रात में चमकने वाले रहस्यमय 'नॉक्टिलुसेंट क्लाउड': सूरज डूबने के बाद भी रोशनी बिखेरते हैं

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रात में चमकने वाले रहस्यमय 'नॉक्टिलुसेंट क्लाउड': सूरज डूबने के बाद भी रोशनी बिखेरते हैं

सारांश

क्या आपने कभी रात में चमकते बादलों को देखा है? जानिए नॉक्टिलुसेंट क्लाउड के रहस्य और उनकी अद्भुत चमक के बारे में।

Key Takeaways

  • नॉक्टिलुसेंट क्लाउड
  • ये बादल गर्मियों में विशेष रूप से दिखाई देते हैं।
  • इनका निर्माण 50 से 86 किलोमीटर की ऊँचाई पर होता है।
  • नासा ने इनका अध्ययन 2007 में शुरू किया।
  • बढ़ते मीथेन उत्सर्जन से इनकी चमक बढ़ रही है।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। विज्ञान की दुनिया में अनगिनत रहस्यों की भरमार है, जो हमारी जिज्ञासा को बढ़ाते हैं और कभी-कभी हमें चौंका देते हैं। इनमें से एक विशेष रहस्य है नॉक्टिलुसेंट क्लाउड, जिसे हम 'रात में चमकने वाले बादल' के नाम से भी जानते हैं। ये बादल सामान्य बादलों से बिलकुल भिन्न होते हैं और रात के अंधकार में भी प्रकाश फैलाते दिखाई देते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा इन बादलों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।

नॉक्टिलुसेंट क्लाउड ऊपरी वायुमंडल में बर्फ के छोटे क्रिस्टल से निर्मित होते हैं और सूरज के अस्त होने के बाद भी रोशनी को परावर्तित करके चमक उत्पन्न करते हैं। ये वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत में उत्पन्न होने वाली एक अद्वितीय और रहस्यमयी घटना है। इनका निर्माण लगभग 50 से 86 किलोमीटर (30 से 54 मील) की ऊँचाई पर मेसोस्फीयर में होता है, जो पृथ्वी की सतह से काफी दूर है। इनका नाम लैटिन शब्द "नॉक्टिलुसेंट" से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'रात में चमकना'।

नासा के अनुसार, ये बादल बहुत छोटे बर्फ के क्रिस्टल या पानी के वाष्प से बनते हैं। ये क्रिस्टल सूर्य की रोशनी को परावर्तित करते हैं, जिससे ये सूर्यास्त के बाद भी चमकते रहते हैं। दिन के समय, ये बेहद धुंधले होते हैं और दिखाई नहीं देते, परंतु शाम के समय, जब नीचे का वायुमंडल अंधकार में होता है लेकिन ऊपरी परत अभी भी सूर्य की रोशनी में होती है, तब ये इंद्रधनुषी नीले-चांदी के रंग में चमकते हैं। ये मुख्यतः गर्मियों के महीनों में उच्च अक्षांश पर उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों के निकट देखे जाते हैं।

ये बादल लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बने हुए थे। नासा के एरोनॉमी ऑफ आइस न दी मेसोस्फीयर (एआईएम) मिशन ने 2007 में इनका पहला अध्ययन आरंभ किया। एआईएम दुनिया का पहला सैटेलाइट था, जिसे विशेष रूप से इन बादलों के अध्ययन के लिए डिजाइन किया गया था। 11 जून 2007 को, एआईएम ने उत्तरी गोलार्ध में इन बादलों का पहला समग्र दृश्य कैप्चर किया, जिसमें लगभग 5 किलोमीटर का रिज़ॉल्यूशन था।

एआईएम के प्रारंभिक अवलोकनों से यह पता चला कि ये बादल प्रतिदिन दिखाई देते हैं, दूर-दूर तक फैले होते हैं, और हर घंटे से लेकर दिन तक बदलते रहते हैं। उनकी चमक 3 किलोमीटर के स्केल पर बदलती है। वैज्ञानिकों को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि मेसोस्फीयर में बर्फ की एक निरंतर परत 82 से 89 किलोमीटर की ऊँचाई पर फैली होती है।

साल 2007 के अंत तक एआईएम ने उत्तरी गोलार्ध में इन बादलों के पूरे जीवन चक्र को रिकॉर्ड किया - ये लगभग 25 मई से शुरू होकर अगस्त के अंत तक मौजूद रहते हैं। पिछले दो दशकों में, ये बादल और अधिक चमकीले हो गए हैं और कम अक्षांश, यानी निचले लैटिट्यूड पर भी देखे जाने लगे हैं।

हाल के अध्ययनों से यह भी सामने आया है कि बढ़ते मीथेन उत्सर्जन से मेसोस्फीयर में अतिरिक्त जल वाष्प उत्पन्न होता है, जो इन बादलों को और मजबूत बनाता है।

Point of View

हम विज्ञान की इस अद्वितीय घटना को प्रस्तुत करते हैं, जो न केवल हमारे ज्ञान को बढ़ाती है बल्कि हमें प्रकृति के अद्भुत चमत्कारों के प्रति जागरूक भी करती है। नॉक्टिलुसेंट क्लाउड एक ऐसा विषय है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरणीय परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
NationPress
27/02/2026

Frequently Asked Questions

नॉक्टिलुसेंट क्लाउड क्या हैं?
ये बादल ऊपरी वायुमंडल में बर्फ के क्रिस्टल से बनते हैं और रात में चमकते हैं।
ये बादल कब दिखाई देते हैं?
ये मुख्यतः गर्मियों में, विशेषकर मई से अगस्त तक दिखाई देते हैं।
इन बादलों का अध्ययन किसने किया है?
नासा के एरोनॉमी ऑफ आइस न दी मेसोस्फीयर (एआईएम) मिशन ने इनका अध्ययन किया।
ये बादल किस ऊँचाई पर बनते हैं?
ये बादल लगभग 50 से 86 किलोमीटर की ऊँचाई पर मेसोस्फीयर में बनते हैं।
ये बादल कैसे चमकते हैं?
ये बर्फ के क्रिस्टल सूर्य की रोशनी को परावर्तित करके चमकते हैं।
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