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क्या जुलाई में एफपीआई ने 17,741 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, व्यापार तनाव कम होने पर क्या बदलेगा रुख?

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क्या जुलाई में एफपीआई ने 17,741 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, व्यापार तनाव कम होने पर क्या बदलेगा रुख?

सारांश

जुलाई में एफपीआई ने 17,741 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है। क्या वैश्विक व्यापार तनाव कम होने पर एफपीआई का प्रवाह फिर से बढ़ेगा? जानें इस रिपोर्ट में।

मुख्य बातें

जुलाई में एफपीआई की शुद्ध बिकवाली 17,741 करोड़ रुपए रही।
वैश्विक व्यापार तनाव के कम होने पर एफपीआई का प्रवाह बढ़ सकता है।
प्राइमरी मार्केट में एफपीआई का निवेश 36,235 करोड़ रुपए तक पहुंचा।
आईटी और फार्मा सेक्टर में बिकवाली का असर देखा गया।
मार्केट सेंटीमेंट पर अमेरिकी नीतियों का प्रभाव पड़ा है।

नई दिल्ली, 3 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध बिकवाली के साथ, विश्लेषकों ने रविवार को कहा कि वैश्विक व्यापार तनाव कम होने के बाद एफपीआई का निरंतर प्रवाह जारी रहने की संभावना है।

एनएसडीएल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने एफपीआई ने कुल 17,741 करोड़ रुपए की निकासी की, जो कि अप्रैल, मई और जून के लगातार तीन महीनों के निवेश के बाद एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

मई में 2025 में अब तक का सबसे अधिक एफपीआई निवेश देखा गया, जबकि जनवरी में 78,027 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली के साथ सबसे बड़ी बिकवाली हुई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "जुलाई में एफपीआई ने एक्सचेंजों के माध्यम से 31,988 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इस बिकवाली के साथ 2025 तक कुल बिक्री का आंकड़ा 13,1876 करोड़ रुपए हो गया है। हालांकि, प्राइमरी मार्केट के माध्यम से इक्विटी खरीदने की एफपीआई की रणनीति जुलाई में भी जारी रही और मासिक खरीद का आंकड़ा 14,247 करोड़ रुपए रहा।"

2025 में अब तक प्राइमरी मार्केट के जरिए एफपीआई का कुल निवेश 36,235 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

विजयकुमार ने कहा कि यह एक स्थिर रुझान है जो उचित मूल्यांकन के लिए एफपीआई की प्राथमिकता को दर्शाता है।

पिछले हफ्ते, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस को यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए 10-12 दिन की समयसीमा दी थी।

ऐसा न करने पर रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध और द्वितीयक शुल्क लग सकते हैं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि इस कदम ने अल्पावधि में मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।

विजयकुमार ने आगे कहा, "डॉलर सूचकांक में 100 तक की तीव्र वृद्धि एक प्रतिकूल स्थिति है, जिसका निकट भविष्य में एफपीआई प्रवाह पर असर पड़ सकता है। बाजार की धारणा यह है कि शुरुआती उथल-पुथल के बाद, अगले दौर की बातचीत के बाद भारत और अमेरिका के बीच एक समझौता हो जाएगा। स्थिति सामान्य होने के बाद एफपीआई प्रवाह में एक स्थिर रुझान देखने को मिलेगा।"

उन्होंने आगे कहा, "सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में एफपीआई की बिकवाली ने आईटी सूचकांक को नीचे ला दिया और फार्मास्यूटिकल्स से जुड़ी अनिश्चितता ने भी फार्मा सूचकांक को प्रभावित किया, जबकि इस क्षेत्र की कई कंपनियों के नतीजे अच्छे रहे।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि एफपीआई का प्रवाह भारतीय आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण है। बाजार की स्थिरता और निवेशकों का विश्वास इस प्रवाह पर निर्भर करता है। हम सभी को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफपीआई ने जुलाई में कितने करोड़ रुपए के शेयर बेचे?
एफपीआई ने जुलाई में 17,741 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
क्या व्यापार तनाव कम होने पर एफपीआई का प्रवाह बढ़ सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि व्यापार तनाव कम होने पर एफपीआई का प्रवाह जारी रहेगा।
अप्रैल से जून के बीच एफपीआई का क्या रुख था?
अप्रैल से जून के बीच एफपीआई ने लगातार निवेश किया था।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विशेषज्ञ का क्या कहना है?
वीके विजयकुमार ने कहा कि जुलाई में भी एफपीआई की खरीदारी जारी रही है।
क्या डॉलर सूचकांक का एफपीआई पर असर पड़ेगा?
डॉलर सूचकांक में वृद्धि एफपीआई प्रवाह पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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