जन्मदिन विशेष: अनिल कुंबले को 37 साल की उम्र में मिली थी कप्तानी, गांगुली को वरीयता देने का था मलाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के महान लेग स्पिनर अनिल कुंबले आज 17 अक्टूबर 2026 को 56 वर्ष के हो गए। बेंगलुरु में 17 अक्टूबर 1970 को जन्मे कुंबले को 2007 में 37 साल की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी सौंपी गई थी — करियर के अंतिम पड़ाव पर मिली यह जिम्मेदारी उनके लिए सुखद तो थी, लेकिन देर से मिलने का मलाल भी साथ लेकर आई थी।
देर से मिली कप्तानी का मलाल
2008 में संन्यास के बाद दिए एक साक्षात्कार में कुंबले ने उस दौर को याद किया था जब सीनियर होने के बावजूद उनकी जगह सौरव गांगुली को भारतीय टीम की कमान दी गई थी। कुंबले ने स्पष्ट शब्दों में कहा था, "उस समय मैं थोड़ा निराश था, क्योंकि मैं गांगुली का सीनियर था। लेकिन, ऐसी चीजों पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता।"
उन्होंने यह भी जोड़ा था कि उस दौरान वे बॉलिंग शोल्डर में चोट के कारण करीब एक साल तक खेल से बाहर थे, जिसका असर उनकी दावेदारी पर पड़ा। उनके अनुसार, "सौरव ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। उसने दिखाया कि उसमें दम है।"
गांगुली की नेतृत्व क्षमता की तारीफ
निराशा के बावजूद कुंबले ने बाद में सौरव गांगुली की कप्तानी की खुलकर प्रशंसा की। गांगुली की अगुवाई में बनी भारतीय टीम के गेंदबाजी आक्रमण में कुंबले केंद्रीय भूमिका में रहे और उन्होंने इस साझेदारी को अपने करियर का अहम हिस्सा माना। यह ऐसे समय की बात है जब भारतीय टीम विदेशी मैदानों पर जीत का सिलसिला शुरू कर रही थी और गांगुली का आक्रामक नेतृत्व टीम की पहचान बन चुका था।
कप्तान के रूप में कुंबले का रिकॉर्ड
कुंबले ने कुल 14 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की। इस दौरान टीम ने 3 मैच जीते, 5 में हार का सामना किया और 6 मैच ड्रॉ रहे। 2008 में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया — कप्तान बनने के ठीक एक साल बाद।
करियर की अविस्मरणीय उपलब्धियाँ
दाएं हाथ के लेग स्पिनर के रूप में कुंबले ने 1990 से 2008 के बीच 132 टेस्ट मैचों में 619 विकेट और 271 वनडे में 337 विकेट लिए। उनके नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कुल 953 विकेट दर्ज हैं। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में वे मुरलीधरन, शेन वॉर्न और जेम्स एंडरसन के बाद चौथे सबसे सफल गेंदबाज हैं। गौरतलब है कि 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में कुंबले ने एक पारी में सभी 10 विकेट लेकर इतिहास रचा था — यह कारनामा टेस्ट इतिहास में केवल दो गेंदबाजों ने किया है।
क्रिकेट मैदान से परे कुंबले भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच भी रह चुके हैं। उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। फिलहाल वे कमेंट्री, कोचिंग और क्रिकेट से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय हैं। भारतीय क्रिकेट के इस महान योद्धा का सफर युवा खिलाड़ियों के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।