भारत के डेटा सेंटर पाइपलाइन से 2030 तक 4.33 लाख नौकरियाँ, 19.5 करोड़ वर्गफुट आवासीय माँग: स्क्वायर यार्ड्स रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में प्रस्तावित 9,030 मेगावाट क्षमता की डेटा सेंटर परियोजनाएँ वर्ष 2030 तक 4.33 लाख प्रत्यक्ष और परोक्ष रोज़गार अवसर सृजित कर सकती हैं — यह अनुमान रियल एस्टेट परामर्श कंपनी स्क्वायर यार्ड्स की 3 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट में लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं के कारण आवासीय क्षेत्र में 19.5 करोड़ वर्गफुट की अतिरिक्त माँग भी उत्पन्न होने की संभावना है, जो रियल एस्टेट और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में एक नई लहर का संकेत देती है।
भारत की डिजिटल क्षमता और मौजूदा खाई
रिपोर्ट में एक महत्त्वपूर्ण विरोधाभास उजागर किया गया है: भारत वर्तमान में दुनिया के कुल डिजिटल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन करता है, जबकि वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में उसकी हिस्सेदारी मात्र 4 प्रतिशत है। यह असंतुलन दर्शाता है कि देश में डेटा सेंटर अवसंरचना के विस्तार की अपार संभावनाएँ अभी तक अनछुई हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और एंटरप्राइज़ डिजिटाइज़ेशन में तेज़ी से बढ़ते निवेश के चलते देश की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है। रिपोर्ट के अनुसार, यही वृद्धि अवसंरचना-आधारित रियल एस्टेट विकास की नई लहर को जन्म देगी।
गोल्डन रिंग: डेटा सेंटर के आसपास का विकास क्षेत्र
रिपोर्ट में बड़े डेटा सेंटर परिसरों के 5 से 15 किलोमीटर के दायरे को 'गोल्डन रिंग' की संज्ञा दी गई है। इस क्षेत्र में सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं के उन्नयन के साथ-साथ मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाएँ, आवासीय टाउनशिप, खुदरा बाज़ार, सामाजिक सुविधाएँ और नागरिक सेवाएँ तेज़ी से विकसित होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा सेंटर केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं रहते — वे अपने आसपास बिजली आपूर्ति नेटवर्क, फाइबर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और व्यावसायिक सेवाओं के विकास को भी आकर्षित करते हैं। समय के साथ ये क्षेत्र नए शहरी आर्थिक केंद्रों का रूप ले लेते हैं।
राज्यवार लाभ: महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र को सर्वाधिक लाभ मिलने का अनुमान है, जहाँ डेटा सेंटर निवेश के कारण 5.4 करोड़ वर्गफुट से अधिक आवासीय माँग उत्पन्न हो सकती है। इसके बाद कर्नाटक में लगभग 2.8 करोड़ वर्गफुट, आंध्र प्रदेश में 2.3 करोड़ वर्गफुट से अधिक, उत्तर प्रदेश में करीब 2.27 करोड़ वर्गफुट, तेलंगाना में 2.16 करोड़ वर्गफुट और तमिलनाडु में लगभग 1.94 करोड़ वर्गफुट आवासीय माँग उत्पन्न होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
स्क्वायर यार्ड्स के सह-संस्थापक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी विवेक अग्रवाल ने कहा कि पिछले कई दशकों में भारत के रियल एस्टेट विकास को राजमार्गों, औद्योगिक गलियारों, हवाई अड्डों और सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों ने गति दी है। उनके अनुसार, 'अब डेटा सेंटर इस विकास यात्रा का अगला महत्त्वपूर्ण चरण बनने जा रहे हैं।'
अग्रवाल ने यह भी कहा कि बिजली, फाइबर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना में होने वाला निवेश उद्योगों, डेवलपर्स और संस्थागत निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है, जिसका सीधा असर उभरते डिजिटल गलियारों के आसपास आवासीय और वाणिज्यिक विकास के रूप में दिखाई देता है।
आगे क्या होगा
रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे डेटा सेंटरों के इर्द-गिर्द सहायक आर्थिक तंत्र परिपक्व होंगे, प्रत्यक्ष कर्मचारियों के अलावा संबद्ध क्षेत्रों में भी रोज़गार बढ़ेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार डिजिटल अवसंरचना को प्राथमिकता दे रही है और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियाँ भारत में अपनी उपस्थिति तेज़ी से बढ़ा रही हैं। आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर भारत के शहरी विस्तार की दिशा तय करने वाले महत्त्वपूर्ण अवसंरचनात्मक केंद्र बन सकते हैं।