क्या अमित पंघाल अपने भाई के विश्वास को सफलता में बदलने वाले मुक्केबाज हैं?

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क्या अमित पंघाल अपने भाई के विश्वास को सफलता में बदलने वाले मुक्केबाज हैं?

सारांश

अमित पंघाल, एक प्रेरणादायक मुक्केबाज, जिन्होंने अपने भाई के त्याग को सफलताओं में बदला। जानें उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में।

मुख्य बातें

अमित पंघाल ने अपने भाई के समर्थन से मुक्केबाजी में सफलता हासिल की।
उन्होंने 2018 के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
अमित का करियर 2010 में शुरू हुआ।
वे भारतीय सेना में सूबेदार हैं।
अमित पंघाल युवा मुक्केबाजों के लिए प्रेरणा हैं।

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत में मुक्केबाजी एक पेशेवर खेल के रूप में तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रहा है। भारतीय मुक्केबाज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार देश का नाम रोशन कर रहे हैं। अमित पंघाल एक ऐसे मुक्केबाज हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई बार देश को मुक्केबाजी में पदक दिलाए हैं।

अमित पंघाल का जन्म 16 अक्टूबर 1995 को हरियाणा के रोहतक जिले के मैना गांव में हुआ। उनके पिता विजेंद्र सिंह पंघाल खेती से जुड़े हुए हैं, वहीं बड़े भाई अजय पंघाल भारतीय सेना में हवलदार हैं। अजय खुद भी मुक्केबाज थे, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण उन्होंने इस क्षेत्र को छोड़ दिया। हालांकि, उन्होंने अपने छोटे भाई अमित को मुक्केबाजी में सफलता पाने के लिए प्रेरित किया। अमित ने अपने भाई के त्याग को व्यर्थ नहीं होने दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

12 वर्ष की आयु में, अमित ने 2007 में सर छोटू राम बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया। उनका करियर 2010 में चमका जब उन्होंने महाराष्ट्र में सब-जूनियर नेशनल्स में स्वर्ण पदक जीता। 2017 में सीनियर स्तर पर डेब्यू करते हुए, अमित ने नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। उसी वर्ष, उन्होंने ताशकंद में एशियन एमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियनशिप (49 किग्रा वर्ग) में कांस्य पदक प्राप्त किया। विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टरफाइनल में उन्हें उज्बेकिस्तान के हसनबॉय दुसमतोव से हार का सामना करना पड़ा।

अमित के लिए 2018 का साल बेहद महत्वपूर्ण रहा। जकार्ता एशियन गेम्स में लाइट फ्लाईवेट (49 किग्रा) में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल में अमित ने हसनबॉय दुसमतोव को हराया। अमित कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में गोल्ड, 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर, और 2019 में बैंकॉक एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुके हैं। वर्तमान में भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत अमित ने मुक्केबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

मुक्केबाजी में करियर बनाने की इच्छा रखने वालों के लिए अमित पंघाल एक बड़ी प्रेरणा हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय खेलों में उठती नई उम्मीदों का प्रतीक भी है। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें न केवल पदक दिलाए हैं, बल्कि देश को गर्व करने का भी अवसर प्रदान किया है। वर्तमान में, यह आवश्यक है कि हम युवा खिलाड़ियों को समर्थन दें और उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका दें।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित पंघाल ने कितने पदक जीते हैं?
अमित पंघाल ने एशियन गेम्स में स्वर्ण, कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण और रजत, और एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीते हैं।
अमित का जन्म कब हुआ था?
अमित पंघाल का जन्म 16 अक्टूबर 1995 को हरियाणा के रोहतक जिले के मैना गांव में हुआ।
अमित के भाई का नाम क्या है?
अमित के बड़े भाई का नाम अजय पंघाल है, जो भारतीय सेना में हवलदार हैं।
अमित ने कब मुक्केबाजी शुरू की?
अमित ने 12 वर्ष की आयु में 2007 में सर छोटू राम बॉक्सिंग अकादमी में मुक्केबाजी का प्रशिक्षण शुरू किया।
अमित पंघाल किस पद पर कार्यरत हैं?
अमित पंघाल वर्तमान में भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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