भारत में डेटा सेंटर विस्तार: 2030 तक क्षमता चार गुना, बिजली-साइबर-पानी के जोखिम भी बढ़े
सारांश
मुख्य बातें
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की तेज़ी से बढ़ती माँग ने देश के डेटा सेंटर उद्योग को विस्तार की एक नई रफ्तार दे दी है — लेकिन इसके साथ ही बिजली आपूर्ति, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे से जुड़े जोखिम भी गहरे होते जा रहे हैं। बीमा ब्रोकरेज कंपनी एऑन (Aon) की 6 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक चार गुना से अधिक बढ़ सकती है और कई परियोजनाओं पर पहले से ही काम जारी है।
बिजली: सबसे बड़ी रुकावट
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बिजली की उपलब्धता अब डेटा सेंटर के स्थान-चयन और परियोजना की गति तय करने वाला सबसे अहम कारक बन चुकी है। AI से जुड़े वर्कलोड के कारण ऊर्जा खपत लगातार बढ़ रही है, जिससे मौजूदा बिजली बुनियादी ढाँचे पर असाधारण दबाव पड़ रहा है। एऑन ने अपने शोध के हवाले से बताया कि वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटरों की बिजली माँग 2030 तक 165 प्रतिशत बढ़ सकती है।
एऑन इंडिया में कमर्शियल रिस्क सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्टर सुशांत सरिन ने कहा कि ग्रिड से जुड़ी बाधाओं और कनेक्शन में देरी से निपटने के लिए डेवलपर्स ऑन-साइट बिजली उत्पादन, बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड ऊर्जा प्रणालियों जैसे वैकल्पिक समाधानों की ओर तेज़ी से रुख कर रहे हैं। हालाँकि सरिन ने यह भी रेखांकित किया कि ये उपाय परिचालन, रखरखाव और अग्नि जोखिम जैसी नई चुनौतियाँ भी लेकर आते हैं।
पानी और जलवायु: उभरती चुनौती
AI-संचालित विकास ने डेटा सेंटरों की कूलिंग आवश्यकताओं को भी बढ़ा दिया है, जिससे पानी की माँग में तेज़ इज़ाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पानी की कमी वाले क्षेत्रों में यह एक गंभीर परिचालन बाधा बन रही है और साइट-चयन को पहले से कहीं अधिक जटिल बना रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई बड़े औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही जल-संकट से जूझ रहे हैं।
साइबर खतरे: भौतिक और डिजिटल जोखिम का संगम
एऑन ने चेताया कि आधुनिक डेटा सेंटर आपस में जुड़े कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स और थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर तेज़ी से निर्भर होते जा रहे हैं। इस परस्पर जुड़ाव के कारण एक सफल साइबर हमला न केवल डेटा को खतरे में डालता है, बल्कि संपत्ति को नुकसान पहुँचा सकता है और लंबे समय तक व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप कर सकता है। गौरतलब है कि भारत वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक साइबर हमलों का सामना करने वाले देशों में लगातार शामिल रहा है।
बीमा उद्योग की बढ़ती सक्रियता
एऑन के अनुसार, बीमा कंपनियाँ अब डेटा सेंटर जोखिमों के आकलन के लिए लाइफसाइकिल आधारित दृष्टिकोण अपना रही हैं — डिज़ाइन और निर्माण से लेकर दीर्घकालिक संचालन तक हर चरण का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस बढ़ती माँग को रेखांकित करते हुए एऑन ने बताया कि उसके डेटा सेंटर लाइफसाइकिल इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत बीमा क्षमता 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर 5 अरब डॉलर हो गई है।
आगे की राह
एऑन ने ज़ोर दिया कि भारत के बढ़ते डिजिटल और AI लक्ष्यों में डेटा सेंटर की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए बिजली, पानी, जलवायु और साइबर जोखिम — सभी का एकीकृत मूल्यांकन अनिवार्य हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो डेवलपर्स इन बहुआयामी जोखिमों की समग्र योजना पहले बनाएंगे, वे ही इस तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में टिकाऊ स्थान बना सकेंगे।