क्या वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने में कई महीने लगेंगे, भारत की तेल कंपनियों को फायदा मिल सकता है?
सारांश
Key Takeaways
- वेनेजुएला के पास सबसे बड़ा तेल भंडार है।
- तेल उत्पादन में कमी के मुख्य कारण हैं तकनीकी और राजनीतिक बाधाएं।
- भारत की तेल कंपनियों को संभावित लाभ मिल सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता की कमी हो सकती है।
- बढ़ते करों का तेल कंपनियों पर प्रभाव पड़ सकता है।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, लेकिन इसके बावजूद वहां तेल उत्पादन बहुत ही कम है। इसकी मुख्य जिम्मेदारियां तकनीकी ज्ञान की कमी, न्यून निवेश, राजनीतिक हस्तक्षेप, खराब प्रबंधन, भ्रष्टाचार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं। सोमवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इन समस्याओं के कारण वेनेजुएला अपने तेल भंडार का उचित उपयोग नहीं कर पा रहा है।
नए साल की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया।
पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो वर्ष 2013 में राष्ट्रपति बने और तब से अधिकांश निर्णय अधिनियमों के माध्यम से लेते रहे हैं। हालिया घटनाक्रम के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कुछ समय के लिए अस्थिरता संभव है।
पीएल कैपिटल के अनुसंधान विश्लेषक स्वर्णेंदु भूषण ने कहा कि वेनेजुएला के पास सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो लगभग 303.8 अरब बैरल (2020) है। इसके बाद सऊदी अरब का स्थान है, जिसके पास लगभग 297.5 अरब बैरल तेल है।
इसके बाद कनाडा, ईरान और इराक के पास क्रमशः 168.1 अरब बैरल, 157.8 अरब बैरल और 145 अरब बैरल तेल हैं, जो वेनेजुएला और सऊदी अरब से काफी कम हैं।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो दुनिया में सबसे अधिक तेल खपत करने वाला देश अमेरिका है, जिसके पास केवल 68.8 अरब बैरल का तेल भंडार है, जो बहुत ही कम है।
इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद, वेनेजुएला का तेल उत्पादन निराशाजनक है। नवंबर 2025 में वेनेजुएला में प्रतिदिन केवल 10 लाख बैरल तेल का उत्पादन हुआ, जबकि अमेरिका में रोजाना लगभग 1 करोड़ 37 लाख बैरल और सऊदी अरब में 97 लाख बैरल तेल का उत्पादन हुआ।
भूषण ने कहा कि वर्तमान में वेनेजुएला का उत्पादन, एक दशक पहले के उत्पादन का केवल एक-तिहाई रह गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1970 में वेनेजुएला दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल था। उस समय वहां प्रतिदिन 37 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता था, जो उस समय अमेरिका के 117 लाख बैरल प्रति दिन और तत्कालीन सोवियत संघ के 71 लाख बैरल प्रति दिन से पीछे था, लेकिन उस समय भी सऊदी अरब के 39 लाख बैरल प्रति दिन के बाद वेनेजुएला का अहम स्थान था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा कोई जादुई तरीका नहीं है जिससे वेनेजुएला का तेल उत्पादन अचानक बढ़ जाए। उत्पादन में सुधार के प्रारंभिक संकेत दिखने में भी कम से कम तीन से छह महीने लग सकते हैं।
कम समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकता है। रूस और चीन की प्रतिक्रिया के आधार पर तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी संभावित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल होने के कारण मौजूदा हालात में भारत की तेल खोज और उत्पादन करने वाली कंपनियों ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को फायदा हो सकता है। वहीं, तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को कम तेल कीमतों के कारण अपनी कमाई बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि हाल ही में सिगरेट पर कर बढ़ाए जाने के बाद पेट्रोल और डीजल पर भी कर बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो तेल कंपनियों को इसका बोझ उठाना पड़ सकता है। इसलिए वर्तमान स्थिति में निवेश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।