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तानिया सचदेव: 8 साल में पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब, भारतीय शतरंज की 'ग्लैमर गर्ल' का सफर

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तानिया सचदेव: 8 साल में पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब, भारतीय शतरंज की 'ग्लैमर गर्ल' का सफर

सारांश

8 साल में पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब, 2005 में WGM, 2009 में अर्जुन पुरस्कार और 2024 में ओलंपियाड स्वर्ण — तानिया सचदेव का सफर भारतीय शतरंज की सबसे बहुआयामी कहानियों में से एक है। बोर्ड पर चैंपियन, स्क्रीन पर कमेंटेटर।

मुख्य बातें

तानिया सचदेव का जन्म 20 अगस्त 1986 को नई दिल्ली में हुआ; 6 साल की उम्र से शतरंज सीखना शुरू किया।
8 साल की उम्र में पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता; अंडर-12 विश्व युवा चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया।
2005 में विमेंस ग्रैंडमास्टर (WGM) बनने वाली आठवीं भारतीय ; 2008 में इंटरनेशनल मास्टर (IM) खिताब।
2006, 2007 में नेशनल महिला प्रीमियर चैंपियन; 2007 में महिला एशियाई चैंपियन; 2016, 2018, 2019 में कॉमनवेल्थ विमेंस चैंपियन।
सितंबर 2024 में शतरंज ओलंपियाड में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की सदस्य।
भारत सरकार ने 2009 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

भारतीय शतरंज की दुनिया में तानिया सचदेव एक ऐसा नाम हैं जो बोर्ड पर अपनी चालों जितना ही बोर्ड के बाहर भी पहचाना जाता है। नई दिल्ली में 20 अगस्त 1986 को जन्मी तानिया ने मात्र 8 साल की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर यह संकेत दे दिया था कि शतरंज की बिसात पर उनका सफर असाधारण होगा। मॉडलिंग, कमेंट्री और प्रेज़ेंटेशन में सक्रिय रहने के कारण उन्हें 'ब्यूटी विद ब्रेन' और भारतीय शतरंज की 'ग्लैमर गर्ल' के रूप में जाना जाता है।

शुरुआती जीवन और शतरंज से परिचय

तानिया ने 6 साल की उम्र से शतरंज की बारीकियाँ सीखना शुरू किया। उनके पहले कोच केसी जोशी ने उन्हें इस दिमागी खेल की नींव से परिचित कराया। बेहद कम उम्र में खेल की पकड़ और एकाग्रता ने यह स्पष्ट कर दिया कि तानिया सामान्य खिलाड़ी नहीं हैं।

मुख्य उपलब्धियाँ और खिताब

अंडर-12 डिवीजन में विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर तानिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी दस्तक दी। 2002 में उन्होंने एशियन जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। 2005 में वह विमेंस ग्रैंडमास्टर (WGM) का खिताब हासिल करने वाली आठवीं भारतीय महिला बनीं — यह उपलब्धि भारतीय महिला शतरंज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

2006 और 2007 में तानिया ने लगातार नेशनल महिला प्रीमियर शतरंज चैंपियनशिप जीती। 2007 में ही उन्होंने महिला एशियाई शतरंज चैंपियनशिप भी अपने नाम की। 2008 में उन्हें प्रतिष्ठित इंटरनेशनल मास्टर (IM) का खिताब मिला।

2015 में तानिया ने रेक्जाविक ओपन में सर्वश्रेष्ठ महिला का पुरस्कार जीता और उसी वर्ष एशियन कॉन्टिनेंटल विमेंस रैपिड चेस चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया। 2016, 2018 और 2019 में वह कॉमनवेल्थ विमेंस चेस चैंपियनशिप की विजेता रहीं।

ओलंपियाड स्वर्ण और राष्ट्रीय गौरव

तानिया के करियर की सबसे चमकदार उपलब्धि सितंबर 2024 में आई, जब वह शतरंज ओलंपियाड में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली ऐतिहासिक भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। यह जीत भारतीय शतरंज के लिए एक युगांतरकारी क्षण था और तानिया उस गौरवशाली पल की साझेदार थीं।

अर्जुन पुरस्कार और बोर्ड के बाहर का सफर

शतरंज में उत्कृष्ट प्रदर्शन और देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने के लिए भारत सरकार ने 2009 में तानिया सचदेव को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया — जो भारत का दूसरा सर्वोच्च खेल सम्मान है।

गौरतलब है कि तानिया अब शतरंज की वैश्विक स्तर की एक लोकप्रिय कमेंटेटर और प्रेज़ेंटर के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। हालाँकि वह अब पहले की तुलना में कम प्रतियोगिताओं में नज़र आती हैं, शतरंज की दुनिया में उनकी सक्रिय उपस्थिति बनी हुई है। बोर्ड और स्क्रीन — दोनों पर उनकी मौजूदगी यह साबित करती है कि शतरंज की 'ग्लैमर गर्ल' का सफर अभी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कैमरा और प्रतियोगिता — तीनों मोर्चों पर एक साथ सफल हो सकती हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब 2024 के ओलंपियाड स्वर्ण के बाद भारतीय शतरंज वैश्विक ध्यान के केंद्र में है। हालाँकि मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उनकी 'ग्लैमर' छवि पर अटक जाती है, असली कहानी यह है कि तीन दशकों की निरंतरता और अनुशासन ने उन्हें खेल के बाद के करियर में भी अपरिहार्य बनाया है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तानिया सचदेव कौन हैं और वह क्यों प्रसिद्ध हैं?
तानिया सचदेव एक भारतीय शतरंज खिलाड़ी, विमेंस ग्रैंडमास्टर (WGM) और इंटरनेशनल मास्टर (IM) हैं जो नई दिल्ली में जन्मी हैं। वह 2009 के अर्जुन पुरस्कार विजेता, 2024 शतरंज ओलंपियाड स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य और एक लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय शतरंज कमेंटेटर हैं।
तानिया सचदेव ने शतरंज में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब कब जीता?
तानिया सचदेव ने मात्र 8 साल की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता। अंडर-12 डिवीजन में विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था।
तानिया सचदेव को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने तानिया सचदेव को 2009 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उन्हें शतरंज में उत्कृष्ट प्रदर्शन और देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने के लिए दिया गया।
2024 शतरंज ओलंपियाड में तानिया सचदेव की क्या भूमिका थी?
तानिया सचदेव सितंबर 2024 में शतरंज ओलंपियाड में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली ऐतिहासिक भारतीय टीम की सदस्य थीं। यह भारतीय शतरंज इतिहास का एक मील का पत्थर माना जाता है।
तानिया सचदेव की प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ क्या हैं?
तानिया ने 2002 में एशियन जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप, 2006 और 2007 में नेशनल महिला प्रीमियर चैंपियनशिप, 2007 में महिला एशियाई चैंपियनशिप, और 2016, 2018 व 2019 में कॉमनवेल्थ विमेंस चेस चैंपियनशिप जीती। 2015 में रेक्जाविक ओपन में सर्वश्रेष्ठ महिला पुरस्कार और एशियन कॉन्टिनेंटल विमेंस रैपिड चेस में रजत पदक भी उनके नाम है।
राष्ट्र प्रेस
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