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भारत में डेटा सेंटर विस्तार: 2030 तक क्षमता चार गुना, बिजली-साइबर-पानी के जोखिम भी बढ़े

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भारत में डेटा सेंटर विस्तार: 2030 तक क्षमता चार गुना, बिजली-साइबर-पानी के जोखिम भी बढ़े

सारांश

भारत का डेटा सेंटर उद्योग 2030 तक चार गुना फैलने की राह पर है — लेकिन एऑन की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि बिजली की कमी, पानी का संकट और साइबर हमलों का खतरा इस डिजिटल छलांग की सबसे बड़ी अड़चन बन सकते हैं।

मुख्य बातें

बीमा कंपनी एऑन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक चार गुना से अधिक बढ़ सकती है।
वैश्विक डेटा सेंटर बिजली माँग 2030 तक 165% बढ़ने का अनुमान; भारत में ग्रिड बाधाएँ बड़ी चुनौती।
डेवलपर्स ऑन-साइट जनरेशन , बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन इनके साथ नए परिचालन जोखिम भी हैं।
पानी की कमी वाले क्षेत्रों में कूलिंग की बढ़ती ज़रूरत साइट-चयन को जटिल बना रही है।
साइबर हमलों से संपत्ति और दीर्घकालिक व्यावसायिक संचालन दोनों खतरे में; थर्ड-पार्टी वेंडर निर्भरता जोखिम बढ़ा रही है।
एऑन का डेटा सेंटर लाइफसाइकिल इंश्योरेंस कवर $3.5 अरब से बढ़कर $5 अरब हुआ।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की तेज़ी से बढ़ती माँग ने देश के डेटा सेंटर उद्योग को विस्तार की एक नई रफ्तार दे दी है — लेकिन इसके साथ ही बिजली आपूर्ति, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे से जुड़े जोखिम भी गहरे होते जा रहे हैं। बीमा ब्रोकरेज कंपनी एऑन (Aon) की 6 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक चार गुना से अधिक बढ़ सकती है और कई परियोजनाओं पर पहले से ही काम जारी है।

बिजली: सबसे बड़ी रुकावट

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बिजली की उपलब्धता अब डेटा सेंटर के स्थान-चयन और परियोजना की गति तय करने वाला सबसे अहम कारक बन चुकी है। AI से जुड़े वर्कलोड के कारण ऊर्जा खपत लगातार बढ़ रही है, जिससे मौजूदा बिजली बुनियादी ढाँचे पर असाधारण दबाव पड़ रहा है। एऑन ने अपने शोध के हवाले से बताया कि वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटरों की बिजली माँग 2030 तक 165 प्रतिशत बढ़ सकती है।

एऑन इंडिया में कमर्शियल रिस्क सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्टर सुशांत सरिन ने कहा कि ग्रिड से जुड़ी बाधाओं और कनेक्शन में देरी से निपटने के लिए डेवलपर्स ऑन-साइट बिजली उत्पादन, बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड ऊर्जा प्रणालियों जैसे वैकल्पिक समाधानों की ओर तेज़ी से रुख कर रहे हैं। हालाँकि सरिन ने यह भी रेखांकित किया कि ये उपाय परिचालन, रखरखाव और अग्नि जोखिम जैसी नई चुनौतियाँ भी लेकर आते हैं।

पानी और जलवायु: उभरती चुनौती

AI-संचालित विकास ने डेटा सेंटरों की कूलिंग आवश्यकताओं को भी बढ़ा दिया है, जिससे पानी की माँग में तेज़ इज़ाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पानी की कमी वाले क्षेत्रों में यह एक गंभीर परिचालन बाधा बन रही है और साइट-चयन को पहले से कहीं अधिक जटिल बना रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई बड़े औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही जल-संकट से जूझ रहे हैं।

साइबर खतरे: भौतिक और डिजिटल जोखिम का संगम

एऑन ने चेताया कि आधुनिक डेटा सेंटर आपस में जुड़े कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स और थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर तेज़ी से निर्भर होते जा रहे हैं। इस परस्पर जुड़ाव के कारण एक सफल साइबर हमला न केवल डेटा को खतरे में डालता है, बल्कि संपत्ति को नुकसान पहुँचा सकता है और लंबे समय तक व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप कर सकता है। गौरतलब है कि भारत वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक साइबर हमलों का सामना करने वाले देशों में लगातार शामिल रहा है।

