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एआईएफएफ ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 को सर्वसम्मति से अपनाया, कोलकाता बैठक में बड़े फैसले

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एआईएफएफ ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 को सर्वसम्मति से अपनाया, कोलकाता बैठक में बड़े फैसले

सारांश

एआईएफएफ ने कोलकाता में सर्वसम्मति से नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 को अपनाया — भारतीय फुटबॉल प्रशासन में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम। साथ ही मास्टर राइट्स एग्रीमेंट पर बातचीत का अधिकार कार्यकारी समिति को सौंपा गया।

मुख्य बातें

एआईएफएफ ने 23 मई 2026 को कोलकाता में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 (एनएसजीए) को सर्वसम्मति से अपनाया।
बैठक में कार्यकारी समिति के 19 और सदस्य राज्य संघों के 32 प्रतिनिधियों के साथ फीफा व एएफसी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
संविधान का मसौदा सदस्य संघों के साथ साझा किया जाएगा; अंतिम राय देने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित।
मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) के लिए दो फर्मों की बोलियाँ प्राप्त; आगे की बातचीत का अधिकार कार्यकारी समिति को सौंपा गया।
एनएसजीए सभी खेल संघों में शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर केंद्रित है।

ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने 23 मई 2026 को कोलकाता में आयोजित स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग (एसजीबीएम) में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 (एनएसजीए) को सर्वसम्मति से अपनाने की मंजूरी दे दी। यह फैसला भारतीय फुटबॉल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

इस अहम बैठक में कार्यकारी समिति के 19 सदस्य और सदस्य राज्य संघों के 32 प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा, फीफा और एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (एएफसी) के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जो इस बैठक के अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है। एआईएफएफ के आधिकारिक बयान में कहा गया, 'जनरल बॉडी ने सर्वसम्मति से एआईएफएफ द्वारा एनएसजीए को अपनाने की मंजूरी दे दी।'

एनएसजीए का महत्व और भारतीय फुटबॉल पर असर

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 राष्ट्रीय खेल ढाँचे के अंतर्गत सभी खेल संघों में शासन संरचना को सुदृढ़ करने, पारदर्शिता बढ़ाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। गौरतलब है कि एआईएफएफ को वर्ष 2022 में फीफा द्वारा तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। ऐसे में यह कदम संस्था की शासन-संबंधी साख को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

संवैधानिक सुधारों पर चर्चा

बैठक में एआईएफएफ के सदस्य संघों के लिए संवैधानिक सुधारों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। फेडरेशन के अनुसार, संविधान का मसौदा सभी सदस्य संघों के साथ साझा किया जाएगा, जिन्हें अपनी अंतिम राय देने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। यह प्रक्रिया संस्था के भीतर समावेशी निर्णय-प्रक्रिया को बढ़ावा देने की कोशिश है।

मास्टर राइट्स एग्रीमेंट पर बड़ा निर्णय

शासन सुधारों के साथ-साथ बैठक में मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) के व्यावसायिक पहलुओं पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। एमआरए भारतीय फुटबॉल के मीडिया अधिकारों, प्रायोजन और मार्केटिंग समझौतों को परिभाषित करता है — यानी यह फेडरेशन की व्यावसायिक रीढ़ है। बैठक में यह जानकारी दी गई कि एमआरए के लिए दो फर्मों ने अपनी बोलियाँ प्रस्तुत की हैं। जनरल बॉडी ने सर्वसम्मति से एमआरए पर आगे बातचीत और विचार-विमर्श का अधिकार कार्यकारी समिति को सौंप दिया।

आगे क्या होगा

सदस्य संघों को संविधान के मसौदे पर 15 दिनों के भीतर अपनी प्रतिक्रिया देनी होगी। एमआरए पर कार्यकारी समिति की बातचीत के बाद अंतिम निर्णय अपेक्षित है। भारतीय फुटबॉल के प्रशंसकों और हितधारकों की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि ये सुधार मैदान पर और प्रशासनिक स्तर पर किस तरह के बदलाव लाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — 2022 के फीफा निलंबन के बाद संस्था की विश्वसनीयता अभी पूरी तरह बहाल नहीं हुई है। मास्टर राइट्स एग्रीमेंट पर दो बोलियाँ मिलना उत्साहजनक है, लेकिन इसका विवरण सार्वजनिक न होना पारदर्शिता के दावों पर सवाल उठाता है। संवैधानिक सुधारों पर सदस्य संघों को महज 15 दिन देना, एक जटिल प्रक्रिया के लिए बेहद कम समय है। भारतीय फुटबॉल को वास्तविक सुधार तभी मिलेगा जब ये घोषणाएँ मैदानी स्तर पर ठोस बदलाव में तब्दील हों।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 क्या है?
नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 (एनएसजीए) भारत का वह कानूनी ढाँचा है जो सभी राष्ट्रीय खेल संघों में शासन संरचना, पारदर्शिता और जवाबदेही को मानकीकृत करता है। एआईएफएफ ने 23 मई 2026 को कोलकाता में इसे सर्वसम्मति से अपनाया।
एआईएफएफ की इस बैठक में और क्या फैसले हुए?
बैठक में संवैधानिक सुधारों पर चर्चा हुई और सदस्य संघों को मसौदे पर 15 दिनों में राय देने को कहा गया। इसके अलावा मास्टर राइट्स एग्रीमेंट पर दो फर्मों की बोलियाँ मिलने की जानकारी दी गई और आगे की बातचीत का अधिकार कार्यकारी समिति को सौंपा गया।
मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) भारतीय फुटबॉल के लिए क्यों अहम है?
एमआरए भारतीय फुटबॉल के मीडिया अधिकारों, प्रायोजन और मार्केटिंग समझौतों को परिभाषित और नियंत्रित करता है। यह फेडरेशन के राजस्व का प्रमुख स्रोत है, इसलिए इस पर लिया गया फैसला भारतीय फुटबॉल के व्यावसायिक भविष्य को सीधे प्रभावित करेगा।
एआईएफएफ के संवैधानिक सुधारों की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी?
एआईएफएफ संविधान का मसौदा सभी सदस्य संघों के साथ साझा करेगा, जिन्हें अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम संविधान तैयार किया जाएगा।
फीफा और एएफसी के प्रतिनिधि इस बैठक में क्यों शामिल हुए?
फीफा और एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (एएफसी) के प्रतिनिधियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्थाएँ भारतीय फुटबॉल प्रशासन के सुधारों पर नज़दीकी नज़र रख रही हैं। 2022 के निलंबन के बाद यह निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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