कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारी: NSF में IT सलाहकार तैनात करेगा खेल मंत्रालय, NSDE को मिलेगी नई ताकत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (MYAS) और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने 28 मई 2025 को घोषणा की कि वे देशभर के नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF) में समर्पित IT सलाहकार नियुक्त करेंगे। यह कदम नेशनल स्पोर्ट्स डिजिटल इकोसिस्टम (NSDE) के अंतर्गत उठाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और भविष्य के ओलंपिक लक्ष्यों की तैयारी को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करना है। खेल प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में यह भारत सरकार की अब तक की सबसे ठोस डिजिटल पहलों में से एक मानी जा रही है।
पहल का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य खेल संघों के डिजिटल ढाँचे को मज़बूत करना है ताकि प्रतियोगिता कैलेंडर, राष्ट्रीय कोचिंग कैंप, खिलाड़ियों की भागीदारी और खेल प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाएँ अधिक सुव्यवस्थित हों। उन्होंने कहा कि भारत एक मज़बूत खेल इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में खेल मंत्रालय और SAI ने कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं — जिनमें वार्षिक नवीनीकरण पोर्टल, वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कैलेंडर (ACTC), गेम्स मैनेजमेंट सिस्टम (GMS), स्पोर्ट्स फॉर विमेन पोर्टल और नेशनल स्पोर्ट्स रिपॉजिटरी सिस्टम (NSRS) शामिल हैं। इसके अलावा DigiLocker एकीकरण की भी तैयारी चल रही है।
IT सलाहकार क्या काम करेंगे
प्रत्येक NSF में नियुक्त IT सलाहकार खेल संघों को निम्नलिखित कार्यों में तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे — प्रतियोगिता कैलेंडर तैयार करना, खिलाड़ियों और अधिकारियों का नामांकन, परिणाम अपलोड करना, DigiLocker से संबंधित दस्तावेज़ीकरण और रिकॉर्ड मैनेजमेंट। इसके साथ ही SAI और खेल मंत्रालय के साथ डिजिटल समन्वय को भी सुगम बनाया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब NSF पर एक साथ कई डिजिटल प्रक्रियाओं का बोझ बढ़ रहा था और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण कामकाज में देरी हो रही थी। IT सलाहकारों की तैनाती इस खाई को पाटने का प्रयास है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 से कनेक्शन
सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि भारत कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 में रिकॉर्ड पदक जीते और वैश्विक खेल शक्तियों की पंक्ति में खड़ा हो। NSDE और NSF IT सलाहकार पहल के ज़रिये एक ऐसा खेल प्रशासन तंत्र बनाने की कोशिश है जो पारदर्शी, तकनीक-आधारित और खिलाड़ी-केंद्रित हो। डेटा का समय पर अपडेट होना और प्रशासनिक देरी में कमी इस पहल के प्रमुख अपेक्षित परिणाम हैं।
आगे की राह
खेल मंत्रालय के अनुसार, यह पहल भारत के खेल प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रियान्वयन सुचारु रहा, तो यह मॉडल राज्य स्तरीय खेल संघों के लिए भी अनुकरणीय बन सकता है। अगले चरण में DigiLocker एकीकरण के पूर्ण परिचालन और GMS के विस्तार की उम्मीद है।