बीमा उद्योग की बढ़ती सक्रियता

एऑन के अनुसार, बीमा कंपनियाँ अब डेटा सेंटर जोखिमों के आकलन के लिए लाइफसाइकिल आधारित दृष्टिकोण अपना रही हैं — डिज़ाइन और निर्माण से लेकर दीर्घकालिक संचालन तक हर चरण का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस बढ़ती माँग को रेखांकित करते हुए एऑन ने बताया कि उसके डेटा सेंटर लाइफसाइकिल इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत बीमा क्षमता 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर 5 अरब डॉलर हो गई है।

आगे की राह

एऑन ने ज़ोर दिया कि भारत के बढ़ते डिजिटल और AI लक्ष्यों में डेटा सेंटर की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए बिजली, पानी, जलवायु और साइबर जोखिम — सभी का एकीकृत मूल्यांकन अनिवार्य हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो डेवलपर्स इन बहुआयामी जोखिमों की समग्र योजना पहले बनाएंगे, वे ही इस तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में टिकाऊ स्थान बना सकेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एऑन की रिपोर्ट एक असुविधाजनक सच्चाई सामने रखती है — बुनियादी ढाँचे की तैयारी उस गति से नहीं चल रही जिस गति से निवेश आ रहा है। बिजली ग्रिड की सीमाएँ, जल-संकट और साइबर भेद्यता — ये तीनों मिलकर एक ऐसी 'ट्रिपल रिस्क' स्थिति बना रहे हैं जिसकी कोई केंद्रीय नियामकीय निगरानी अभी तक स्पष्ट नहीं है। बीमा कंपनियों का कवर $5 अरब तक पहुँचना बाज़ार की परिपक्वता का संकेत है, लेकिन यह भी दर्शाता है कि जोखिम उद्योग खुद कितना ऊँचा आँक रहा है — और नीति-निर्माताओं को इसे केवल 'बाज़ार की चिंता' मानकर नहीं छोड़ना चाहिए।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक कितनी बढ़ेगी?
एऑन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक चार गुना से अधिक बढ़ सकती है। AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती माँग इस विस्तार की मुख्य वजह है।
डेटा सेंटर विस्तार से बिजली का जोखिम क्यों बढ़ रहा है?
AI वर्कलोड के कारण ऊर्जा खपत तेज़ी से बढ़ रही है और मौजूदा बिजली ग्रिड पर असामान्य दबाव पड़ रहा है। एऑन के शोध के अनुसार वैश्विक डेटा सेंटर बिजली माँग 2030 तक 165% बढ़ सकती है, जिससे भारत जैसे देशों में ग्रिड बाधाएँ और कनेक्शन देरी गंभीर समस्या बन सकती है।
डेटा सेंटरों पर साइबर हमलों का खतरा कितना बड़ा है?
आधुनिक डेटा सेंटर कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स और थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर हैं, जिससे साइबर हमला होने पर संपत्ति को नुकसान और लंबे समय तक कारोबारी व्यवधान का जोखिम है। एऑन ने इसे भौतिक और डिजिटल जोखिम के संगम के रूप में वर्णित किया है।
डेटा सेंटर के लिए पानी की कमी क्यों एक बड़ी चिंता है?
AI-संचालित सर्वर को ठंडा रखने के लिए अधिक पानी की ज़रूरत होती है। पानी की कमी वाले क्षेत्रों में यह आवश्यकता डेटा सेंटर के लिए साइट-चयन को जटिल बनाती है और परिचालन जोखिम बढ़ाती है।
एऑन का डेटा सेंटर लाइफसाइकिल इंश्योरेंस प्रोग्राम क्या है?
यह एऑन का वह बीमा कार्यक्रम है जो डेटा सेंटर के डिज़ाइन, निर्माण और दीर्घकालिक संचालन तक सभी चरणों के जोखिमों को कवर करता है। बढ़ती माँग के साथ इसकी बीमा क्षमता $3.5 अरब से बढ़कर $5 अरब हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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