संदर्भ, दोनों का समन्वय आवश्यक है।

श्रम संहिताओं और सेस फंड पर पूर्व निर्देश

मंत्री ने बताया कि सितंबर की शुरुआत में उन्होंने राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे कि वे सेस फंड के मौजूदा उपयोग का विस्तृत आकलन करें और श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए इसके प्रभावी इस्तेमाल के नए तरीके खोजें। इसके साथ ही राज्यों से कहा गया था कि वे श्रम संहिताओं के लागू होने के एक वर्ष बाद उनके प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन करें और जहाँ आवश्यक हो, बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

आगे की दिशा

मांडविया के इस संबोधन से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ईएसआईसी के दायरे को और विस्तृत करने तथा श्रम सुधारों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में सक्रिय है। श्रम संहिताओं के मूल्यांकन और सेस फंड के पुनर्गठन पर राज्यों की प्रतिक्रिया आने वाले महीनों में इस नीतिगत दिशा को और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ईएसआईसी की 25 करोड़ की कवरेज और वास्तविक सेवा गुणवत्ता के बीच की खाई पर चर्चा ज़रूरी है — सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढाँचे की कमी और लंबी प्रतीक्षा सूचियाँ एक स्थायी समस्या रही हैं। श्रम संहिताओं की समीक्षा का निर्देश स्वागत योग्य है, परंतु यह तीसरी बार है जब राज्यों से ऐसा आकलन माँगा गया है — पिछले मूल्यांकनों के नतीजे सार्वजनिक नहीं हुए। सामाजिक सुरक्षा का विस्तार और श्रम बाज़ार की औपचारिकता साथ-साथ नहीं चल रही, और यही वह अंतर्विरोध है जिसे नीति-निर्माताओं को सबसे पहले संबोधित करना होगा।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईएसआईसी क्या है और यह 25 करोड़ लोगों को कैसे कवर करता है?
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) एक केंद्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्था है जो संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य, मातृत्व, विकलांगता और अन्य लाभ प्रदान करती है। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, इसके ज़रिए अब 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है।
सरकार किसानों को कितनी राशि और कितने समय पर देती है?
सरकार 10 करोड़ किसानों को प्रत्येक चार महीने पर सीधे उनके बैंक खातों में ₹2,000 की किस्त हस्तांतरित करती है। यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से होता है।
कौन से राज्य महिलाओं को मासिक नकद सहायता दे रहे हैं?
मंत्री मांडविया के अनुसार, देश के 10 राज्य महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह ₹1,200, ₹1,500 या ₹2,000 तक की राशि जमा कर रहे हैं। हालाँकि उन्होंने सम्मेलन में राज्यों के नाम विशेष रूप से नहीं गिनाए।
श्रम संहिताओं की समीक्षा क्यों माँगी गई है?
मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे श्रम संहिताओं के लागू होने के एक वर्ष बाद उनके प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन करें और जहाँ बेहतर क्रियान्वयन की ज़रूरत हो, वहाँ सुधार करें। इसका उद्देश्य श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण को सुनिश्चित करना है।
सीआईआई-ईएफआई सम्मेलन में मांडविया ने औद्योगिक संबंधों पर क्या कहा?
मांडविया ने कहा कि भारत के औद्योगिक संबंधों के दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों और भारत की अपनी सामाजिक-आर्थिक परंपराओं, दोनों का संतुलन आवश्यक है। उन्होंने इसे वैश्विक ढाँचे से थोड़ा अलग बताया।
राष्ट्र प्रेस
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