'भारत लौट आओ, देश को तुम्हारी तकनीकी प्रतिभा चाहिए', जोहो के वेम्बु का अमेरिकी भारतीयों से आह्वान
सारांश
Key Takeaways
- श्रीधर वेम्बु, जोहो के सह-संस्थापक, ने 27 अप्रैल 2026 को अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भारत लौटने का आह्वान किया।
- वेम्बु ने कहा कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय केवल 'दर्शक की भूमिका' में हैं और उन्हें 'कट्टर दक्षिणपंथी' और 'जागरूक वामपंथी' के बीच चुनाव करना पड़ता है।
- H-1B वीज़ा कार्यक्रम को लेकर रिपब्लिकन सांसदों का एक समूह तीन वर्षों के लिए निलंबन की माँग कर रहा है।
- वेम्बु ने तर्क दिया कि भारत की समृद्धि, सुरक्षा और विश्व में सम्मान पूरी तरह देश की तकनीकी क्षमता पर निर्भर करता है।
- उन्होंने भारत की 'विशाल युवा आबादी' को तकनीकी नेतृत्व प्रदान करने के लिए विदेश में रहने वाले प्रतिभाशाली पेशेवरों की वापसी पर जोर दिया।
नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026। क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनी जोहो के मुख्य वैज्ञानिक और सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने सोमवार को अमेरिका में बसे भारतीय पेशेवरों से देश लौटने की सार्वजनिक अपील की, यह तर्क देते हुए कि भारत की तकनीकी शक्ति और सभ्यतागत प्रभाव उनकी वापसी पर निर्भर करता है। एक्स पर पोस्ट किए गए खुले पत्र में वेम्बु ने अपने 37 वर्ष पहले अमेरिका जाने के अनुभव को साझा किया और कहा कि हालांकि अमेरिका ने उन्हें और भारतीय पेशेवरों को सफलता दी है, लेकिन वर्तमान राजनीतिक माहौल भारतीय-अमेरिकियों के लिए अनिश्चित हो गया है।
अमेरिकी राजनीति में भारतीयों की स्थिति पर चिंता
वेम्बु ने लिखा कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय केवल 'दर्शक की भूमिका' में हैं और उन्हें 'कट्टर दक्षिणपंथी' और 'जागरूक वामपंथी' के बीच चुनाव करने का विकल्प दिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि दोनों ही विचारधाराएँ भारतीय सभ्यता के प्रति संशय रखती हैं और भारतीयों के सम्मान की कोई गारंटी नहीं देतीं। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने H-1B वीज़ा कार्यक्रम को तीन वर्षों के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा है, यह दावा करते हुए कि इसका दुरुपयोग करके विदेशी श्रमिकों को कम वेतन पर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह दी जा रही है।
भारत की तकनीकी क्षमता का विकास जरूरी
वेम्बु ने जोर दिया कि भारत की समृद्धि, सुरक्षा और विश्व में सम्मान पूरी तरह देश की तकनीकी क्षमता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत गरीब रहता है, तो 'वोक लेफ्ट' दया के साथ नैतिक उपदेश देगा जबकि 'हार्ड राइट' तिरस्कार के साथ — दोनों ही परिस्थितियों में भारत को सम्मान नहीं मिलेगा। यह विश्लेषण दर्शाता है कि वेम्बु भारत की आर्थिक और तकनीकी स्वावलंबिता को भारतीयों के वैश्विक सम्मान का आधार मानते हैं।
भारतीय शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत की भूमिका
अपने व्यक्तिगत उदाहरण से, वेम्बु ने कहा कि जब वे 37 वर्ष पहले अमेरिका गए तो उनके पास कोई आर्थिक संसाधन नहीं था, लेकिन भारत से मिली अच्छी शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत थी। उन्होंने इसे अपनी सफलता की नींव बताया और तर्क दिया कि भारत को अपनी युवा आबादी को तकनीकी नेतृत्व प्रदान करने के लिए इसी तरह के प्रतिभाशाली पेशेवरों की आवश्यकता है।
भारत माता को तकनीकी नेतृत्व की अपेक्षा
वेम्बु ने भारत की 'विशाल युवा आबादी' को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाने के लिए उस तकनीकी नेतृत्व की जरूरत है, जिसे विदेश में रहने वाले भारतीयों ने हासिल किया है। उन्होंने इसे 'मिशनरी उत्साह' के साथ पूरा करने का आह्वान किया। यह वक्तव्य भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसी पहलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहाँ सरकार तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभा को केंद्रीय मानती है।
H-1B विवाद की पृष्ठभूमि
वेम्बु की अपील अमेरिकी राजनीति में H-1B वीज़ा कार्यक्रम के बढ़ते विरोध के बीच आई है। रिपब्लिकन सांसदों का एक समूह इस कार्यक्रम को तीन वर्षों के लिए निलंबित करने की माँग कर रहा है, यह दावा करते हुए कि इसका दुरुपयोग करके अमेरिकी कर्मचारियों को कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों से विस्थापित किया जा रहा है। यह विवाद भारतीय IT पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना और भी जटिल बना रहा है, जो परंपरागत रूप से इस वीज़ा कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी रहे हैं।
भारतीय प्रतिभा का विश्व प्रभाव
वेम्बु के वक्तव्य का एक व्यापक निहितार्थ यह है कि भारतीय तकनीकी पेशेवरों की वापसी भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत कर सकती है। यह न केवल IT और स्टार्टअप क्षेत्र में बल्कि भारत की 'सॉफ्ट पावर' और सभ्यतागत आत्मविश्वास को भी बढ़ा सकता है। जोहो जैसी कंपनियाँ, जो भारत में स्थापित होकर विश्व स्तर पर सफल हुई हैं, वेम्बु के तर्क का जीवंत उदाहरण हैं।