अनिल कुंबले ने बताया: 13 साल की उम्र में 'चकिंग' के आरोप ने बदल दी करियर की दिशा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के महानतम गेंदबाजों में शुमार और पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने हाल ही में एक कार्यक्रम में खुलासा किया कि उनके करियर की नींव दरअसल एक विवाद से पड़ी थी — जब उन पर तेज गेंदबाजी के दौरान कोहनी मोड़ने यानी 'चकिंग' का आरोप लगाया गया था। उस एक घटना ने 13-14 साल की उम्र में कुंबले को तेज गेंदबाजी से लेग स्पिन की राह पर मोड़ दिया — और क्रिकेट इतिहास हमेशा के लिए बदल गया।
चकिंग के आरोप ने बदली राह
कुंबले ने बताया कि स्कूल और क्लब क्रिकेट के दिनों में वह मुख्यतः एक तेज गेंदबाज हुआ करते थे। एक दिन उनके क्लब के एक सीनियर खिलाड़ी ने उनके कोच से उन्हें गेंदबाजी करने से रोकने को कहा। कुंबले के शब्दों में, 'मेरे क्लब के एक सीनियर खिलाड़ी ने मेरे कोच से मुझे गेंदबाजी करने से रोकने के लिए कहा क्योंकि उन्हें लगा कि मैं अपनी कोहनी मोड़ रहा हूं। सच कहूं तो मुझे पता भी नहीं चला कि मैं अपनी कोहनी मोड़ रहा हूं। मैं अपने तरीके से गेंदबाजी कर रहा था। मैं उस समय लगभग 13-14 साल का था और शायद उतना मजबूत नहीं था। मुझ पर चक (थ्रो) गेंदबाजी करने का आरोप था।'
भाई की सलाह और लेग स्पिन की शुरुआत
कुंबले ने बताया कि कर्नाटक अंडर-15 ट्रायल्स से पहले वह किसी नए विकल्प की तलाश में थे। उन्होंने इस बारे में अपने भाई से सलाह ली, जिन्होंने स्पिन गेंदबाजी अपनाने की राय दी। उस वक्त कुंबले को लेग स्पिन की तकनीक की कोई विशेष जानकारी नहीं थी। उन्होंने दिग्गज स्पिनर बी. एस. चंद्रशेखर का नाम सुना था, लेकिन टेलीविजन की पहुँच सीमित होने के कारण उन्हें गेंदबाजी करते नहीं देख पाए थे।
बिना कोचिंग के सीखी लेग स्पिन
कुंबले ने स्वीकार किया कि उन्होंने लेग स्पिन में बेहद कम तकनीकी समझ और बिना किसी औपचारिक कोचिंग के कदम रखा। उन्होंने कहा, 'मैंने पहली बार असली क्रिकेट गेंद उठाई थी, तो ऑफ-स्पिन ग्रिप से गेंदबाजी की थी। इसलिए, जब मुझे लेग-स्पिन गेंदबाजी करने के लिए कहा गया, तो मैंने बस अपनी ऑफ-स्पिन ग्रिप का इस्तेमाल किया और गेंद को टर्न करने की कोशिश की।' उनके पास कोई कोच नहीं था जो सही ग्रिप या रिलीज़ सिखाता। इसके बावजूद, एक-दो महीने की मेहनत के बाद कर्नाटक अंडर-15 ट्रायल्स में उनका चयन हो गया।
करियर के आँकड़े जो इतिहास में दर्ज हैं
अनिल कुंबले ने 20 साल की उम्र में 1990 में भारतीय टीम के लिए टेस्ट और वनडे दोनों में डेब्यू किया। 2008 तक चले अपने करियर में उन्होंने 132 टेस्ट मैचों में 619 विकेट और 271 वनडे मैचों में 337 विकेट लिए। वह भारत की ओर से सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में कुंबले मुरलीधरन, शेन वॉर्न और जेम्स एंडरसन के बाद चौथे स्थान पर हैं। उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी भी की।
एक संयोग जिसने क्रिकेट को बदला
यह विचार करना दिलचस्प है कि यदि उस सीनियर खिलाड़ी ने आपत्ति न जताई होती, तो शायद भारत को अपना सबसे सफल स्पिनर नहीं मिलता। कुंबले की यह कहानी उन युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में अपना रास्ता खुद बनाते हैं।