NASA के SPHEREx मिशन ने खींची 'मॉलिक्यूलर क्लाउड' की अनोखी तस्वीर, ब्रह्मांड में बर्फ के रहस्य से उठा पर्दा

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NASA के SPHEREx मिशन ने खींची 'मॉलिक्यूलर क्लाउड' की अनोखी तस्वीर, ब्रह्मांड में बर्फ के रहस्य से उठा पर्दा

सारांश

नासा के SPHEREx मिशन ने मिल्की वे के सबसे सक्रिय तारा-निर्माण क्षेत्र साइग्नस एक्स की तस्वीर जारी की है, जिसमें पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की बर्फ दिखाई दे रही है। यह खोज न सिर्फ तारों के जन्म, बल्कि पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

नासा ने 7 मई 2026 को SPHEREx मिशन द्वारा ली गई साइग्नस एक्स क्षेत्र की तस्वीर जारी की।
तस्वीर में पानी , कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की बर्फ स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
मॉलिक्यूलर क्लाउड ब्रह्मांड की सबसे ठंडी जगहों में से हैं, जहाँ गुरुत्वाकर्षण से पदार्थ सिकुड़कर नए तारे बनाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मांड का अधिकांश पानी इन्हीं बर्फीले भंडारों में बनता और जमा होता है।
SPHEREx मिशन इंटरस्टेलर बर्फ का रासायनिक विश्लेषण कर जीवन की उत्पत्ति के सुराग तलाश रहा है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 7 मई 2026 को एक अत्यंत दिलचस्प तस्वीर साझा करते हुए एक बड़ा सवाल उठाया — क्या ब्रह्मांड में हर बादल की एक बर्फीली परत होती है? यह बादल हमारे वायुमंडल के साधारण बादल नहीं, बल्कि मिल्की वे गैलेक्सी में फैले विशाल मॉलिक्यूलर क्लाउड हैं — गैस और धूल के वे विराट भंडार जहाँ नए तारों का जन्म होता है। नासा का SPHEREx मिशन इन्हीं रहस्यमय बादलों के भीतर जमी बर्फ का विस्तृत रासायनिक नक्शा तैयार कर रहा है।

मॉलिक्यूलर क्लाउड क्या होते हैं

मॉलिक्यूलर क्लाउड गैस और धूल के विशाल क्षेत्र होते हैं, जो मिल्की वे गैलेक्सी में सर्वत्र फैले हुए हैं। इन बादलों में गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से पदार्थ धीरे-धीरे सिकुड़ता है और अंततः नए तारों का निर्माण होता है। ये ब्रह्मांड की सबसे ठंडी जगहों में गिने जाते हैं, जहाँ तापमान अत्यंत न्यून स्तर तक पहुँच जाता है। यही परिस्थितियाँ इन्हें तारों की 'नर्सरी' बनाती हैं।

साइग्नस एक्स क्षेत्र की ऐतिहासिक तस्वीर

नासा द्वारा जारी यह तस्वीर साइग्नस एक्स (Cygnus X) क्षेत्र की है, जो मिल्की वे गैलेक्सी में तारों के जन्म का सबसे सक्रिय और उथल-पुथल भरा इलाका माना जाता है। तस्वीर में चमकीले नीले रंग में पानी की बर्फ स्पष्ट दिखाई दे रही है, जबकि नारंगी और नीले रंग के महीन धागे जैसे निशान इस क्षेत्र की जटिल संरचना को उजागर करते हैं। नासा के अनुसार, इन बादलों में पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ-साथ बर्फ भी पाई जाती है, जो धूल के सूक्ष्म कणों की सतह पर जम जाती है।

SPHEREx मिशन की भूमिका

नासा का SPHEREx (Spectro-Photometer for the History of the Universe, Epoch of Reionization and Ices Explorer) मिशन इन मॉलिक्यूलर क्लाउड के भीतर मौजूद इंटरस्टेलर बर्फ के विभिन्न प्रकारों का विस्तृत रासायनिक विश्लेषण कर रहा है। यह मिशन यह समझने में सहायक होगा कि तारे किस प्रकार बनते हैं और जीवन के लिए आवश्यक तत्व ब्रह्मांड में कहाँ और कैसे उत्पन्न होते हैं। गौरतलब है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड का अधिकांश पानी इन्हीं बर्फीले भंडारों में बनता और संचित होता है।

