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डी गुकेश: 7 साल में शतरंज, 18 साल में विश्व चैंपियन — कास्परोव का रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास

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डी गुकेश: 7 साल में शतरंज, 18 साल में विश्व चैंपियन — कास्परोव का रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास

सारांश

7 साल में पहली चाल, 12 साल में ग्रैंडमास्टर, 18 साल में विश्व चैंपियन — डी गुकेश की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस जुनून की है जिसने कास्परोव का दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ा और भारत को दूसरा शतरंज विश्व चैंपियन दिया।

मुख्य बातें

डोम्माराजू गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई में हुआ; परिवार का शतरंज से कोई पूर्व संबंध नहीं था।
7 साल की उम्र में पहली शतरंज बाजी; 9 साल में एशियन स्कूल चैंपियनशिप अंडर-9 खिताब जीता।
12 साल 7 महीने 17 दिन की आयु में शतरंज इतिहास के तीसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने।
2024 में 18 साल की उम्र में शतरंज विश्व चैंपियन बने — गैरी कास्परोव का रिकॉर्ड तोड़ा।
विश्वनाथन आनंद के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले केवल दूसरे भारतीय खिलाड़ी।
भारत सरकार ने 2025 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया।

डोम्माराजू गुकेश ने 18 साल की उम्र में शतरंज का विश्व चैंपियन खिताब जीतकर इतिहास रच दिया — वह इस प्रतिष्ठित उपलब्धि को हासिल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने और दिग्गज गैरी कास्परोव का दशकों पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। चेन्नई के इस युवा ग्रैंडमास्टर की यात्रा 7 साल की उम्र में चली पहली शतरंज की चाल से शुरू होकर 2024 में शतरंज जगत की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुँची।

साधारण परिवार से असाधारण सफर

डोम्माराजू गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई में हुआ। उनके पिता डॉ. रजनीकांत ईएनटी सर्जन हैं और माँ माइक्रोबायोलॉजिस्ट — यानी परिवार का शतरंज की दुनिया से कोई सीधा नाता नहीं था। बावजूद इसके, बचपन से ही गुकेश का मन पढ़ाई से अधिक शतरंज की बिसात पर लगता था।

उन्होंने 7 साल की उम्र में शतरंज की पहली बाजी खेली और हफ्ते में कम-से-कम तीन दिन एक से दो घंटे अभ्यास करते थे। उनकी प्रतिभा को उनके कोच और परिजनों ने जल्द पहचान लिया, और उन्हें स्थानीय टूर्नामेंटों में उतारा जाने लगा।

बाल उम्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब

महज 9 साल की उम्र में गुकेश ने एशियन स्कूल शतरंज चैंपियनशिप के अंडर-9 वर्ग में भाग लिया और खिताब अपने नाम किया। इसके बाद तीन साल की अथक मेहनत रंग लाई — 12 साल की उम्र में उन्होंने वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में जीत दर्ज की और कुल 5 स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

गौरतलब है कि 12 साल 7 महीने और 17 दिन की आयु में गुकेश शतरंज के इतिहास के तीसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने — एक ऐसा कीर्तिमान जो उनके असाधारण भविष्य की झलक दे रहा था।

2024: करियर का ऐतिहासिक मोड़

2024 गुकेश के करियर का सबसे स्वर्णिम अध्याय साबित हुआ। 18 साल की उम्र में उन्होंने शतरंज विश्व चैंपियनशिप जीती और सबसे युवा विश्व चैंपियन बनने का कीर्तिमान स्थापित किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने गैरी कास्परोव का वह रिकॉर्ड तोड़ा जो दशकों से अटूट माना जाता था।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शतरंज ने विश्वनाथन आनंद की विरासत के बाद नई पहचान की तलाश शुरू की थी। गुकेश यह उपलब्धि हासिल करने वाले आनंद के बाद केवल दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने।

सरकारी सम्मान और राष्ट्रीय पहचान

विश्व चैंपियन बनने के बाद भारत सरकार ने 2025 में गुकेश को देश के सर्वोच्च खेल सम्मान — मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार — से नवाज़ा। 5 फुट 7 इंच के इस युवा ग्रैंडमास्टर की चालें विपक्षी खिलाड़ियों को भी चकित करती हैं।

गुकेश की कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा में लगाया गया जुनून किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाले युवा को विश्व मंच पर ले जा सकता है। शतरंज जगत अब उनसे आने वाले वर्षों में और भी बड़े कीर्तिमानों की उम्मीद रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं भारत में शतरंज अभी भी क्रिकेट की तुलना में नीति और निवेश दोनों में हाशिये पर है। खेल रत्न सम्मान स्वागत योग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह पहचान जमीनी स्तर पर शतरंज के बुनियादी ढाँचे में बदलाव लाती है — ताकि अगला गुकेश किसी भी शहर से उभर सके।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डी गुकेश कौन हैं और उन्होंने क्या रिकॉर्ड बनाया?
डोम्माराजू गुकेश चेन्नई के शतरंज ग्रैंडमास्टर हैं जिन्होंने 2024 में 18 साल की उम्र में विश्व चैंपियनशिप जीती और सबसे युवा शतरंज विश्व चैंपियन बनने का रिकॉर्ड स्थापित किया। उन्होंने इस उपलब्धि के साथ गैरी कास्परोव का दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।
गुकेश ने शतरंज कब और कैसे शुरू किया?
गुकेश ने 7 साल की उम्र में शतरंज की पहली बाजी खेली और हफ्ते में तीन दिन एक से दो घंटे अभ्यास करते थे। उनके परिवार का शतरंज से कोई पूर्व संबंध नहीं था — पिता ईएनटी सर्जन और माँ माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं।
गुकेश ग्रैंडमास्टर कितनी उम्र में बने?
गुकेश 12 साल 7 महीने और 17 दिन की आयु में ग्रैंडमास्टर बने, जिससे वह शतरंज इतिहास के तीसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए। इससे पहले 12 साल की उम्र में उन्होंने वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में 5 स्वर्ण पदक जीते थे।
गुकेश को खेल रत्न पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने 2025 में गुकेश को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया, जो देश का सर्वोच्च खेल सम्मान है। यह सम्मान उन्हें 2024 विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीतने की उपलब्धि के लिए दिया गया।
गुकेश से पहले किस भारतीय ने शतरंज विश्व चैंपियनशिप जीती थी?
गुकेश से पहले विश्वनाथन आनंद ने यह उपलब्धि हासिल की थी। गुकेश विश्व शतरंज चैंपियन बनने वाले आनंद के बाद केवल दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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