एशियन गेम्स 2026: हरिता भद्रा ने 200 मीटर में जीता ब्रॉन्ज, अनिमेष कुजूर पुरुष फाइनल में 5वें
सारांश
मुख्य बातें
हरिता भद्रा ने 27 सितंबर 2026 को नागोया में एशियन गेम्स आइची-नागोया 2026 की महिलाओं की 200 मीटर दौड़ में 23.20 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल जीता और भारत की झोली में एक और पदक डाला। वहीं, पुरुषों की 200 मीटर फाइनल में अनिमेष कुजूर 20.80 सेकंड के साथ पाँचवें स्थान पर रहे और पोडियम से चूक गए।
महिला 200 मीटर: हरिता का ऐतिहासिक पदक
सिंगापुर की वेरोनिका शांति परेरा ने 22.78 सेकंड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि चीन की चेन युजी 22.93 सेकंड के साथ सिल्वर पर रहीं। महाराष्ट्र की हरिता ने तीसरे स्थान पर रहते हुए एशियन गेम्स की महिला 200 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाली छठी भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया। हरिता की साथी उन्नति अयप्पा बोलैंड उसी फाइनल में 23.46 सेकंड के साथ छठे स्थान पर रहीं।
गौरतलब है कि एशियन गेम्स में महिलाओं की 200 मीटर दौड़ में भारत का पिछला पदक 2018 में आया था, जब दुती चंद ने ब्रॉन्ज जीता था। 23 वर्षीया हरिता इस इंतज़ार को खत्म करने वाली खिलाड़ी बनीं। उन्होंने इन गेम्स से पहले 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 23.14 सेकंड के पर्सनल बेस्ट के साथ राष्ट्रीय खिताब भी जीता था।
पुरुष 200 मीटर: थाईलैंड के बूनसन का एशियन रिकॉर्ड बराबर
थाईलैंड के पुरीपोल बूनसन ने 19.88 सेकंड में रेस पूरी कर एशियन रिकॉर्ड की बराबरी की और 100 मीटर के बाद 200 मीटर में भी गोल्ड जीतकर डबल स्प्रिंट खिताब अपने नाम किया। हीट्स में शानदार प्रदर्शन कर फाइनल तक पहुँचे अनिमेष कुजूर आखिरी रेस में वह रफ्तार नहीं दिखा पाए जो पोडियम के लिए ज़रूरी थी।
यह ऐसे समय में आया है जब अनिमेष पहले इसी एशियन गेम्स में 100 मीटर के सेमीफाइनल तक भी पहुँचे थे, जो भारतीय पुरुष स्प्रिंट में उभरती प्रतिभा का संकेत देता है।
भारत की मेडल टैली में स्थिति
इस पदक के साथ भारत अब 33 पदकों — 4 गोल्ड, 14 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज — के साथ समग्र मेडल टैली में 12वें स्थान पर है। हरिता का यह ब्रॉन्ज भारत के लिए एथलेटिक्स में गर्व का क्षण है, और आने वाले राष्ट्रमंडल तथा ओलंपिक चक्र के लिए उम्मीदें जगाता है।
आगे का रास्ता
एशियन गेम्स आइची-नागोया 2026 के शेष दिनों में भारत के अन्य एथलीट अभी भी मैदान में हैं। हरिता भद्रा का यह प्रदर्शन न केवल उनके करियर का मील का पत्थर है, बल्कि भारतीय महिला स्प्रिंट की बढ़ती ताकत का प्रमाण भी है।