जीवन की उत्पत्ति से संबंध

यह शोध केवल तारों के जन्म तक सीमित नहीं है — इसका सीधा संबंध पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति से भी जोड़ा जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये बर्फीले मॉलिक्यूलर क्लाउड जीवन की उत्पत्ति की रसायन विज्ञान (Chemistry of Life) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैज्ञानिक समुदाय यह जानने की कोशिश में जुटा है कि पृथ्वी पर पानी और जीवन के अन्य आवश्यक तत्व ब्रह्मांड के किस कोने से आए। SPHEREx मिशन इस दिशा में निर्णायक सुराग दे सकता है।

आगे की राह

नासा का यह मिशन मॉलिक्यूलर क्लाउड की रासायनिक संरचना को पहले से कहीं अधिक गहराई से समझने में सक्षम बनाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि SPHEREx के डेटा से न केवल तारों के निर्माण की प्रक्रिया स्पष्ट होगी, बल्कि यह भी पता चलेगा कि ब्रह्मांड में जीवन के लिए आवश्यक अणु किस प्रकार तैयार होते हैं और ग्रहों तक पहुँचते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बड़े सवाल की ओर इशारा है जो सदियों से मानवता को उलझाए हुए है — पृथ्वी पर पानी और जीवन कहाँ से आया? मुख्यधारा की कवरेज अक्सर 'अनोखी तस्वीर' तक सिमट जाती है, जबकि असली महत्व यह है कि SPHEREx पहली बार इंटरस्टेलर बर्फ का व्यापक रासायनिक मानचित्र तैयार कर रहा है — जो भविष्य के एक्सोप्लैनेट शोध की नींव बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरिक्ष में जीवन की संभावना पर वैश्विक वैज्ञानिक बहस तेज हो रही है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मॉलिक्यूलर क्लाउड क्या होते हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मॉलिक्यूलर क्लाउड गैस और धूल के विशाल क्षेत्र हैं जो मिल्की वे गैलेक्सी में फैले हैं। इनमें गुरुत्वाकर्षण के कारण पदार्थ सिकुड़कर नए तारों का निर्माण करता है और ये जीवन की उत्पत्ति की रसायन विज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
नासा के SPHEREx मिशन का उद्देश्य क्या है?
SPHEREx मिशन मॉलिक्यूलर क्लाउड के भीतर मौजूद इंटरस्टेलर बर्फ के विभिन्न प्रकारों का रासायनिक विश्लेषण कर रहा है। इसका लक्ष्य यह समझना है कि तारे कैसे बनते हैं और जीवन के लिए आवश्यक तत्व ब्रह्मांड में कहाँ और कैसे उत्पन्न होते हैं।
साइग्नस एक्स क्षेत्र क्या है और यह तस्वीर क्यों खास है?
साइग्नस एक्स मिल्की वे गैलेक्सी में तारों के जन्म का सबसे सक्रिय क्षेत्र है। नासा द्वारा जारी इस तस्वीर में पानी की बर्फ नीले रंग में और धूल के धागे नारंगी रंग में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, जो इस क्षेत्र की जटिल संरचना को उजागर करते हैं।
मॉलिक्यूलर क्लाउड में किस प्रकार की बर्फ पाई जाती है?
नासा के अनुसार, इन बादलों में पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की बर्फ पाई जाती है। यह बर्फ धूल के सूक्ष्म कणों की सतह पर जमती है और वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड का अधिकांश पानी इन्हीं भंडारों में बनता है।
इस खोज का पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति से क्या संबंध है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, ये बर्फीले मॉलिक्यूलर क्लाउड जीवन की उत्पत्ति की रसायन विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। SPHEREx मिशन यह पता लगाने में मदद करेगा कि पृथ्वी पर पानी और जीवन के अन्य आवश्यक तत्व ब्रह्मांड के किस हिस्से से आए।
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