एशियन गेम्स 2026: नितेश सिवाच ने 97 किग्रा ग्रीको-रोमन में जीता सिल्वर, 1962 के बाद पहले भारतीय फाइनलिस्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पहलवान नितेश सिवाच ने एशियन गेम्स 2026 में 1 अक्टूबर को नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में पुरुषों के 97 किग्रा ग्रीको-रोमन कुश्ती के फाइनल में सिल्वर मेडल हासिल किया। जापान के यूरी नकाजातो ने उन्हें 4-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
ऐतिहासिक उपलब्धि
नितेश का यह सिल्वर मेडल महज एक पदक नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। वह 1962 के बाद एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन कुश्ती के फाइनल में पहुँचने वाले पहले भारतीय पहलवान बने। गौरतलब है कि इसी वेट कैटेगरी में मारुति माने ने 1962 के एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था — यानी छह दशकों से अधिक के अंतराल के बाद भारत इस स्तर पर लौटा है।
फाइनल मुकाबले का घटनाक्रम
फाइनल में जापानी पहलवान नकाजातो शुरुआत से ही आक्रामक मुद्रा में थे। पहले राउंड में नितेश को पैसिविटी पेनाल्टी मिली, जिससे नकाजातो ने 2 अंक अर्जित कर बढ़त बना ली। नितेश ने कड़ा प्रतिरोध दिखाया और अंतर बढ़ने से रोका, लेकिन आक्रामक लय नहीं बना पाए।
ब्रेक के समय 0-2 से पीछे चल रहे नितेश को दूसरे राउंड में बड़ी वापसी की दरकार थी। नकाजातो ने मुकाबले की गति पर नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने नितेश को पटखनी देकर स्कोर 4-0 कर दिया और कुछ देर पिन करने की भी कोशिश की — नितेश ने उसे नाकाम किया, लेकिन वापसी के लिए समय नहीं बचा और अंततः जापानी पहलवान ने गोल्ड मेडल जीता।
नॉकआउट चरण में नितेश का प्रदर्शन
फाइनल से पहले नितेश का अभियान बेहद प्रभावशाली रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने तुर्कमेनिस्तान के अमनबेर्डी अगामामेदोव को 7-1 से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में मंगोलिया के गनबातारिन गनखुयाग के खिलाफ 9-0 की एकतरफा जीत दर्ज की — जो टूर्नामेंट में उनका सबसे दमदार प्रदर्शन रहा।
भारतीय कुश्ती के लिए व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करती रही है। फ्री-स्टाइल और महिला वर्ग में तो भारत ने कई बड़े पदक जीते हैं, किंतु ग्रीको-रोमन श्रेणी में एशियन स्तर पर फाइनल में पहुँचना ही दुर्लभ रहा है। नितेश की यह उपलब्धि इस वर्ग में नई उम्मीद जगाती है।
आगे की राह
नितेश का यह प्रदर्शन भविष्य के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों — विशेषकर विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक क्वालीफायर — के लिए उनकी दावेदारी को मज़बूत करता है। भारतीय कुश्ती संघ के लिए यह संकेत है कि ग्रीको-रोमन वर्ग में लक्षित निवेश और प्रशिक्षण से विश्व स्तर पर भी सफलता संभव है।