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बोधना शिवानंदन: 11 साल में वुमन ग्रैंडमास्टर बनने वाली सबसे युवा खिलाड़ी, समरकंद में रचा इतिहास

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बोधना शिवानंदन: 11 साल में वुमन ग्रैंडमास्टर बनने वाली सबसे युवा खिलाड़ी, समरकंद में रचा इतिहास

सारांश

11 साल की बोधना शिवानंदन ने समरकंद के शतरंज ओलंपियाड में वह कर दिखाया जो दशकों से कोई नहीं कर पाया था — WGM खिताब के लिए उम्र की सीमा फिर से लिखी। कोविड लॉकडाउन में एक उपहार में मिले शतरंज बोर्ड से शुरू हुई यह यात्रा अब इतिहास बन चुकी है।

मुख्य बातें

बोधना शिवानंदन ने 11 साल की उम्र में वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) खिताब हासिल कर इतिहास रचा।
46वें चेस ओलंपियाड में समरकंद, उज्बेकिस्तान में उन्होंने अपना तीसरा और अंतिम WGM नॉर्म हासिल किया।
बोधना ने 8.0/11 का स्कोर बनाया और बोर्ड 1 पर टूर्नामेंट की 13वीं सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहीं।
उन्होंने रूस की कैटरीना लैग्नो और चीन की होउ यिफान का 12 साल की उम्र में WGM बनने का रिकॉर्ड तोड़ा।
बोधना की शतरंज यात्रा कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान एक उपहार में मिले शतरंज बोर्ड से शुरू हुई थी।
9 साल की उम्र में वह शतरंज ओलंपियाड 2024 में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी थीं।

भारतीय मूल की 11 वर्षीय बोधना शिवानंदन ने शतरंज की दुनिया में वह कर दिखाया जो आज से पहले किसी ने नहीं किया। उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 46वें चेस ओलंपियाड में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करते हुए बोधना ने अपना तीसरा और अंतिम वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) नॉर्म हासिल किया, और इसी के साथ वह इतिहास में WGM खिताब पाने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं। शतरंज जगत में यह उपलब्धि एक युगांतकारी क्षण के रूप में दर्ज हो गई है।

प्रतियोगिता में प्रदर्शन

बोधना ने 46वें चेस ओलंपियाड में इंग्लैंड की महिला टीम के लिए बोर्ड 1 पर खेलते हुए टीम की अगुवाई की। उन्होंने 11 में से 8.0 अंक हासिल किए, जिसमें 6 जीत शामिल हैं। इस प्रदर्शन की बदौलत इंग्लैंड की महिला टीम महिला वर्ग में 15वें स्थान पर रही। बोर्ड 1 पर खेलने वाली सभी खिलाड़ियों में बोधना 13वीं सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहीं — यह प्रदर्शन उनकी उम्र को देखते हुए और भी विलक्षण है।

टूटा पुराना रिकॉर्ड

इससे पहले सबसे युवा वुमन ग्रैंडमास्टर का रिकॉर्ड रूस की कैटरीना लैग्नो के नाम था, जिन्होंने 12 साल की उम्र में यह खिताब जीता था। चीन की पूर्व विश्व चैंपियन होउ यिफान ने भी 12 साल की उम्र में यही उपलब्धि हासिल की थी। बोधना ने इन दोनों दिग्गजों के रिकॉर्ड को एक साल पहले ही तोड़ दिया।

कोविड लॉकडाउन से शुरू हुई शतरंज यात्रा

बोधना की शतरंज की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितनी उनकी उपलब्धियाँ। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उनके पिता के एक मित्र ने भारत लौटते समय कुछ सामान बोधना के परिवार को दिया, जिसमें एक शतरंज बोर्ड भी था। उसी बोर्ड ने बोधना के मन में इस खेल के प्रति जिज्ञासा जगाई और उन्होंने खुद ही दांव-पेंच सीखने शुरू कर दिए। यह उन असाधारण प्रतिभाओं की कहानी है जो बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के स्वयं को तराशती हैं।

उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त

2022 की यूरोपियन स्कूल्स चैंपियनशिप में बोधना ने सभी 24 मुकाबले जीतकर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया था। उसके एक साल बाद वह किसी ग्रैंडमास्टर के खिलाफ हार न मानने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनीं। 9 साल की उम्र में उन्हें शतरंज ओलंपियाड 2024 के लिए इंग्लैंड की टीम में चुना गया था, जिससे वह किसी भी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई थीं। इसके अलावा, उत्तर-पश्चिम लंदन में रहने वाली बोधना यूके ओपन महिला ब्लिट्ज़ चैंपियन हैं और उन्होंने ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियनशिप का खिताब भी साझा किया है।

आगे क्या

बोधना शिवानंदन की यह उपलब्धि न केवल भारतीय मूल के परिवारों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि यह शतरंज की नई पीढ़ी के उभार का संकेत भी है। शतरंज विशेषज्ञों का मानना है कि WGM नॉर्म के बाद अब बोधना का अगला लक्ष्य पूर्ण ग्रैंडमास्टर (GM) खिताब की दिशा में आगे बढ़ना हो सकता है, जो उन्हें शतरंज इतिहास में और भी ऊँचे स्थान पर स्थापित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अवसरों से जन्म लेते देखती है। कोविड लॉकडाउन के दौरान एक शतरंज बोर्ड से सीखना शुरू करने वाली एक बच्ची का 11 साल में WGM बनना यह बताता है कि भारतीय मूल की प्रतिभा को अक्सर भारत के बाहर जाकर खुद को साबित करना पड़ता है। यह भी उल्लेखनीय है कि बोधना इंग्लैंड की टीम से खेलती हैं, न कि भारत की — यह तथ्य भारत की घरेलू शतरंज पहचान और युवा प्रतिभा को रोकने की क्षमता, दोनों पर सोचने पर मजबूर करता है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोधना शिवानंदन कौन हैं और उन्होंने क्या उपलब्धि हासिल की?
बोधना शिवानंदन भारतीय मूल की 11 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी हैं जो उत्तर-पश्चिम लंदन में रहती हैं। उन्होंने समरकंद में 46वें चेस ओलंपियाड में अपना तीसरा WGM नॉर्म हासिल करते हुए इतिहास की सबसे युवा वुमन ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड बनाया।
बोधना ने किसका रिकॉर्ड तोड़ा?
बोधना ने रूस की कैटरीना लैग्नो और चीन की पूर्व विश्व चैंपियन होउ यिफान का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 12 साल की उम्र में WGM खिताब जीता था। बोधना ने यह खिताब 11 साल की उम्र में हासिल करके एक साल पहले ही इतिहास रच दिया।
बोधना शिवानंदन ने शतरंज कैसे सीखा?
बोधना ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शतरंज सीखना शुरू किया। उनके पिता के एक मित्र ने भारत लौटते समय परिवार को कुछ सामान दिया, जिसमें एक शतरंज बोर्ड था। उसी बोर्ड से बोधना ने खुद दांव-पेंच सीखे और धीरे-धीरे इस खेल में महारत हासिल की।
चेस ओलंपियाड 2026 में बोधना का प्रदर्शन कैसा रहा?
बोधना ने इंग्लैंड की महिला टीम के बोर्ड 1 पर खेलते हुए 11 में से 8.0 अंक हासिल किए, जिनमें 6 जीत शामिल हैं। बोर्ड 1 की सभी खिलाड़ियों में वह टूर्नामेंट की 13वीं सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहीं और इंग्लैंड महिला टीम 15वें स्थान पर रही।
बोधना शिवानंदन की अन्य प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
बोधना ने 2022 यूरोपियन स्कूल्स चैंपियनशिप में सभी 24 मुकाबले जीते। वह यूके ओपन महिला ब्लिट्ज़ चैंपियन हैं और ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियनशिप का खिताब भी साझा किया है। 9 साल की उम्र में वह शतरंज ओलंपियाड 2024 में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी बनी थीं।
राष्ट्र प्रेस
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